पौलुस की अंतिम विरासत
रोम की उस अंधेरी कोठरी में हवा ठंडी और गीली थी, जैसे दीवारों से हमेशा के लिए सिमट गई हो। पौलुस ने एक लम्बी सांस ली। उसकी सांस का धुआं मद्धिम चिराग की लौ के सामने ठहरा रहा। उसकी कलाई…
आत्मा की अगुवाई में आज़ादी
मोहन अपनी झोपड़ी की देहरी पर बैठा, सूरज ढलने का इंतज़ार कर रहा था। दिनभर की गर्मी की मार से पूरा गाँव थक गया था, और उसका अपना मन भी एक अजीब सी जकड़न से भरा हुआ था। वह आज़ाद…
बुद्धि से परे प्रेम
कोरिन्थ का बंदरगाह दोपहर की धूप में चमक रहा था। हवा में नमक और जहाजों के रस्सों की गंध, तेल और दूर कहीं सड़ते हुए फलों की मीठी-सड़ी महक मिली हुई थी। दमास्कस का लिनन बेचने वाला एक व्यापारी, लूकियस,…
लूस्त्रा में चमत्कार और पत्थरवाह
उस धूल भरे रास्ते पर, जहाँ जैतून के पेड़ों की छाया लगभग खत्म हो रही थी और खुले मैदान की गर्मी शुरू होती थी, दो आदमी चले जा रहे थे। पौलुस की चाल में एक तेजस्वी थकान थी, मानो उसका…
रात की गोपनीय शिक्षा: निकुदेमुस और यीशु
यरूशलेम की रातें एक अजीब सी सन्नाटे से भरी होती थीं। दिन भर की धूप की गर्मी पत्थरों से टकराती हुई धीरे-धीरे ठंडी हो रही थी। निकुदेमुस अपने कमरे में बैठा, उसके हाथ में एक खुली हुई धर्म-पुस्तक थी, लेकिन…
विश्वास का फल और मंदिर की शुद्धि
वह सुबह जैतून के पहाड़ की ढलानों से उतर रहा था, तो हवा में बसन्त की एक कोमल सुगंध थी। यरूशलेम नीचे दूर, धुंधली सुबह की रोशनी में चमक रहा था, मानो सफेद पत्थरों ने सूरज की पहली किरणों को…
नींव और नीतियों का चयन
उस गाँव में, जहाँ धूल के बादल हमेशा मौसम का हाल बताया करते थे, यूसुफ़ नाम का एक बूढ़ा किसान रहता था। उसकी झोंपड़ी पहाड़ी की तलहटी में थी, और हर सुबह जब सूरज की पहली किरण जैतून के पेड़ों…
हबक्कूक का विश्वास संघर्ष
हबक्कूक उस ऊँची पहाड़ी पर खड़ा था जहाँ से यरूशलेम के पत्थर घरों की छतें और मंदिर का शिखर दिखाई देते थे। दिन ढल रहा था, और पश्चिमी आकाश में सिंदूरी लपटें फैल रही थीं, मानो आग सुलग रही हो।…
अनर्थ की फसल
उन दिनों की बात है, जब शोमरोन का पहाड़़ अभी भी हरा-भरा था, और उसकी तलहटी में बसा इज़राइल का राज्य, एक लहलहाती दाख की बारी की तरह फैला हुआ था। लोग कहते थे कि उसकी उपज इतनी भरपूर थी…
गोग का प्रलयकारी आक्रमण
उस दिन की बात है जब हवा में एक अजीब-सी गंध थी। सर्दियों की वह सुबह, जब कोहरा यरूशलेम के पहाड़ों से लिपटा हुआ था, ऐसा लग रहा था मानो आकाश ने धरती को एक सफेद चादर से ढक दिया…



















