यहेजकेल का पवित्र भूभाग दर्शन

एक सर्द सुबह, यरूशलेम के पुराने तपस्वी याजक, एलीआजर, अपनी कुटिया की खिड़की से पूर्व की ओर देख रहे थे। धुंध के पार सूरज की पहली किरणें हल्की सुनहरी धारियाँ बिछा रही थीं। उनकी आँखें थकी हुई थीं, पर दिल…

परित्यक्ता से राजकुमारी

वह सुबह थी जब वह बोला। हवा में चुप्पी थी, पर शब्द इतने स्पष्ट थे कि लगा जैसे पत्थरों के दिलों में उकेरे जा रहे हों। “तू अपना मूल स्थान, अपना जन्म स्मरण कर। तेरा पिता एमोरी था, तेरी माता…

विश्वासघात की छाया में

मिसपा का किला सूरज की तिरछी किरणों में एक उदास सुनहराई लिए खड़ा था। यह वह स्थान था जहाँ बाबुल के हाकिम नबूजरदान ने गदल्याह को अधिकार सौंपा था—यहूदा के बचे-खुचे लोगों की बागडोर। हवा में धूल और हार का…

यिर्मयाह का विलाप: टोपेत का धुँआ

वह एक पुराने जैतून के पेड़ के नीचे बैठा था, जिसकी जड़ें पहाड़ी की चट्टानों में उलझी हुई थीं। नीचे, कीद्रोन की घाटी में साया लम्बा हो रहा था, और यरूशलेम की दीवारों पर सूरज की आखिरी किरणें सोने जैसा…

बंधुआई से मुक्ति की कुम्हार की कहानी

वह कुम्हार अपने खाली चाक के सामने बैठा था। हाथों में मिट्टी का स्पर्श महीनों से भूला हुआ था। दिन की गर्मी धीरे-धीरे ढलान पर थी, और खिड़की से आती हल्की रोशनी में धूल के कण नाच रहे थे। उसकी…

यिशै के ठूंठ से आशा का अंकुर

यहूदा के सुनसान पहाड़ों पर एक दोपहर, हवा में ठंडक थी और आसमान सीसे जैसा भारी लग रहा था। यशायाह ने अपनी कुटिया के सामने बैठकर जैतून के एक पुराने पेड़ की जड़ों को देखा। वह पेड़ काफी पहले कट…

आगूर की शिक्षाएँ

यह बात है आगूर की, याकीन के पुत्र की। वह दमिश्क के उत्तर में, एक ऐसे गाँव में रहता था जहाँ से हेर्मोन पर्वत की बर्फ़ीली चोटियाँ दिखाई देती थीं। दिन ढलने का समय था। आगूर अपनी कुटिया के सामने,…

सृष्टि का महान गीत

सुबह की पहली किरण ने कैलाश पर्वत के बर्फीले शिखर को सोने जैसा रंग दिया था। वृद्ध बाबा मातानाथ, जिनकी दाढ़ी हिमखंडों जैसी सफ़ेद हो चुकी थी, अपनी कुटिया के बाहर बने पत्थर के चबूतरे पर बैठे चूल्हे पर चाय…

मौत से लौटा एक जीवन

वह दिन आज भी याद है, जब सब कुछ धुंधला सा लगने लगा था। घर की खिड़की से दिखता आम का पेड़, माँ की आवाज़, चूल्हे पर चढ़े बर्तन की खनक – सब कुछ मानो मेरे और दुनिया के बीच…

एक तीर्थयात्री की अंतिम यात्रा

यह कहानी एक बूढ़े यहूदी तीर्थयात्री की है, जिसका नाम एलीशेफ था। उसकी उम्र के साथ पैरों में एक स्थायी पीड़ा बस गई थी, पर हर साल, जब भी निसान का महीना आता, उसका मन सिय्योन की ओर बेचैन हो…