प्रतीक्षा में आशा की किरण

(यह कहानी प्रथम शताब्दी के मकिदुनिया के नगर थिस्सलुनीके की पृष्ठभूमि में रची गई है, और पौलुस के दूसरे पत्र के सन्दर्भ को एक कथा का रूप देती है।) हवा में पहले से ही एक तीखी सर्दी का आभास था,…

पौलुस का पत्र और कोरिंथ का खेद

वह दिन कोरिंथ की गलियों में भीगी हुई धूप की तरह था, ऐसा लग रहा था मानो आसमान ने किसी बड़े दुःख को अपने नीलेपन में छुपा रखा हो। एलियास अपनी छोटी सी मिट्टी की दुकान के सामने बैठा, आँगन…

आंतरिक संघर्ष और मुक्ति का सफर

वह कमरा शाम की लंबी छायाओं में डूबा हुआ था। एक पुरानी मेज़ पर बिखरे हीरे, पांडुलिपियों के पन्ने और एक टिमटिमाते हुए दीये की रोशनी में उभरते अक्षर। प्रकाश ने ‘रोमियों’ शब्द पर ज़ोर दिया था, फिर ‘अध्याय सात’।…

सुंदर द्वार पर चमत्कार

दोपहर की झुलसाती धूप यरूशलेम की पथरीली गलियों को तपा रही थी। शहर अभी भी त्योहार की थकान और उल्लास दोनों को झेल रहा था। मंदिर का विशाल परिसर, जो सुबह से ही भीड़ से गूंज रहा था, अब दोपहर…

धनी और लाजर की शिक्षाप्रद कथा

यह कहानी है एक धनी व्यक्ति की, जिसका नाम था एलियाह। वह यरूशलेम के एक विशाल भवन में रहता था, जिसके द्वार पर बैंगनी और महीन सनी के परदे लटकते थे। उसका जीवन उत्सव और विलासिता से भरा था। हर…

खाली कब्र और जी उठा मसीह

भोर का अँधेरा धीरे-धीरे पतला हो रहा था। पूर्वी आकाश में एक फीका सा प्रकाश की रेखा दिखी, जैसे कोई चाक से हल्की सी लकीर खींच गया हो। हवा में नमी थी, और ठंडक हड्डियों तक चुभती थी। मरियम मगदलीनी…

योना और करुणा का रेंड़

योना नगर के पूर्व की ओर बैठा था। वहाँ उसने एक झोंपड़ी सी बना ली थी, धूप से बचने को। मन उसका उबल रहा था—एक गहरी, कसैली उबाल, जो उसके भीतर सुलगती रहती। नीनवे बच गया था। उसका विनाश नहीं…

समुद्र द्वारा निगले गए तूर का शोक

समुद्र के किनारे बैठा वह बूढ़ा मल्लाह अब भी उस शहर को याद करता है, जैसे कोई बिछड़े हुए प्रेमी को याद करता हो। उसकी आँखों के सामने तूर अभी भी जीवित है – समुद्र की लहरों पर तैरता हुआ…

अंधेरी कोठरी में जागा विश्वास

यिर्मयाह के पैरों के नीचे मन्दिर के पत्थर गर्म हो रहे थे। दोपहर की तेज धूप ने उस स्थान को एक भट्ठी बना दिया था, पर उसके भीतर की आग इससे भी ज्यादा धधक रही थी। वह अभी-अभी वहाँ से…

विधवा से रानी का सफर

वह अकेली रह गई थी। सुनसान झोपड़ी की चारदीवारी में, रातों के सिलसिले उसे चीरते हुए, सुबह की पहली किरण को झरोखे से झाँकते देखना ही उसका एकमात्र काम था। नाम? अब नाम का कोई अर्थ नहीं रह गया था।…