यूसुफ और फ़िरौन के सेवकों के स्वप्न

कारागार की उस कोठरी में हवा तक जम गई लगती थी। नमी थी, जिसमें सड़न और मिट्टी की गंध रच-बस गई थी। यूसुफ को अब इसकी आदत सी हो गई थी। दिन बीतते थे, पर समय का अहसास धुंधला सा…

जैतून की पत्ती का वादा

पानी की आवाज़ अब वह भयावह गर्जना नहीं थी जो कभी आकाश और धरती के बीच गूंजती थी। अब बस एक स्थिर, नीरस टपटपाहट थी, जो लकड़ी के मस्तूल से टकराती और नीचे बहती रहती थी। नूह ने अपना माथा…

सिय्योन पर प्रकट हुई अंतिम दृष्टि

वह सिय्योन की पहाड़ी पर खड़ा था, और हवा में एक अजीब सी गूंज थी, जैसे कोई दूर का सागर गरज रहा हो। उसकी आँखें आकाश की ओर टिकी थीं, जो शुद्ध नीलामणि की तरह चमक रहा था। फिर, ऐसा…

प्रतीक्षा में आशा की किरण

(यह कहानी प्रथम शताब्दी के मकिदुनिया के नगर थिस्सलुनीके की पृष्ठभूमि में रची गई है, और पौलुस के दूसरे पत्र के सन्दर्भ को एक कथा का रूप देती है।) हवा में पहले से ही एक तीखी सर्दी का आभास था,…

पौलुस का पत्र और कोरिंथ का खेद

वह दिन कोरिंथ की गलियों में भीगी हुई धूप की तरह था, ऐसा लग रहा था मानो आसमान ने किसी बड़े दुःख को अपने नीलेपन में छुपा रखा हो। एलियास अपनी छोटी सी मिट्टी की दुकान के सामने बैठा, आँगन…

आंतरिक संघर्ष और मुक्ति का सफर

वह कमरा शाम की लंबी छायाओं में डूबा हुआ था। एक पुरानी मेज़ पर बिखरे हीरे, पांडुलिपियों के पन्ने और एक टिमटिमाते हुए दीये की रोशनी में उभरते अक्षर। प्रकाश ने ‘रोमियों’ शब्द पर ज़ोर दिया था, फिर ‘अध्याय सात’।…

सुंदर द्वार पर चमत्कार

दोपहर की झुलसाती धूप यरूशलेम की पथरीली गलियों को तपा रही थी। शहर अभी भी त्योहार की थकान और उल्लास दोनों को झेल रहा था। मंदिर का विशाल परिसर, जो सुबह से ही भीड़ से गूंज रहा था, अब दोपहर…

धनी और लाजर की शिक्षाप्रद कथा

यह कहानी है एक धनी व्यक्ति की, जिसका नाम था एलियाह। वह यरूशलेम के एक विशाल भवन में रहता था, जिसके द्वार पर बैंगनी और महीन सनी के परदे लटकते थे। उसका जीवन उत्सव और विलासिता से भरा था। हर…

खाली कब्र और जी उठा मसीह

भोर का अँधेरा धीरे-धीरे पतला हो रहा था। पूर्वी आकाश में एक फीका सा प्रकाश की रेखा दिखी, जैसे कोई चाक से हल्की सी लकीर खींच गया हो। हवा में नमी थी, और ठंडक हड्डियों तक चुभती थी। मरियम मगदलीनी…

योना और करुणा का रेंड़

योना नगर के पूर्व की ओर बैठा था। वहाँ उसने एक झोंपड़ी सी बना ली थी, धूप से बचने को। मन उसका उबल रहा था—एक गहरी, कसैली उबाल, जो उसके भीतर सुलगती रहती। नीनवे बच गया था। उसका विनाश नहीं…