सातवें महीने की पवित्र यात्रा
सातवाँ महीना था। तिशरी का महीना। हवा में अब गर्मी का सितम नहीं, बस एक कोमल सरसराहट थी, जो शाम ढलते ही ठंडक में बदल जाती। पहाड़ियों के पीछे से सूरज डूब रहा था और लम्बी-लम्बी छायाएँ मिलाप के डेरे…
पवित्रता और पत्थरों का न्याय
सूरज ढलने लगा था, और मरूभूमि की लालिमा तम्बू के परिसर पर पड़ रही थी। हवा में धूल के कण नाच रहे थे, और दूर से बकरियों के ब्लेटने की आवाज आ रही थी। मूसा ने पवित्र तम्बू के सामने…
सुनहरे बछड़े का पाप
चिलचिलाती धूप रेगिस्तान की रेत को तप्त किए हुए थी। सिनै पर्वत एक विशाल, धूसर और गूँजते हुए रहस्य की तरह आसमान से टकराया खड़ा था। नीचे, उस विस्तृत घाटी में, एक भीड़ बेचैन हो रही थी। दिन गिने जा…
यूसुफ का क्षमा और विश्वास
यूसुफ उस शव पर गिरकर रोया, अपने पिता के ठंडे माथे को छूकर। मिस्र की भरी धूप में भी उसे एक कंपकंपी सी लग रही थी। याकूब का शरीर, जो इतने वर्षों तक उसके लिए एक सहारा, एक स्मृति बना…
अब्राहम और तीन दिव्य अतिथि
दिन ढल चुका था, पर मामरे के पेड़ों की घनी छाया में अभी भी दोपहर की जड़ता छाई हुई थी। अब्राहम अपने तम्बू के मुहाने पर बैठा था, उम्र के भार से कुछ झुका हुआ, पर आँखों में वही सदा…
प्रतीक्षा और आशा का दिन
उस गाँव में, जहाँ चिलचिलाती धूप मिट्टी के घरों की दीवारों पर सफेदी चढ़ा देती थी, बूढ़ा इलियास अपनी झोपड़ी के साये में बैठा, आँखें बंद किए, दूर क्षितिज को सुन रहा था। हवा में सूखी मिट्टी की गंध थी,…
पौलुस का गलातियों को स्वतंत्रता का पत्र
येरूशलेम के पुराने रस्तों पर धूप ढल रही थी। हवा में मिट्टी और जलती हुई लकड़ी की गंध थी। शाऊल, जिसे अब सब पौलुस कहते थे, एक कमरे में टहल रहा था। उसकी उंगलियाँ एक पुरानी मेज़ की खुरदरी सतह…
क्रूस की मूर्खता और मलिक की समझ
कुरिन्थुस का बंदरगाह दिनभर की गर्मी के बाद एक नम, नमकीन सांस छोड़ रहा था। हवा में जहाजों के रस्सों की खटखटाहट, दूर बाजार से आती हल्दी और जैतून के तेल की गंध, और कहीं से आते यूनानी दार्शनिकों के…
प्रकाश की ओर पहला कदम
समुद्र की हल्की लहरें जहाज़ के पतवार से टकरा रही थीं, और हवा में नमक की एक हल्की गंध थी। पौलुस ने कन्धे पर पड़ी अपनी साधारण चादर को ठीक किया, और आँखें सेलेउकिया के बढ़ते हुए तट की ओर…
काना का चमत्कार
काना गाँव की गलियाँ उस दिन शादी के गीतों से गूंज रही थीं। हवा में केसर और इलायची की खुशबू तैर रही थी, और दोपहर की धूप नीम के पेड़ों से छनकर आँगन में चाँदी के सिक्कों की तरह बिखर…



















