धनी और लाजर की शिक्षाप्रद कथा
यह कहानी है एक धनी व्यक्ति की, जिसका नाम था एलियाह। वह यरूशलेम के एक विशाल भवन में रहता था, जिसके द्वार पर बैंगनी और महीन सनी के परदे लटकते थे। उसका जीवन उत्सव और विलासिता से भरा था। हर…
खाली कब्र और जी उठा मसीह
भोर का अँधेरा धीरे-धीरे पतला हो रहा था। पूर्वी आकाश में एक फीका सा प्रकाश की रेखा दिखी, जैसे कोई चाक से हल्की सी लकीर खींच गया हो। हवा में नमी थी, और ठंडक हड्डियों तक चुभती थी। मरियम मगदलीनी…
योना और करुणा का रेंड़
योना नगर के पूर्व की ओर बैठा था। वहाँ उसने एक झोंपड़ी सी बना ली थी, धूप से बचने को। मन उसका उबल रहा था—एक गहरी, कसैली उबाल, जो उसके भीतर सुलगती रहती। नीनवे बच गया था। उसका विनाश नहीं…
समुद्र द्वारा निगले गए तूर का शोक
समुद्र के किनारे बैठा वह बूढ़ा मल्लाह अब भी उस शहर को याद करता है, जैसे कोई बिछड़े हुए प्रेमी को याद करता हो। उसकी आँखों के सामने तूर अभी भी जीवित है – समुद्र की लहरों पर तैरता हुआ…
अंधेरी कोठरी में जागा विश्वास
यिर्मयाह के पैरों के नीचे मन्दिर के पत्थर गर्म हो रहे थे। दोपहर की तेज धूप ने उस स्थान को एक भट्ठी बना दिया था, पर उसके भीतर की आग इससे भी ज्यादा धधक रही थी। वह अभी-अभी वहाँ से…
विधवा से रानी का सफर
वह अकेली रह गई थी। सुनसान झोपड़ी की चारदीवारी में, रातों के सिलसिले उसे चीरते हुए, सुबह की पहली किरण को झरोखे से झाँकते देखना ही उसका एकमात्र काम था। नाम? अब नाम का कोई अर्थ नहीं रह गया था।…
बुद्धि और मूर्खता की कहानी
बात उन दिनों की है जब राजा यरोबाम के शासन के अंतिम वर्ष थे। शिलोह गाँव में एक बूढ़ा किसान रहता था, नाम था एलियाब। उसकी उम्र के साथ-साथ अनुभव की परतें भी चढ़ी थीं, और वह अक्सर अपने खेत…
परमेश्वर की नींव पर घर
वह दिन अभी तक याद है जिद्दू को। सुबह के चार बजे थे, और ठंडी हवा खिड़की के शीशे पर पानी की बूंदें छोड़ रही थी। उसकी आँखें जलती हुईं थीं, और मेज पर बिखरे हुए कागज़ उसकी कोशिशों के…
हृदय का भजन
वह सुबह ठंडी थी, पहाड़ियों की चोटियों पर हल्का सा धुंधला पन छाया हुआ था। बूढ़ा एलिय्याह अपनी झोंपड़ी के सामने बैठा, एक टूटी हुई चटाई पर, और उसकी आँखें उस विस्तृत घाटी को निहार रही थीं जो उसके सामने…
मरुभूमि में आत्मा की प्यास
यह बात उस समय की है जब मैं यरूशलेम से दूर, पूरब के उन सूखे इलाकों में भटक रहा था। वह कोई रेगिस्तान नहीं था, बल्कि एक ऐसा स्थान था जहाँ धरती फटी हुई थी, और आकाश तपता हुआ सीसा…



















