फेस्तुस के सामने पौलुस की अपील
सीज़रिया के बंदरगाह पर हवा में नमक और दूर आते-जाते जहाज़ों की गंध थी। फेस्तुस नया राज्यपाल बनकर अभी तीन दिन पहले ही आया था, और उसके कानों में यहूदियों के फुसफुसाए गए शिकायतों के शब्द पहले से ही गूंज…
अंतिम भोज और वादा
उस ऊपरी कक्ष में हवा भारी थी। दिन भर की बातें, उस अजीब सी गूँजती चेतावनी कि ‘तुम में से एक मुझे पकड़वाएगा,’ ने सबके मन को एक पत्थर की तरह दबोच रखा था। दीवार पर तेल के दीपक की…
शनिवार और पर्वत का उपदेश
एक सुबह, ठंडी हवा में धुंध लिपटी हुई थी, गलील की झील का पानी शांत और चमकदार। येशू किनारे पर टहल रहे थे, उनकी नज़र दूर मछुआरों की नावों पर टिकी हुई, जो रात भर के परिश्रम के बाद अपने…
क्षमा का असीम सागर
कफरनहुम की गलियों में दोपहर की धूप तिरछी पड़ रही थी। पत्थरों के घरों से उठती गर्मी की लहर हवा में तैर रही थी। यीशु, थके हुए कदमों से चलते हुए, एक बरगद के पेड़ की छाया में बैठ गए।…
जकर्याह का दीपाधार दर्शन
वह दिन ढल रहा था और यरूशलेम की हवा में पत्थर की धूल और उदासी का स्वाद था। जकर्याह खंडहर हो चुके मन्दिर के आँगन में खड़ा था। उसकी आँखों के सामने बिखरे पत्थरों के ढेर थे, जो एक ऐसी…
अनुग्रह की पुकार और न्याय का दिन
सुबह की हल्की धूप में, यारदन नदी के पास के खेतों में हवा ठंडी थी, पर हवा में एक अजीब सी गर्माहट भी थी, जैसे आने वाले दिनों की चेतावनी। एक खेतिवाल, एलियाकीम, अपनी जर्जर कुटिया के साहिल पर बैठा,…
दानिय्येल और उसके मित्रों की परीक्षा
यह उस समय की बात है जब यरूशलेम की दीवारें धूल में मिल चुकी थीं। राजा नबूकदनेस्सर की सेना ने नगर को घेर लिया था, और परमेश्वर के मन्दिर के सोने-चाँदी के पात्र भी, जिन पर इज़राइल के पूर्वजों की…
दो बाज़ और एक वादा
बात उन दिनों की है, जब यहूदा का सूरज ढल रहा था, और बाबुल का साम्राज्य आकाश की तरह फैला हुआ था। यहेजकेल नबी, नदी के किनारे बसे निर्वासन के गाँव में, लोगों के बीच बैठे थे। हवा में धूल…
वचन और विद्रोह
यह सब उसके बाद हुआ, जब गिदाल्याह का वध हो चुका था। मिस्पा का वह आंगन, जहाँ कभी नबूजरदनेजर के प्रतिनिधि ने शांति की छाया बिछाने की कोशिश की थी, अब एक सन्नाटे से भरा हुआ था, जो चीख़ से…
मूरतों से सच्चाई का सबक
यह बात उन दिनों की है जब यरूशलेम की गलियों में अजीब सी बेचैनी हवा के साथ बहती थी। हम लोग, यहूदा के बूढ़े, दमिश्क दरवाजे के पास जैतून के एक पेड़ के नीचे बैठा करते थे। वहीं से शहर…



















