विद्या और अटूट प्रेम
(यह कहानी एक काल्पनिक पात्र, विद्या, के जीवन के माध्यम से रोमियों 8 के सत्य को दर्शाती है। यह एक मानव रचना है, जो स्वाभाविक लय और अधूरेपन के साथ लिखी गई है।) सुबह की ठंडी हवा खिड़की से अंदर…
लंगड़े का चमत्कारिक उपचार
यरूशलेम की सुबह धीरे-धीरे खुल रही थी। मन्दिर की ओर जाने वाली सँकरी गलियों में लोगों का हलचल भरा शोर पहले ही गूँजने लगा था। पतरस और यूहन्ना, दोनों उसी भीड़ में शामिल थे, जैसे हर रोज़ होता था। वे…
क्षमा, विश्वास और राज्य का रहस्य
सूरज ढलने लगा था, और यरदन नदी के पार के उन पहाड़ों पर एक सुनहरी सी चादर बिछ रही थी। यीशु, थके हुए कदमों से, अपने चेलों के बीच चल रहे थे। रास्ता कठिन था, धूल भरा। उनके चेले आपस…
यूहन्ना का बपतिस्मा और यीशु की परीक्षा
येरदन नदी के किनारे की हवा में एक अजीब सी गर्मजोशी थी, ऐसी नहीं जो चेहरे को झुलसाए, बल्कि जो दिल के अंदर तक एक उम्मीद की सिहरन पैदा कर दे। जंगली शहद की मीठी गंध हवा में तैर रही…
भगवान के नाम का अपमान
हवा में ठंडक थी, पर उस सुबह सूरज ने अपनी पहली किरणों से यरूशलेम के पत्थरों को सोने सा रंग दे दिया था। मन्दिर के प्रांगण में, एलियाकीम नाम का एक युवा याजक, वेदी के सामने खड़ा, अपने हाथों को…
मीका की विध्वंस भविष्यवाणी
बात उन दिनों की है जब राजा योताम, आहाज और हिजकिय्याह के समय में यहूदा के पहाड़ी इलाकों में साँझ ढलते ही एक अजीब सी सन्नाटा छा जाता था। मोरेशेत के गाँव में रहने वाले बूढ़े एलिय्याह अक्सर अपनी कुटिया…
दानिय्येल का अंतिम दर्शन
बाबुल की गर्म हवाएँ अब भी उसी तरह चलती थीं, पर दानिय्येल के शरीर में अब वह ताप नहीं रहा। वह बूढ़ा हो चला था, हड्डियाँ काँटों-सी चुभतीं, आँखों के सामने धुंधलका सा छाया रहता। पर आत्मा… आत्मा अभी भी…
अहंकार का पतन
तूर के राजा के विषय में एक वृत्तांत है, जो समुद्र के किनारे बसा एक व्यापारिक नगर था। उसकी गलियाँ शुद्ध सोने से पटी थीं, और उसके बाज़ारों में ऐसे माणिक और पन्ने बिकते थे, जिनकी चमक सूर्य के प्रकाश…
विलाप की लंबी रात
(यह कहानी विलापगीत के प्रथम अध्याय की भावना और छवियों पर आधारित एक मौलिक कल्पना है।) हवा में धूल के कण तैर रहे थे, जैसे सूरज की रोशनी में नाचती हुई राख। यरूशलेम की वह सड़क, जहाँ कभी त्योहारों के…
प्यास बुझाने वाला निमंत्रण
वह दिन ऐसे शुरू हुआ जैसे बीते हुए कई दिन—धूप तेज, हवा में धूल के कण तैरते, और शहर की गलियों से आती हलचल की एक नीरस गूँज। अमर एक छोटी सी दुकान पर बैठा, हिसाब-किताब की कॉपियों पर नजर…



















