वाचा का नवनिर्माण

यरूशलेम की दीवारों की मरम्मत का काम पूरा हो चुका था, पर एक और काम बाकी था। वह दीवार से भी ऊँची, और पत्थर से भी मजबूत वाचा बाँधने का काम था। नहेम्याह उस सुबह बहुत जल्दी उठ गया। उसके…

मंदिर की मरम्मत और राजा का पतन

यरूशलेम की सुबह थी, ओस से भीगी हुई। राजमहल के पत्थरों पर सूरज की पहली किरणें फिसल रही थीं, पर उसके भीतर का वातावरण अजीब सा भारी था। योआश, जो सात वर्ष की आयु से ही राजा बना बैठा था,…

गिनती का पाप और दाऊद का पश्चाताप

येरूशलेम के महल की छाया में दाऊद बैठा था, पर उसका मन अशांत था। राज्य स्थिर था, शत्रु परास्त हो चुके थे, पर एक विचित्र खालीपन, एक ऐसी जड़ता उसे घेरे हुए थी जिसका नाम वह स्वीकार नहीं कर पा…

सुलैमान के राज्य की गणना

यरूशलेम की सुबह धीरे-धीरे खुल रही थी। पहाड़ियों से कोहरा सरक रहा था, और राजमहल के श्वेत पत्थरों पर सूरज की पहली किरणें टिमटिमा रही थीं। सुलैमान का राज्य, अब स्थिर और विस्तृत, एक विशाल देह की तरह सुबह की…

योशू की स्मृति में इकतीस राजा

धुप ढलने लगी थी, और गिलगाल के शिविर में आग की लपटों के चारों ओर बूढ़े योशू का घेरा सिमट आया था। हवा में भुनी हुई मछली और धूल की सुगंध थी। नए युवा सैनिक, जिनके हाथों पर अभी तलवार…

पवित्रता का पाठ

धूप चट्टानों पर तप रही थी, और हवा में धूल के महीन कण तैरते दिखाई देते थे। एलियाकीम अपने खेमे के बाहर एक पत्थर पर बैठा, अपनी हथेलियों को देख रहा था। उसके सिर के बाल उलझे हुए थे, और…

पवित्र सेवा का भार

सूरज ढलने लगा था, और मरुभूमि की लालिमा मिश्कान के सफेद बने तम्बू पर पड़ रही थी। हारून अपनी कुटिया के सामने बैठा, हाथों पर नज़र गड़ाए थे। ये वही हाथ थे जिन्होंने धूप-वेदी पर धूनी चढ़ाई थी, जो प्रायश्चित…

कोढ़ नहीं, केवल एक दाग

उस सुबह सूरज की पहली किरण ने जंगली जैतून के पेड़ों को सुनहरा रंग दिया था, पर एलियाकीम की नज़र अपनी बांह पर थी। एक दाग, बस थोड़ा सा, गुलाबी और बेखबर, त्वचा से थोड़ा उभरा हुआ। उसने उंगली से…

सिनाई पर नियमों की यात्रा

सिनाई की उस रेगिस्तानी धरती पर हवा भी जैसे थम सी गई थी। दोपहर की तीखी धूप चट्टानों से टकराकर एक तपिश भरी लहर में फैल रही थी। एलीएजर, जो अभी बीस बरस का ही था, अपने पिता के मेमनों…

पोतीपर की पत्नी और यूसुफ की परीक्षा

वो दिन आम दिनों जैसा ही शुरू हुआ था। मिस्र की धूप तेज थी, और हवा में रेत के महीन कण तैर रहे थे। यूसुफ ने आँगन में खड़े होकर एक लम्बी साँस ली। पोतीपर का घर, जहाँ वह सेवक…