परमेश्वर की नींव पर घर

वह दिन अभी तक याद है जिद्दू को। सुबह के चार बजे थे, और ठंडी हवा खिड़की के शीशे पर पानी की बूंदें छोड़ रही थी। उसकी आँखें जलती हुईं थीं, और मेज पर बिखरे हुए कागज़ उसकी कोशिशों के…

हृदय का भजन

वह सुबह ठंडी थी, पहाड़ियों की चोटियों पर हल्का सा धुंधला पन छाया हुआ था। बूढ़ा एलिय्याह अपनी झोंपड़ी के सामने बैठा, एक टूटी हुई चटाई पर, और उसकी आँखें उस विस्तृत घाटी को निहार रही थीं जो उसके सामने…

मरुभूमि में आत्मा की प्यास

यह बात उस समय की है जब मैं यरूशलेम से दूर, पूरब के उन सूखे इलाकों में भटक रहा था। वह कोई रेगिस्तान नहीं था, बल्कि एक ऐसा स्थान था जहाँ धरती फटी हुई थी, और आकाश तपता हुआ सीसा…

अय्यूब की रात: ईश्वर के सामने प्रश्न

उस रात नींद टूटी तो फिर आई ही नहीं। कहाँ आती, जब शरीर के हर जोड़ में दर्द धँसा हुआ था, और मन उससे कहीं ज्यादा टूटा हुआ था। मैंने अपने खाट के पास पड़े एक टुकड़े खजूर की लकड़ी…

विश्वास की विजय: राजा आसा

यहूदा के पहाड़ी इलाके में दोपहर की गर्मी स्थिर थी, ऐसी लग रही थी जैसे हवा ने भी साँस लेना छोड़ दिया हो। यरूशलेम की पथरीली गलियों से उठती धूल, राजमहल के ऊँचे बुर्ज पर बैठे आसा के चेहरे पर…

एलिशा और शूनेमी स्त्री का चमत्कार

उस समय की बात है, जब गिलगाल से उठकर भविष्यद्वक्ता एलिशा ने बैतल में प्रवेश किया। वहां के लोगों में एक बात फैली – परमेश्वर का भय यहां उपस्थित है। वह अक्सर शूनेम से गुजरता, जहां एक प्रतिष्ठित स्त्री रहती…

गिलाद में छुटकारे की प्रतीक्षा

उन दिनों की बात है, जब न्यायी एक के बाद एक आते और जाते रहते थे, मानो पहाड़ी नालों का पानी, बरसात में भर जाता और गर्मी में सूख जाता। तोला, और फिर याईर, तेईस वर्षों तक उन्होंने इस्त्राएल का…

लाल रस्सी का वचन

यरीहो की दीवारें सूरज की ढलती किरणों में ईंट के पक्के रंग की तरह जल रही थीं। शहर के अंदर हलचल थी, लेकिन उस हलचल में एक सन्नाटा छिपा था – जैसे बादल गरजने से पहले का वक्त हो। बाजार…

वादा किनारे पर चुनाव

दोपहर की झुलसा देने वाली धूप थी, जो मोआब के उन विस्तृत मैदानों पर पसरी हुई थी। हवा में धूल के महीन कण तैर रहे थे, और दूर जॉर्डन नदी की रेखा धुंधली सी दिखाई दे रही थी। लोग इकट्ठा…

लेवियों का अभिषेक और समर्पण

सिनाई के विशाल रेगिस्तान में हवा भी धीरे चलती थी, मानो परमेश्वर के डेरे के आसपास की पवित्रता को न डुला सके। मिलाप के तम्बू के सामने का विस्तार, जहाँ रेत सुनहरी और आकाश नीला एक दूसरे से मिलते थे,…