युद्ध की पूर्व संध्या पर दाऊद की प्रार्थना

यरूशलेम की सुबह धुंधली और ठंडी थी। पूर्वी आकाश में हल्की सफेदी फैलने लगी थी, पर अभी भी रात की कालिमा पहाड़ियों की तलहटी में छिपी हुई थी। राजभवन की छत पर खड़ा दाऊद ठंडी हवा को अपने चेहरे पर…

अय्यूब का हृदय-विलाप

(यह कहानी अय्यूब के शब्दों और उसके हृदय की पीड़ा को, उसी के मुख से सुनाने का प्रयास करती है। यह साहित्यिक कल्पना है, परन्तु पवित्रशास्त्र के आधार पर।) मेरी स्थिति अब ऐसी है कि जिनके बापों को मैंने अपने…

एस्तेर की विजय और नया फरमान

शहर शूशन सुबह की नरम धूप में नहाया हुआ था। महल के आँगन में चहल-पहल थी, पर रानी एस्तेर के कक्ष में एक गहरी शांति पसरी हुई थी। खिड़की से आती रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी, जो थकान…

योशिय्याह का महान फसह

यरूशलेम की सुबह थी, और ऊषा की पहली किरणें मंदिर के सफेद पत्थरों पर पड़ रही थीं, जैसे स्वर्ग की ओर से एक कोमल स्पर्श। हवा में बसंत की सुगंध थी, और जैतून के पेड़ों के पत्ते हल्के से सरसरा…

सुलैमान मंदिर का निर्माण

यरूशलेम की वह पहाड़ी, जहाँ कभी अरावना का खलिहान हुआ करता था, अब एक अद्भुत चहल-पहल से गूंज रही थी। हजारों कारीगर, राजगीर, लुहार और बढ़ई दिन-रात काम में जुटे थे। राजा सुलैमान स्वयं प्रतिदिन आता, चुपचाप खड़ा होकर निर्माण…

यरूशलेम का पतन

यह उस अंतिम गर्मी की बात है, जब यरूशलेम की हवा में भी एक तरह की चीख़ समाई हुई थी। सूरज शहर की पथरीली दीवारों पर पड़ता, तो लगता मानो सोना नहीं, खून चमक रहा हो। राजा सिदकिय्याह का शासन,…

आसा: विश्वास और भय की द्वंद्व कथा

यहूदा के राज्य में अबीराम के बाद उसका पुत्र आसा राजा बना। वह यरूशलेम में बैठा, और उसने एक चालीस वर्ष तक राज किया। पर ये वो चालीस वर्ष नहीं थे जिनमें शांति और सुख-सुविधा बरसी हो। नहीं, ये तो…

दाऊद और परमेश्वर की वाचा

अरबों तारे यरूशलेम के ऊपर टिमटिमा रहे थे, जैसे चाँदी के छोटे-छोटे कीलों से भरा कोई विशाल नीला आसमानी कपड़ा टँगा हो। महल के ऊँचे कक्ष में, दाऊद बैठा था, पर उसकी आत्मा बैठी नहीं थी। दिन भर के राजकाज,…

यहोशू की अंतिम चेतावनी

शीलो की पहाड़ियाँ सूरज की तिरछी किरणों में सुनहरी हो रही थीं। दिन ढल रहा था, और हवा में जैतून के पेड़ों की हल्की सी सरसराहट थी। बूढ़ा यहोशू अपने तम्बू के सामने बने पत्थर के एक साधारण बेंच पर…

व्यवस्था के धागे

(एक काल्पनिक कथा, व्यवस्थाविवरण 25 के विषयों पर आधारित) उस साल अवध की धरती सूखी थी, जैसे ईश्वर ने आकाश का मुँह बंद कर दिया हो। हवा में धूल के बवंडर उठते, और दूर-दूर तक जैतून के पेड़ों की पत्तियाँ…