होरेब की गूँजती वाचा
(भूमिका: यह कथा व्यवस्थाविवरण के पांचवें अध्याय पर आधारित है, जिसमें मूसा एक नई पीढ़ी को होरेब पर्वत पर हुई वाचा की घटना सुना रहे हैं। कथा एक वृद्ध इस्त्राएली की ज़ुबानी है, जो उस दिन को याद करता है।)…
फसह की छूट और दिव्य मार्गदर्शन
(लेखक का नोट: यह कहानी गिनती की पुस्तक के अध्याय 9 की घटनाओं पर एक कल्पनात्मक विस्तार है, जो बाइबिल के पाठ और उसके ऐतिहासिक-धार्मिक संदर्भ के प्रति वफादार रहने का प्रयास करती है।) सिनाई का वह विशाल, धूल भरा…
अनजाने पाप का प्रायश्चित
यहोवा की आज्ञा के अनुसार मिलापवाले तम्बू के सामने का आंगन सुबह-सुबह ही जीवंत हो उठता था। हवा में घास और जलती हुई लकड़ी की गंध मिली-जुली रहती, और भोर की ठंडी हवा में धुएं के कुंडल ऐसे उठते मानो…
फसह की रात: लहू का चिन्ह
रामसेस शहर की गलियों में एक अजीब सी सन्नाटा छाया हुआ था। हवा तीखी और ठंडी थी, जैसे खुद प्रकृति ही कुछ अनहोनी का इंतज़ार कर रही हो। एलियासर, जो गोशन इलाके की एक मिट्टी की झोंपड़ी के दरवाजे पर…
राहेल का वंश और याकूब की संतान
उन दिनों हरान के मैदानों से लौटकर याकूब अपने ससुर लाबान के घर में रह रहा था। धूप तेज थी, और हवा में रेत की महीन परत जमी रहती। राहेल का तम्बू लिआ के तम्बू से कुछ ही दूरी पर…
स्वर्गीय सिंहासन का दर्शन
(यह कहानी प्रकाशितवाक्य के चौथे अध्याय से प्रेरित है, और एक मौलिक, विस्तृत कथा के रूप में प्रस्तुत की गई है।) समुद्र के किनारे बैठा वह बूढ़ा यूहन्ना, पत्थरों पर टिका, आँखें बंद किए हुए था। उम्र ने उसके हाथों…
पथरीली धरती से गहरी जड़ों तक
वह सुबह धुंधली थी, जैसे उसके मन का आईना। एलियाब की आँखों में नींद नहीं, एक गहरी थकान थी, वह थकान जो हड्डियों तक में बस जाती है। उसकी झोंपड़ी की खिड़की से बाहर देखते हुए, जैतून के पेड़ों के…
विश्वास की शांति
उस साल जेठ की धूप बड़ी निर्मम थी। आकाश फीका, तपता हुआ एक तामचीनी का बरतन सा लगता। खेतों में धरती की चादरें सिकुड़कर उँगलियाँ फैलाए पड़ी थीं, जैसे प्यास के मारे अंतिम प्रार्थना कर रही हों। किसान अमर सिंह…
प्रेम का सच्चा स्वरूप
अनुज ने अपनी आँखें बंद कीं। सामने के मंच पर भाई यशवंत जोर से बोल रहे थे—उनकी आवाज़ में एक अजीब सी झंकार थी, जैसे पीतल के बर्तनों की टकराहट। वह प्रार्थना की भाषा में बात कर रहे थे, पर…
फेस्तुस के सामने पौलुस की अपील
सीज़रिया के बंदरगाह पर हवा में नमक और दूर आते-जाते जहाज़ों की गंध थी। फेस्तुस नया राज्यपाल बनकर अभी तीन दिन पहले ही आया था, और उसके कानों में यहूदियों के फुसफुसाए गए शिकायतों के शब्द पहले से ही गूंज…



















