यह कहानी प्रकाशितवाक्य के पहले अध्याय पर आधारित है, जो यूहन्ना को दी गई यीशु मसीह की प्रकाशना को दर्शाता है। यह घटना पतमुस द्वीप पर घटित हुई, जहाँ यूहन्ना को परमेश्वर की महिमा और भविष्य की घटनाओं का दर्शन दिखाया गया। यह कहानी विस्तार से और विवरणों के साथ प्रस्तुत की गई है, जो बाइबल के सिद्धांतों के अनुरूप है।
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### पतमुस द्वीप पर यूहन्ना का दर्शन
पतमुस द्वीप पर, जो एजियन सागर में स्थित एक सुनसान और चट्टानी द्वीप था, यूहन्ना नामक एक वृद्ध प्रेरित थे। वह यीशु मसीह के प्रिय शिष्यों में से एक थे और अब वह इस द्वीप पर निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे थे। रोमन साम्राज्य के अत्याचारों के कारण, उन्हें यहाँ बंदी बना लिया गया था। परन्तु यहाँ पर भी, यूहन्ना का हृदय परमेश्वर के प्रति समर्पित था। वह प्रार्थना और ध्यान में लीन रहते थे, और परमेश्वर के वचन को स्मरण करते हुए समय बिताते थे।
एक दिन, जब यूहन्ना प्रभु के दिन, यानी रविवार को, आत्मिक ध्यान में लीन थे, तब अचानक उन्हें एक शक्तिशाली आवाज़ सुनाई दी। यह आवाज़ तुरही की ध्वनि की तरह थी, जो उनके पीछे से आ रही थी। यूहन्ना ने पीछे मुड़कर देखा, और उनकी आँखों के सामने एक अद्भुत दृश्य प्रकट हुआ।
सात सुनहरे दीपक थे, और उन दीपकों के बीच में एक व्यक्ति खड़ा था। वह व्यक्ति मनुष्य के पुत्र के समान था, जिसके वस्त्र लंबे और सफेद थे, और उसकी छाती पर सोने का पटुका बंधा हुआ था। उसके सिर और बाल शुद्ध ऊन की तरह सफेद और बर्फ के समान चमकदार थे। उसकी आँखें आग की लपटों की तरह प्रज्वलित थीं, और उसके पैर किसी उत्तम पीतल की तरह चमक रहे थे, जैसे कि भट्ठी में तपाया गया हो। उसकी आवाज़ बहुत शक्तिशाली थी, जैसे कि बहुत सारे जल के गर्जन की आवाज़।
यूहन्ना ने देखा कि उसके दाहिने हाथ में सात तारे थे, और उसके मुख से एक तेजधार दोधारी तलवार निकल रही थी। उसका चेहरा सूर्य के समान प्रकाशमान था, जब वह अपनी पूरी शक्ति से चमकता है। यह दृश्य इतना भव्य और भयानक था कि यूहन्ना उसके सामने मृतक के समान गिर पड़े।
तब उस व्यक्ति ने यूहन्ना पर अपना दाहिना हाथ रखा और कहा, “मत डर। मैं ही प्रथम और अंतिम हूँ। मैं ही जीवित हूँ; मैं मर गया था, परन्तु देख, मैं युगानुयुग जीवित हूँ। और मेरे पास मृत्यु और अधोलोक की कुंजियाँ हैं। इसलिए, जो कुछ तू ने देखा है, और जो कुछ अब है, और जो कुछ आगे होने वाला है, उसे लिख।”
यूहन्ना ने पहचान लिया कि यह व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि यीशु मसीह ही थे, जो महिमा में प्रकट हुए थे। यीशु ने यूहन्ना को आगे बताया कि सात तारे सात कलीसियाओं के दूत हैं, और सात दीपक सात कलीसियाएँ हैं। यह दर्शन यूहन्ना को दिया गया था, ताकि वह इसे लिखकर सात कलीसियाओं को भेज सके।
यीशु ने यूहन्ना को आश्वासन दिया कि वह सभी कलीसियाओं के साथ है, और वह उनकी परीक्षाओं और संघर्षों को जानता है। उन्होंने यूहन्ना को यह भी बताया कि वह जल्द ही वापस आएंगे, और उनके आगमन की तैयारी में सभी विश्वासियों को सतर्क और विश्वासयोग्य रहना चाहिए।
यूहन्ना ने इस दर्शन को गहराई से महसूस किया और उन्होंने इसे विस्तार से लिखा। उन्होंने यीशु की महिमा और उनके वचनों को सात कलीसियाओं तक पहुँचाया, ताकि वे भी इस सत्य को जान सकें और प्रभु के आगमन के लिए तैयार रह सकें।
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यह कहानी प्रकाशितवाक्य 1 के आधार पर लिखी गई है, जो यीशु मसीह की महिमा और उनके भविष्य के आगमन की ओर संकेत करती है। यह दर्शन यूहन्ना को दिया गया था, ताकि वह परमेश्वर के लोगों को प्रोत्साहित कर सके और उन्हें सचेत कर सके कि प्रभु यीशु सर्वशक्तिमान हैं और वह जल्द ही वापस आएंगे।