1 थिस्सलुनीकियों 4 के आधार पर एक लंबी और विस्तृत कहानी:
एक बार की बात है, थिस्सलुनीकी के एक छोटे से गाँव में, पौलुस नामक एक प्रेरित ने यीशु मसीह के सुसमाचार का प्रचार किया। वहाँ के लोगों ने उसकी बातों को सुना और उनमें से कई लोगों ने यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार किया। पौलुस ने उन्हें परमेश्वर के वचन के माध्यम से सिखाया कि कैसे वे एक पवित्र और परमेश्वर को प्रसन्न करने वाले जीवन जी सकते हैं।
एक दिन, पौलुस ने थिस्सलुनीकी के विश्वासियों को एक पत्र लिखा। उस पत्र में, उसने उन्हें याद दिलाया कि उन्हें कैसे जीवन जीना चाहिए। उसने कहा, “हे भाइयों और बहनों, हम तुमसे प्रभु यीशु के नाम पर विनती करते हैं कि तुम उस शिक्षा के अनुसार चलो जो हमने तुम्हें दी है। तुम्हें परमेश्वर की इच्छा को जानना चाहिए, जो यह है कि तुम पवित्र बनो।”
पौलुस ने उन्हें समझाया कि पवित्रता का अर्थ है कि वे अपने शरीरों को परमेश्वर के लिए समर्पित करें और अशुद्धता और अनैतिकता से दूर रहें। उसने कहा, “तुम्हें यह जानना चाहिए कि परमेश्वर ने हमें अशुद्धता के लिए नहीं, बल्कि पवित्रता के लिए बुलाया है। इसलिए, जो कोई भी इन बातों को अस्वीकार करता है, वह मनुष्य को नहीं, बल्कि परमेश्वर को अस्वीकार करता है, जो तुम्हें अपने पवित्र आत्मा द्वारा सिखाता है।”
पौलुस ने उन्हें यह भी सिखाया कि वे एक-दूसरे से प्रेम करें और शांति से रहें। उसने कहा, “तुम्हें भाईचारे के प्रेम में बढ़ते रहना चाहिए। तुम्हें यह सीखना चाहिए कि कैसे शांति से रहना है और अपने अपने कामों में लगे रहना है। इस तरह, तुम्हारा जीवन बाहर वालों के सामने सम्मानजनक होगा, और तुम्हें किसी की आवश्यकता पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।”
फिर पौलुस ने उन्हें एक महत्वपूर्ण सत्य के बारे में बताया। उसने कहा, “हे भाइयों और बहनों, हम नहीं चाहते कि तुम उन लोगों के बारे में अनजान रहो जो सो गए हैं, ताकि तुम दुखी न हो जैसे और लोग होते हैं जिन्हें आशा नहीं है।” उसने उन्हें समझाया कि यीशु मसीह की मृत्यु और पुनरुत्थान के कारण, जो लोग मसीह में विश्वास करते हैं, वे भी उसी तरह पुनर्जीवित होंगे।
पौलुस ने उन्हें बताया कि जब यीशु वापस आएंगे, तो वह पहले उन लोगों को जगाएंगे जो उनमें विश्वास करते हुए मर गए हैं। उसने कहा, “क्योंकि प्रभु स्वयं आकाश से उतरेगा, और जो मसीह में मर गए हैं, वे पहले जी उठेंगे। फिर हम, जो जीवित हैं और बचे रहेंगे, उनके साथ बादलों में उठा लिए जाएंगे, ताकि हवा में प्रभु से मिलें। और इस तरह हम हमेशा प्रभु के साथ रहेंगे।”
पौलुस ने उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे इस सत्य को एक-दूसरे को सांत्वना देने के लिए उपयोग करें। उसने कहा, “इसलिए, इन वचनों से एक-दूसरे को सांत्वना दो।”
थिस्सलुनीकी के विश्वासियों ने पौलुस के शब्दों को गंभीरता से लिया। उन्होंने अपने जीवन में पवित्रता और प्रेम को बढ़ावा दिया, और वे यीशु मसीह के दूसरे आगमन की प्रतीक्षा करने लगे। उन्होंने एक-दूसरे को प्रोत्साहित किया और परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जीवन जीने का प्रयास किया।
इस तरह, थिस्सलुनीकी के विश्वासियों ने पौलुस की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारा और परमेश्वर की महिमा के लिए जीवन जीने का संकल्प लिया। उन्होंने यीशु मसीह की वापसी की आशा को अपने हृदय में संजोया और एक-दूसरे को प्रेम और सांत्वना देते रहे।