2 इतिहास 13 की कहानी यहूदा के राजा अबिय्याह और इस्राएल के राजा यरोबाम के बीच हुए युद्ध के बारे में है। यह कहानी न केवल एक सैन्य संघर्ष को दर्शाती है, बल्कि यह परमेश्वर की सच्ची आराधना और उसके वचन के प्रति वफादारी के महत्व को भी उजागर करती है।
अबिय्याह यहूदा का राजा बना था, और वह यहोवा की सेवा करने वाला एक ऐसा राजा था जो अपने पूर्वज दाऊद के मार्ग पर चलने का प्रयास करता था। उस समय इस्राएल का राजा यरोबाम था, जो परमेश्वर की आज्ञाओं से भटक गया था और उसने स्वर्ण बछड़ों की पूजा शुरू कर दी थी। यरोबाम ने इस्राएल के लोगों को यहोवा के स्थान पर इन मूर्तियों की आराधना करने के लिए प्रेरित किया था, जिससे परमेश्वर के प्रति उनकी वफादारी कमजोर हो गई थी।
एक दिन, अबिय्याह और यरोबाम के बीच युद्ध छिड़ गया। यरोबाम के पास एक विशाल सेना थी, जिसमें आठ लाख चुने हुए योद्धा थे। वहीं, अबिय्याह के पास केवल चार लाख योद्धा थे। यरोबाम ने सोचा कि वह आसानी से अबिय्याह को हरा देगा, क्योंकि उसकी सेना संख्या में दुगनी थी। लेकिन अबिय्याह ने अपने सैनिकों को प्रोत्साहित किया और उन्हें यहोवा पर भरोसा रखने के लिए कहा।
युद्ध के मैदान में, अबिय्याह ने एक ऊंचे स्थान पर खड़े होकर यरोबाम और इस्राएल की सेना को संबोधित किया। उसने कहा, “सुनो, यरोबाम और सब इस्राएल के लोगो! क्या तुम नहीं जानते कि यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर, ने दाऊद और उसके वंश को इस्राएल पर सदा के लिए राज करने का अधिकार दिया है? यरोबाम, तुमने यहोवा के सामने विद्रोह किया है और स्वर्ण बछड़ों की पूजा करके उसके क्रोध को भड़काया है। तुमने यहोवा के याजकों को निकाल दिया है और अपने लिए ऐसे लोगों को याजक बनाया है जो परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन नहीं करते। लेकिन हम, यहूदा के लोग, यहोवा के सच्चे सेवक हैं। हम उसकी आराधना करते हैं और उसके याजकों को उसके नियमों के अनुसार सेवा करने देते हैं।”
अबिय्याह ने आगे कहा, “हे इस्राएल के लोगो, यहोवा हमारे साथ है। उसके विरुद्ध युद्ध मत करो, क्योंकि तुम सफल नहीं होगे।” लेकिन यरोबाम ने अबिय्याह की बातों को नहीं सुना। उसने अपनी सेना को यहूदा पर हमला करने का आदेश दिया।
जैसे ही युद्ध शुरू हुआ, अबिय्याह और उसकी सेना ने यहोवा से प्रार्थना की। उन्होंने परमेश्वर से सहायता मांगी और उस पर भरोसा रखा। यहोवा ने उनकी प्रार्थना सुनी और यहूदा की सेना को शक्ति दी। यहूदा के सैनिकों ने इस्राएल की सेना को हरा दिया। यरोबाम और उसकी सेना भागने लगे, और यहूदा ने उनका पीछा किया। इस्राएल के पांच लाख से अधिक योद्धा मारे गए। यह एक भयंकर हार थी, और यरोबाम की शक्ति कमजोर हो गई।
यहोवा ने अबिय्याह और यहूदा की जीत दिलाई क्योंकि उन्होंने उस पर भरोसा किया और उसकी आराधना की। इसके विपरीत, यरोबाम और इस्राएल की हार इसलिए हुई क्योंकि उन्होंने परमेश्वर की आज्ञाओं को तोड़ा और मूर्तियों की पूजा की।
इस युद्ध के बाद, अबिय्याह ने यहोवा की महिमा की और उसकी आराधना की। उसने यहूदा में यहोवा की सेवा को मजबूत किया और लोगों को परमेश्वर के मार्ग पर चलने के लिए प्रोत्साहित किया। यह कहानी हमें सिखाती है कि परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना और उस पर भरोसा रखना कितना महत्वपूर्ण है। जो लोग परमेश्वर के साथ रहते हैं, वे उसकी सुरक्षा और आशीष का अनुभव करते हैं।