पवित्र बाइबल

एज्रा का पश्चाताप और परमेश्वर की दया

एज्रा 9 की कहानी हमें एक ऐसे समय की ओर ले जाती है जब परमेश्वर के लोग, इस्राएली, बाबुल की गुलामी से मुक्त होकर यरूशलेम वापस लौटे थे। यह एक ऐसा समय था जब उन्हें अपने पूर्वजों की गलतियों से सबक लेते हुए, परमेश्वर के साथ अपने रिश्ते को मजबूत करने का मौका मिला था। लेकिन इसके बावजूद, उनमें से कई लोग फिर से पाप की ओर मुड़ने लगे थे। यह कहानी एज्रा, एक धर्मनिष्ठ और परमेश्वर के वचन के प्रति समर्पित व्यक्ति, के दिल को तोड़ने वाले अनुभव को दर्शाती है।

एज्रा यरूशलेम में परमेश्वर के मंदिर के पुनर्निर्माण और लोगों को परमेश्वर की व्यवस्था सिखाने के लिए वापस आया था। वह एक ऐसा व्यक्ति था जो परमेश्वर के वचन को गहराई से जानता था और उसके प्रति पूरी तरह से समर्पित था। एक दिन, जब वह यरूशलेम में था, कुछ प्रमुख लोग उसके पास आए और उसे एक चौंकाने वाली खबर सुनाई। उन्होंने कहा, “एज्रा, हमारे बीच में कई लोग, यहाँ तक कि याजक और लेवीय भी, परमेश्वर की आज्ञाओं को तोड़ रहे हैं। वे आसपास के देशों की महिलाओं से विवाह कर रहे हैं, जो परमेश्वर के प्रति विश्वास नहीं रखतीं। यह हमारे लिए एक बड़ा पाप है।”

यह सुनकर एज्रा का दिल टूट गया। वह जानता था कि परमेश्वर ने स्पष्ट रूप से आदेश दिया था कि इस्राएली अपने आसपास के देशों के लोगों से विवाह न करें, क्योंकि इससे वे उनके देवताओं की पूजा करने लगेंगे और परमेश्वर से दूर हो जाएंगे। एज्रा ने महसूस किया कि यह सिर्फ एक सामाजिक मुद्दा नहीं था, बल्कि यह परमेश्वर के साथ उनके वाचा के रिश्ते को तोड़ने वाला एक गंभीर पाप था।

एज्रा ने अपने वस्त्र फाड़े, अपने सिर पर राख डाली, और परमेश्वर के सामने गहरी प्रार्थना में झुक गया। वह इतना दुखी था कि शाम तक वह जमीन पर पड़ा रहा। उसने अपने हाथ फैलाए और परमेश्वर से प्रार्थना करने लगा। उसकी प्रार्थना में पश्चाताप, दुख, और परमेश्वर की दया की याचना थी।

एज्रा ने कहा, “हे परमेश्वर, मैं तेरे सामने शर्मिंदा हूँ। हमारे पाप इतने बड़े हैं कि हम तेरे सामने सिर उठाने के लायक भी नहीं हैं। हमारे पूर्वजों ने तेरी आज्ञाओं को तोड़ा, और अब हम भी उनके जैसे ही हो गए हैं। तूने हमें दया दिखाई और हमें बाबुल की गुलामी से छुड़ाया, लेकिन हम फिर से तेरे विरुद्ध पाप कर रहे हैं। हे परमेश्वर, हम तेरी दया के योग्य नहीं हैं, लेकिन तू दयालु और क्षमाशील है। कृपया हमें क्षमा कर और हमें फिर से तेरे साथ चलने की शक्ति दें।”

एज्रा की प्रार्थना इतनी गहरी और ईमानदार थी कि उसके आसपास इकट्ठे हुए लोग भी रोने लगे। उन्होंने महसूस किया कि उन्होंने परमेश्वर के साथ विश्वासघात किया है और उन्हें पश्चाताप करने की आवश्यकता है। एज्रा ने लोगों से कहा कि वे अपने पापों को स्वीकार करें और परमेश्वर की ओर लौटें। उसने उन्हें याद दिलाया कि परमेश्वर उन्हें तभी आशीष देगा जब वे उसकी आज्ञाओं का पालन करेंगे।

इस घटना के बाद, लोगों ने अपने पापों को स्वीकार किया और परमेश्वर की ओर लौटने का निर्णय लिया। उन्होंने वादा किया कि वे अपने गैर-यहूदी पत्नियों और बच्चों को छोड़ देंगे और केवल परमेश्वर की सेवा करेंगे। यह एक कठिन निर्णय था, लेकिन उन्होंने महसूस किया कि परमेश्वर के साथ उनका रिश्ता इससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

एज्रा की नेतृत्व में, लोगों ने एक साथ इकट्ठे होकर परमेश्वर से क्षमा मांगी और उसकी आज्ञाओं का पालन करने का वादा किया। यह एक नई शुरुआत थी, जहाँ परमेश्वर के लोग फिर से उसके साथ चलने का निर्णय ले रहे थे।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि पश्चाताप और परमेश्वर की ओर लौटना हमेशा संभव है। चाहे हम कितने भी गहरे पाप में क्यों न फंसे हों, परमेश्वर हमेशा हमें क्षमा करने और हमें फिर से अपने साथ चलने का मौका देने के लिए तैयार है। एज्रा की तरह, हमें भी अपने पापों को स्वीकार करना चाहिए और परमेश्वर की दया और क्षमा की याचना करनी चाहिए।

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