पवित्र बाइबल

यिर्मयाह और मिट्टी के घड़े की चेतावनी

यिर्मयाह 19 की कहानी हमें एक गहरी और प्रभावशाली घटना के बारे में बताती है, जो परमेश्वर के न्याय और उसकी चेतावनी को दर्शाती है। यह कहानी यहूदा और यरूशलेम के लोगों के पापों और उनके परिणामों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करती है। आइए, हम इस घटना को विस्तार से जानें।

यिर्मयाह, परमेश्वर के एक नबी थे, जिन्हें यहूदा के लोगों को उनके पापों के लिए चेतावनी देने का कार्य सौंपा गया था। एक दिन, परमेश्वर ने यिर्मयाह से कहा, “यिर्मयाह, तू जा और एक कुम्हार की दुकान से मिट्टी का एक घड़ा खरीद ले। फिर, यहूदा के प्राचीन लोगों और याजकों में से कुछ को इकट्ठा करके, उन्हें बेन-हिन्नोम की घाटी के द्वार पर ले चल।”

यिर्मयाह ने परमेश्वर की आज्ञा का पालन किया। उन्होंने एक मिट्टी का घड़ा खरीदा और यहूदा के प्राचीन लोगों और याजकों को इकट्ठा किया। वे सब बेन-हिन्नोम की घाटी की ओर चल पड़े। यह घाटी यरूशलेम के दक्षिण में स्थित थी और यह एक ऐसी जगह थी जहाँ लोग बाल देवता को बलिदान चढ़ाते थे, यहाँ तक कि अपने बच्चों को भी आग में जलाकर बलिदान करते थे। यह स्थान पाप और मूर्तिपूजा से भरा हुआ था।

जब वे घाटी के द्वार पर पहुँचे, तो यिर्मयाह ने परमेश्वर का वचन सुनाया। उन्होंने कहा, “हे यहूदा के राजाओं और यरूशलेम के निवासियों, परमेश्वर की वाणी सुनो! परमेश्वर सर्वशक्तिमान, इस्राएल का परमेश्वर, यह कहता है: ‘देखो, मैं इस स्थान पर ऐसी विपत्ति लाऊँगा कि जो कोई भी इसके बारे में सुनेगा, उसके कान बज उठेंगे। यह इसलिए है क्योंकि तुम लोगों ने मुझे त्याग दिया है और इस स्थान को अशुद्ध कर दिया है। तुमने अन्य देवताओं को धूप जलाया है, जिन्हें न तो तुमने जाना है, न तुम्हारे पूर्वजों ने जाना है। तुमने निर्दोष लोगों का खून बहाया है और इस स्थान को हत्या और पाप से भर दिया है।'”

यिर्मयाह ने आगे कहा, “इसलिए, परमेश्वर यह कहता है: ‘देखो, इस स्थान का नाम अब बेन-हिन्नोम की घाटी नहीं, बल्कि हत्या की घाटी होगा। मैं यहूदा और यरूशलेम की समृद्धि को नष्ट कर दूँगा। तुम्हारे शत्रु तुम्हें घेर लेंगे और तुम्हें भूख और तलवार से मार डालेंगे। तुम्हारी लाशें आकाश के पक्षियों और पृथ्वी के जानवरों के लिए भोजन बन जाएँगी, और कोई भी उन्हें दफनाने नहीं आएगा।'”

यिर्मयाह ने यह सब कहकर, उस मिट्टी के घड़े को ज़ोर से ज़मीन पर पटक दिया, जिससे वह टुकड़े-टुकड़े हो गया। फिर उन्होंने लोगों से कहा, “परमेश्वर सर्वशक्तिमान यह कहता है: ‘जैसे इस घड़े को तोड़ा गया है और फिर से जोड़ा नहीं जा सकता, वैसे ही मैं इस लोगों और इस नगर को तोड़ डालूँगा। यहाँ तक कि तोपेत में, जहाँ लोग बाल को धूप जलाते हैं, वहाँ लोगों को दफनाने के लिए जगह नहीं होगी। यह स्थान हत्या की घाटी बन जाएगा।'”

यिर्मयाह की यह भविष्यवाणी सुनकर, वहाँ उपस्थित लोगों के मन में भय और आश्चर्य भर गया। उन्हें एहसास हुआ कि उनके पापों ने परमेश्वर के क्रोध को भड़काया है और उनके लिए न्याय का दिन निकट है।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि परमेश्वर पाप को सहन नहीं करता। वह हमें चेतावनी देता है और हमें अपने पापों से मुड़ने का अवसर देता है। यदि हम उसकी चेतावनी को नज़रअंदाज़ करते हैं, तो हमें उसके न्याय का सामना करना पड़ सकता है। परमेश्वर की आज्ञा का पालन करना और उसके मार्ग पर चलना ही हमारे लिए सुरक्षा और आशीष का मार्ग है।

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