पवित्र बाइबल

दाऊद की चतुराई और परमेश्वर पर विश्वास

1 शमूएल 27 की कहानी हमें दाऊद के जीवन के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के बारे में बताती है। यह वह समय था जब दाऊद, शाऊल के अत्याचारों से तंग आकर, इस्राएल छोड़कर पलिश्तियों के देश में जाकर रहने का निर्णय लेता है। यह निर्णय उसकी मजबूरी और विश्वास के बीच एक संघर्ष को दर्शाता है। आइए, इस कहानी को विस्तार से जानें।

### दाऊद का पलिश्तियों के देश में शरण लेना

दाऊद अपने हृदय में विचार करने लगा, “एक दिन शाऊल के हाथों मारा जाऊंगा। मेरे लिए पलिश्तियों के देश में शरण लेना ही बेहतर है। तब शाऊल मुझे ढूंढ़ते-ढूंढ़ते थक जाएगा और मैं उसके हाथ से बच जाऊंगा।” यह सोचकर दाऊद ने अपने छह सौ सैनिकों के साथ पलिश्तियों के राजा अकीश के पास जाने का निर्णय लिया। अकीश गत नगर का राजा था, और दाऊद उसके सामने आकर खड़ा हुआ।

दाऊद ने अपने परिवार और सैनिकों के साथ अकीश के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उसने कहा, “यदि मैं तेरी दृष्टि में अनुग्रह पा गया हूं, तो कृपया मुझे अपने राज्य के किसी छोटे से नगर में रहने का स्थान दो। मैं तेरे राजा के साथ क्यों रहूं?” अकीश ने दाऊद की बात सुनी और उसे सिकलग नगर दे दिया। इस तरह, दाऊद और उसके लोग पलिश्तियों के देश में बस गए।

### दाऊद की छापेमारी और चतुराई

दाऊद सिकलग में रहने लगा, लेकिन उसका हृदय इस्राएल के लिए धड़कता रहा। वह जानता था कि पलिश्तियों के साथ रहना उसकी मजबूरी है, परन्तु वह इस्राएल के लोगों के विरुद्ध नहीं लड़ सकता था। इसलिए, उसने एक योजना बनाई। दाऊद और उसके सैनिक पलिश्तियों के आसपास के क्षेत्रों में छापेमारी करने लगे। वे गशूरियों, गिर्गाशियों, और अमालेकियों के खिलाफ छापे मारते और उनके मवेशी, वस्त्र, और अन्य संपत्ति लूट लेते।

जब दाऊद किसी क्षेत्र पर हमला करता, तो वह सभी पुरुषों, स्त्रियों, और बच्चों को मार डालता ताकि कोई जीवित न बचे और उसकी गतिविधियों के बारे में पलिश्तियों को पता न चले। दाऊद की यह चतुराई उसे पलिश्तियों के बीच विश्वसनीय बनाए रखती थी। अकीश को लगता था कि दाऊद इस्राएल के विरुद्ध काम कर रहा है, जबकि वास्तव में दाऊद इस्राएल के शत्रुओं को नष्ट कर रहा था।

### अकीश का दाऊद पर विश्वास

एक दिन अकीश ने दाऊद से कहा, “तुम और तुम्हारे लोग मेरे साथ युद्ध में चलोगे। मैं तुम्हें हमेशा के लिए अपने संरक्षण में रखूंगा।” दाऊद ने चालाकी से उत्तर दिया, “तू जानता है कि तेरा दास क्या कर सकता है।” अकीश ने दाऊद की बात पर विश्वास किया और उसे अपने साथ रखने का निर्णय लिया। उसने सोचा कि दाऊद अब उसका वफादार सेवक बन गया है।

परन्तु दाऊद के हृदय में इस्राएल के लिए प्रेम और परमेश्वर के प्रति आस्था बनी रही। वह जानता था कि परमेश्वर ने उसे इस्राएल का राजा बनाने का वादा किया है, और वह उस वादे पर विश्वास करता था। दाऊद की यह चतुराई और धैर्य उसे परमेश्वर की योजना के अनुसार आगे बढ़ने में मदद कर रही थी।

### कहानी का सार

1 शमूएल 27 की यह कहानी हमें दाऊद की चतुराई, धैर्य, और परमेश्वर पर उसके विश्वास के बारे में सिखाती है। दाऊद ने अपनी परिस्थितियों को समझा और उनके अनुसार कदम उठाया। उसने पलिश्तियों के बीच रहकर भी इस्राएल के लिए काम किया और परमेश्वर की योजना को पूरा करने के लिए तैयार रहा। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि परमेश्वर हर परिस्थिति में हमारे साथ रहता है और हमें उसकी योजना के अनुसार चलने की शक्ति देता है।

दाऊद की तरह, हमें भी अपने जीवन में परमेश्वर पर विश्वास रखना चाहिए और उसकी इच्छा के अनुसार कदम उठाना चाहिए। चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, परमेश्वर हमारा मार्गदर्शन करेगा और हमें सुरक्षित रखेगा।

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