पवित्र बाइबल

बिन्यामीन गोत्र का उद्धार और इस्राएल की शपथ

न्यायियों 21 की कहानी इस्राएल के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना को दर्शाती है। यह घटना उस समय की है जब इस्राएल के लोगों ने अपने भाइयों, बिन्यामीन के गोत्र के साथ एक भयंकर युद्ध लड़ा था। यह युद्ध इतना भीषण था कि बिन्यामीन का पूरा गोत्र लगभग नष्ट हो गया था। इस्राएल के लोगों ने यहोवा के सामने शपथ ली थी कि वे अपनी बेटियों को बिन्यामीन के लोगों को ब्याहने नहीं देंगे। लेकिन जब युद्ध समाप्त हुआ, तो उन्हें एहसास हुआ कि उन्होंने एक गोत्र को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है, और यह उनके लिए एक बड़ी समस्या बन गई।

इस्राएल के लोग मिस्पा में इकट्ठे हुए थे, और वे यहोवा के सामने रोने लगे। उन्होंने कहा, “हे यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर, ऐसा क्यों हुआ कि इस्राएल में आज एक गोत्र का अभाव हो गया?” उन्होंने सोचा कि कैसे वे बिन्यामीन के गोत्र को बचा सकते हैं, क्योंकि उन्होंने यहोवा के सामने शपथ ली थी कि वे अपनी बेटियों को बिन्यामीन के लोगों को नहीं देंगे।

तब उन्होंने यहोवा से पूछा, “क्या कोई ऐसा है जो इस सभा में नहीं आया?” और उन्हें पता चला कि याबेश गिलाद के लोग सभा में उपस्थित नहीं हुए थे। इस्राएल के लोगों ने यहोवा के सामने शपथ ली थी कि जो कोई मिस्पा में उपस्थित नहीं होगा, उसे मार डाला जाएगा। इसलिए, उन्होंने याबेश गिलाद के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया और उस शहर के सभी पुरुषों और विवाहित स्त्रियों को मार डाला। केवल कुछ कुंवारी कन्याओं को छोड़ दिया गया।

इसके बाद, इस्राएल के लोगों ने बिन्यामीन के गोत्र के लोगों को बुलाया और उन्हें याबेश गिलाद की कुंवारी कन्याओं को ब्याहने के लिए दिया। लेकिन फिर भी, बिन्यामीन के लोगों के लिए पर्याप्त स्त्रियाँ नहीं थीं। इसलिए, इस्राएल के लोगों ने एक और योजना बनाई।

उन्होंने बिन्यामीन के लोगों को शीलो में जाने के लिए कहा, जहाँ हर साल यहोवा के लिए एक उत्सव मनाया जाता था। उन्होंने बिन्यामीन के लोगों को निर्देश दिया कि वे शीलो की बेटियों को उठा लें, जो नाचने के लिए बाहर आती थीं। बिन्यामीन के लोगों ने ऐसा ही किया और शीलो की कन्याओं को उठा लिया, और उनसे विवाह कर लिया।

इस तरह, बिन्यामीन का गोत्र बच गया, और इस्राएल के लोगों ने अपनी शपथ को नहीं तोड़ा। लेकिन यह घटना इस्राएल के इतिहास में एक दुखद अध्याय के रूप में याद की जाती है, क्योंकि यह उनके बीच एकता और शांति की कमी को दर्शाती है।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने निर्णयों को सोच-समझकर लेना चाहिए, और यह कि हमें हमेशा यहोवा की इच्छा को समझने की कोशिश करनी चाहिए। इस्राएल के लोगों ने अपने भाइयों के साथ युद्ध किया और एक गोत्र को लगभग नष्ट कर दिया, लेकिन अंत में उन्होंने यहोवा की मदद से एक समाधान ढूंढा। यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि यहोवा हमेशा हमारी गलतियों को सुधारने का रास्ता दिखाता है, अगर हम उसकी ओर मुड़ते हैं।

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