**लैव्यवस्था 25: विश्राम और मुक्ति का वर्ष**
प्राचीन काल में, जब इस्राएली मिस्र की दासता से मुक्त होकर वादा किए गए देश कनान की ओर बढ़ रहे थे, तब परमेश्वर ने मूसा को सीनै पर्वत पर बुलाया। वहाँ परमेश्वर ने मूसा को अनेक आज्ञाएँ और व्यवस्थाएँ दीं, जिनमें से एक थी “विश्राम का वर्ष” और “मुक्ति का वर्ष” (यूबिली)। ये आज्ञाएँ इस्राएल के लोगों के लिए न केवल एक नियम थीं, बल्कि परमेश्वर की दया और न्याय की झलक भी थीं।
### विश्राम का वर्ष
परमेश्वर ने मूसा से कहा, “जब तुम वादा किए गए देश में प्रवेश करोगे और वहाँ बस जाओगे, तो मेरी आज्ञा मानना। छः वर्ष तक तुम अपने खेतों में बोना, अपने बागों में काटना, और अपनी भूमि से फल इकट्ठा करना। परन्तु सातवें वर्ष में, भूमि को विश्राम देना। यह परमेश्वर के लिए विश्राम का वर्ष होगा।”
मूसा ने इस्राएल के लोगों को यह आज्ञा सुनाई। उसने कहा, “सातवें वर्ष में न तो बोना, न काटना, और न ही अपने खेतों में काम करना। भूमि को स्वतंत्र छोड़ देना, ताकि वह आराम कर सके। जो कुछ भूमि से स्वयं उग आए, उसे तुम खा सकते हो, और तुम्हारे दास, दासियाँ, मजदूर, और यहाँ तक कि तुम्हारे पशु भी उसे खा सकते हैं। परमेश्वर ने वादा किया है कि छठे वर्ष में वह इतनी फसल देगा कि तीन वर्ष तक तुम्हारे लिए पर्याप्त होगी।”
लोगों ने मूसा की बात सुनी और आश्चर्यचकित हुए। वे सोचने लगे, “यदि हम सातवें वर्ष में बोएंगे नहीं, तो हमारा भोजन कहाँ से आएगा?” परन्तु मूसा ने उन्हें समझाया, “परमेश्वर तुम्हारा पालनहार है। वह तुम्हारी आवश्यकताओं को जानता है। यदि तुम उसकी आज्ञा मानोगे, तो वह तुम्हें कभी भूखा नहीं छोड़ेगा।”
### मुक्ति का वर्ष (यूबिली)
परमेश्वर ने मूसा को एक और आश्चर्यजनक आज्ञा दी। उसने कहा, “सात विश्राम के वर्षों के बाद, यानी 49 वर्षों के बाद, 50वें वर्ष को मुक्ति का वर्ष घोषित करना। यह वर्ष पवित्र होगा। इस वर्ष में तुम सभी दासों को स्वतंत्र कर देना, और सभी भूमि को उसके मूल मालिक को लौटा देना।”
मूसा ने इस्राएल के लोगों को यह आज्ञा सुनाई। उसने कहा, “यदि तुम में से कोई गरीबी के कारण अपनी भूमि बेच दे, तो उसके परिवार को यह अधिकार होगा कि वह उसे वापस खरीद सके। और यदि वह इसे खरीदने में असमर्थ हो, तो मुक्ति के वर्ष में वह भूमि उसके मूल मालिक को लौटा दी जाएगी। इसी प्रकार, यदि कोई व्यक्ति अपने आप को दास के रूप में बेच दे, तो उसके परिवार के लोग उसे छुड़ा सकते हैं। और यदि कोई उसे छुड़ाने में असमर्थ हो, तो मुक्ति के वर्ष में वह स्वतंत्र हो जाएगा।”
लोगों ने यह सुना और उनके मन में आशा की एक नई लहर दौड़ गई। वे समझ गए कि परमेश्वर की व्यवस्था न केवल न्याय पर आधारित है, बल्कि दया और करुणा से भरी हुई है। उन्होंने महसूस किया कि परमेश्वर चाहता है कि उसके लोग एक-दूसरे के साथ प्रेम और न्याय का व्यवहार करें।
### परमेश्वर का वादा
परमेश्वर ने मूसा से कहा, “यदि तुम मेरी आज्ञाओं का पालन करोगे, तो मैं तुम्हारी भूमि को आशीर्वाद दूंगा। छठे वर्ष में इतनी फसल होगी कि तुम्हें तीन वर्ष तक खाने के लिए पर्याप्त होगी। और जब तुम मुक्ति के वर्ष में भूमि को विश्राम दोगे, तो मैं तुम्हारी सुरक्षा करूंगा। तुम्हारे शत्रु तुम्हारे सामने ठहर नहीं पाएंगे, और तुम सुरक्षित रहोगे।”
मूसा ने लोगों को यह वादा सुनाया। उसने कहा, “परमेश्वर हमारा पालनहार है। वह हमारी आवश्यकताओं को जानता है। यदि हम उसकी आज्ञाओं का पालन करेंगे, तो वह हमें कभी नहीं छोड़ेगा।”
### लोगों की प्रतिक्रिया
इस्राएल के लोगों ने मूसा की बातें सुनीं और उनके हृदय में परमेश्वर के प्रति आदर और भक्ति उत्पन्न हुई। वे समझ गए कि परमेश्वर की व्यवस्था न केवल उनके लिए एक नियम है, बल्कि उनके जीवन में उसकी उपस्थिति और प्रेम का प्रमाण भी है। उन्होंने प्रण किया कि वे परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करेंगे और उसके मार्ग पर चलेंगे।
इस प्रकार, लैव्यवस्था 25 की आज्ञाएँ इस्राएल के लोगों के लिए एक मार्गदर्शक बनीं। ये आज्ञाएँ न केवल उनके सामाजिक और आर्थिक जीवन को व्यवस्थित करती थीं, बल्कि उन्हें परमेश्वर की दया और न्याय की याद दिलाती थीं। विश्राम का वर्ष और मुक्ति का वर्ष उनके लिए परमेश्वर की महानता और उसके प्रेम का प्रतीक बन गए।
और इस प्रकार, परमेश्वर की व्यवस्था इस्राएल के लोगों के हृदय में गहराई तक बस गई, और वे उसके मार्ग पर चलते रहे।