पवित्र बाइबल

यीशु और नीकुदेमुस: नया जन्म और परमेश्वर का प्रेम

यूहन्ना 3 की कहानी हिंदी बाइबल में एक गहरी और प्रेरणादायक घटना है, जो यीशु मसीह और नीकुदेमुस नामक एक फरीसी के बीच हुई बातचीत पर आधारित है। यह कहानी न केवल आध्यात्मिक सत्य को उजागर करती है, बल्कि यह हमें परमेश्वर के प्रेम और उद्धार की योजना के बारे में भी सिखाती है। आइए, इस कहानी को विस्तार से जानें।

### नीकुदेमुस का यीशु से मिलना

यरूशलेम में एक फरीसी था, जिसका नाम नीकुदेमुस था। वह यहूदियों के धार्मिक नेताओं में से एक था और परमेश्वर के वचन का गहरा ज्ञान रखता था। नीकुदेमुस ने यीशु के चमत्कारों और उनकी शिक्षाओं के बारे में सुना था। उसके मन में यीशु के प्रति जिज्ञासा और आदर का भाव था, लेकिन वह दिन के उजाले में उनसे मिलने से डरता था, क्योंकि उसे अपने साथी फरीसियों और धार्मिक नेताओं की प्रतिक्रिया का भय था। इसलिए, वह रात के अंधेरे में यीशु के पास आया।

नीकुदेमुस ने यीशु से कहा, “हे रब्बी, हम जानते हैं कि तू परमेश्वर की ओर से गुरु बनकर आया है, क्योंकि कोई भी इन चमत्कारों को नहीं कर सकता जो तू करता है, यदि परमेश्वर उसके साथ न हो।”

यीशु ने उसकी बात सुनी और उसे एक गहरी सच्चाई बताई, “मैं तुझसे सच कहता हूं, यदि कोई नया जन्म न ले, तो वह परमेश्वर के राज्य को नहीं देख सकता।”

### नया जन्म का रहस्य

नीकुदेमुस यीशु की बात सुनकर चकित रह गया। उसने पूछा, “कोई बूढ़ा होकर कैसे जन्म ले सकता है? क्या वह अपनी मां के गर्भ में दूसरी बार प्रवेश कर सकता है और जन्म ले सकता है?”

यीशु ने उत्तर दिया, “मैं तुझसे सच कहता हूं, यदि कोई जल और आत्मा से न जन्मे, तो वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता। जो शरीर से जन्मा है, वह शरीर है; और जो आत्मा से जन्मा है, वह आत्मा है। तुझे आश्चर्य न हो कि मैंने तुझसे कहा, ‘तुम्हें नया जन्म लेना होगा।’ हवा जहां चाहती है, चलती है; तू उसका शब्द सुनता है, परंतु नहीं जानता कि वह कहां से आती है और कहां जाती है। जो कोई आत्मा से जन्मा है, वह ऐसा ही है।”

नीकुदेमुस अभी भी समझ नहीं पा रहा था। उसने पूछा, “यह कैसे हो सकता है?”

यीशु ने उसे समझाया, “तू इस्राएल का गुरु होकर भी यह बात नहीं जानता? मैं तुझसे सच कहता हूं, हम जो जानते हैं, वही कहते हैं; और जो देखा है, उसी की गवाही देते हैं, परंतु तुम हमारी गवाही ग्रहण नहीं करते। यदि मैंने तुम से पृथ्वी की बातें कहीं और तुम न प्रतीति की, तो यदि मैं तुम से स्वर्ग की बातें कहूं, तो तुम क्यों प्रतीति करोगे? कोई स्वर्ग पर नहीं चढ़ा, केवल वही जो स्वर्ग से उतरा, अर्थात मनुष्य का पुत्र।”

### परमेश्वर का प्रेम और उद्धार

यीशु ने नीकुदेमुस को परमेश्वर के प्रेम और उद्धार की योजना के बारे में बताया। उन्होंने कहा, “जैसे मूसा ने जंगल में सांप को ऊंचे पर चढ़ाया था, वैसे ही मनुष्य के पुत्र को भी ऊंचे पर चढ़ाया जाना चाहिए, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह अनंत जीवन पाए। क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परंतु अनंत जीवन पाए। क्योंकि परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिए नहीं भेजा कि जगत को दोषी ठहराए, परंतु इसलिए कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए। जो उस पर विश्वास करता है, वह दोषी नहीं ठहराया जाता; परंतु जो विश्वास नहीं करता, वह पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है, क्योंकि उसने परमेश्वर के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्वास नहीं किया।”

यीशु ने आगे कहा, “दोषी ठहराने का कारण यह है कि ज्योति जगत में आई है, और मनुष्यों ने अंधकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना, क्योंकि उनके काम बुरे थे। क्योंकि जो कोई बुराई करता है, वह ज्योति से बैर रखता है, और ज्योति के पास नहीं आता, कहीं ऐसा न हो कि उसके कामों पर दोष लगाया जाए। परंतु जो सत्य पर चलता है, वह ज्योति के पास आता है, ताकि उसके काम प्रकाश में आएं, क्योंकि वे परमेश्वर में किए गए हैं।”

### नीकुदेमुस का हृदय परिवर्तन

यीशु की इन बातों ने नीकुदेमुस के हृदय को छू लिया। वह समझ गया कि उद्धार केवल धार्मिक कर्मों और परंपराओं से नहीं, बल्कि यीशु मसीह पर विश्वास करने से मिलता है। नीकुदेमुस ने यीशु की शिक्षाओं को गंभीरता से लिया और उनके प्रति अपना विश्वास प्रकट किया। हालांकि, वह अभी भी अपने साथी फरीसियों के सामने खुलकर यीशु का अनुसरण करने से डरता था, लेकिन उसके हृदय में यीशु के प्रति आदर और विश्वास बढ़ता गया।

### सबक और शिक्षा

यूहन्ना 3 की यह कहानी हमें कई महत्वपूर्ण सबक सिखाती है। पहला, यह हमें यह सिखाती है कि उद्धार केवल धार्मिक कर्मों से नहीं, बल्कि यीशु मसीह पर विश्वास करने से मिलता है। दूसरा, यह हमें परमेश्वर के प्रेम की गहराई दिखाती है, जिसने हमें बचाने के लिए अपने एकलौते पुत्र को भेजा। तीसरा, यह हमें यह सिखाती है कि हमें आत्मिक रूप से नया जन्म लेना चाहिए, ताकि हम परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर सकें।

यीशु और नीकुदेमुस की यह बातचीत हमें यह भी याद दिलाती है कि हमें अपने विश्वास को छिपाने की बजाय, उसे साहस के साथ प्रकट करना चाहिए। नीकुदेमुस ने शुरू में यीशु से रात के अंधेरे में मिला, लेकिन बाद में वह यीशु का अनुयायी बन गया और उनके सत्य को स्वीकार किया।

इस कहानी का संदेश स्पष्ट है: यीशु मसीह पर विश्वास करो और नया जन्म लो, ताकि तुम अनंत जीवन पा सको। परमेश्वर का प्रेम हमारे लिए इतना बड़ा है कि उसने हमें बचाने के लिए अपने पुत्र को भेजा। हमें इस प्रेम को ग्रहण करना चाहिए और उसकी ज्योति में चलना चाहिए।

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