भजन संहिता 21 एक ऐसा भजन है जो राजा दाऊद के विजय और उसकी सफलता के लिए परमेश्वर की स्तुति करता है। यह भजन राजा की प्रार्थना, उसकी आशाओं, और परमेश्वर के प्रति उसकी कृतज्ञता को दर्शाता है। आइए, हम इस भजन को एक कहानी के रूप में बुनते हैं, जो राजा दाऊद के जीवन और उसके परमेश्वर के साथ संबंध को गहराई से दर्शाती है।
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एक समय की बात है, जब राजा दाऊद यरूशलेम के सिंहासन पर विराजमान था। उसका हृदय परमेश्वर के प्रति पूर्णतः समर्पित था। वह जानता था कि उसकी सभी विजयें और सफलताएं परमेश्वर की कृपा के बिना असंभव हैं। एक दिन, जब वह अपने महल के ऊँचे बुर्ज पर खड़ा था, तो उसने अपने चारों ओर फैले राज्य को देखा। उसकी आँखों में चमक थी, क्योंकि वह जानता था कि यह सब परमेश्वर की देन है।
राजा दाऊद ने अपने हृदय में परमेश्वर की स्तुति करने का निश्चय किया। वह अपने महल के प्रार्थना कक्ष में गया और वहाँ घुटने टेककर प्रार्थना करने लगा। उसने कहा, “हे प्रभु, तू मेरी शक्ति है। तेरे बल के कारण ही मैं शत्रुओं पर विजय पा सका हूँ। तेरी कृपा ने मुझे सिंहासन पर बैठाया है। तूने मेरी प्रार्थनाओं को सुना और मेरी इच्छाओं को पूरा किया।”
दाऊद ने अपने मन में उन सभी लड़ाइयों को याद किया, जिनमें परमेश्वर ने उसकी सहायता की थी। वह उस दिन को याद करता था, जब वह एक छोटा चरवाहा था और परमेश्वर ने उसे शाऊल के सामने खड़ा किया था। वह उस दिन को याद करता था, जब उसने गोलियत को हराया था। वह उन सभी संघर्षों को याद करता था, जब शाऊल उसका पीछा कर रहा था, और परमेश्वर ने उसे बचाया था। हर कदम पर, परमेश्वर उसके साथ था।
दाऊद ने अपनी प्रार्थना जारी रखी, “हे प्रभु, तूने मुझे आशीर्वाद दिया है। तूने मुझे सोने का मुकुट पहनाया है। तेरी दया ने मुझे जीवन दिया है। मैं तेरे सामने झुकता हूँ और तेरी महिमा का गुणगान करता हूँ।”
राजा दाऊद ने महसूस किया कि परमेश्वर की कृपा उसके जीवन में हर पल बह रही है। उसने अपने हृदय में एक गहरी शांति महसूस की। वह जानता था कि परमेश्वर उसके साथ है और उसे कभी नहीं छोड़ेगा। उसने अपने मन में विश्वास किया कि परमेश्वर उसके शत्रुओं को उसके सामने झुकाएगा और उसे विजय दिलाएगा।
दाऊद ने अपनी प्रार्थना में कहा, “हे प्रभु, तूने मेरे शत्रुओं को मेरे सामने परास्त किया है। तूने उन्हें मेरे सामने झुकाया है। तेरी दाहिनी ओर की शक्ति ने मुझे विजय दिलाई है। मैं तेरे नाम का गुणगान करता हूँ और तेरी महिमा का वर्णन करता हूँ।”
राजा दाऊद ने अपने हृदय में परमेश्वर के प्रति एक गहरी कृतज्ञता महसूस की। वह जानता था कि उसकी सभी सफलताएं और विजयें परमेश्वर की देन हैं। उसने अपने मन में निश्चय किया कि वह हमेशा परमेश्वर की आराधना करेगा और उसकी आज्ञाओं का पालन करेगा।
दाऊद ने अपनी प्रार्थना समाप्त करते हुए कहा, “हे प्रभु, तू सर्वशक्तिमान है। तेरी महिमा सदैव बनी रहे। मैं तेरे नाम का गुणगान करता हूँ और तेरी स्तुति करता हूँ। तू मेरा सहारा है और मेरी शक्ति है। मैं तेरे सामने झुकता हूँ और तेरी महिमा का वर्णन करता हूँ।”
राजा दाऊद ने अपनी प्रार्थना समाप्त की और उसके हृदय में एक गहरी शांति थी। वह जानता था कि परमेश्वर उसके साथ है और उसे कभी नहीं छोड़ेगा। उसने अपने मन में निश्चय किया कि वह हमेशा परमेश्वर की आराधना करेगा और उसकी आज्ञाओं का पालन करेगा।
इस प्रकार, राजा दाऊद ने परमेश्वर की स्तुति की और उसकी महिमा का गुणगान किया। वह जानता था कि उसकी सभी सफलताएं और विजयें परमेश्वर की देन हैं। उसने अपने हृदय में परमेश्वर के प्रति एक गहरी कृतज्ञता महसूस की और उसकी आराधना की।
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यह कहानी भजन संहिता 21 के आधार पर बनाई गई है, जो राजा दाऊद के विजय और परमेश्वर के प्रति उसकी कृतज्ञता को दर्शाती है। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि हमें हमेशा परमेश्वर की स्तुति करनी चाहिए और उसकी कृपा के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए।