भजन संहिता 149 एक ऐसा भजन है जो परमेश्वर की स्तुति और उसके लोगों की विजय के बारे में बताता है। यह भजन इस्राएल के लोगों को परमेश्वर की महिमा गाने और उसके न्याय को पूरा करने के लिए बुलाता है। आइए, इस भजन को आधार बनाकर एक कहानी बुनते हैं, जो हमें परमेश्वर की महिमा और उसके लोगों की भूमिका के बारे में गहराई से सोचने पर मजबूर करे।
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### **परमेश्वर की स्तुति और विजय का गीत**
एक बार की बात है, यरूशलेम के पास एक छोटे से गाँव में एक समुदाय रहता था। यह समुदाय परमेश्वर के प्रति अत्यंत समर्पित था। वे हर रात को एकत्रित होकर परमेश्वर की स्तुति करते और उसके वचन को सुनते। उनके बीच एक युवक था, जिसका नाम एलियाह था। एलियाह को परमेश्वर के गीत गाने का बहुत शौक था। वह हमेशा अपने साथ एक छोटी सी वीणा लेकर चलता था और जब भी मौका मिलता, वह परमेश्वर की महिमा के गीत गाता।
एक दिन, गाँव के बुजुर्गों ने एलियाह को बुलाया और कहा, “एलियाह, परमेश्वर ने हमें एक संदेश दिया है। वह चाहता है कि हम उसकी स्तुति करें और उसके न्याय को पूरा करने के लिए तैयार रहें। तुम्हारे गीतों में वह शक्ति है जो लोगों के हृदय को छू सकती है। क्या तुम हमारे लिए एक नया गीत बना सकते हो जो परमेश्वर की महिमा और उसके न्याय को दर्शाए?”
एलियाह ने सिर झुकाकर कहा, “मैं कोशिश करूंगा।” वह रात भर जागकर परमेश्वर से प्रार्थना करता रहा। उसने अपने हृदय में परमेश्वर की आवाज सुनी, जो उसे भजन संहिता 149 के बारे में सोचने के लिए प्रेरित कर रही थी। अगले दिन, एलियाह ने गाँव के लोगों को इकट्ठा किया और उनसे कहा, “परमेश्वर ने मुझे एक गीत दिया है। यह गीत उसकी महिमा और उसके न्याय के बारे में है। आइए, हम सब मिलकर इसे गाएं।”
गाँव के लोगों ने एलियाह के साथ मिलकर गीत गाना शुरू किया:
**”यहोवा के लिए एक नया गीत गाओ;
उसकी सभा में उसकी स्तुति करो।
इस्राएल को अपने सृष्टिकर्ता में आनन्दित होना चाहिए;
सिय्योन की सन्तान को अपने राजा में मगन होना चाहिए।
वे नृत्य करके उसके नाम की स्तुति करें;
वे ढोल और वीणा बजाकर उसके लिए गीत गाएं।”**
गीत की धुन और शब्दों ने सभी के हृदय को छू लिया। वे सब परमेश्वर की महिमा में डूब गए। उसी रात, गाँव के लोगों ने सपना देखा कि परमेश्वर उन्हें एक महान युद्ध के लिए तैयार कर रहा है। यह युद्ध उनके विरोधियों के खिलाफ था, जो परमेश्वर के नाम को बदनाम कर रहे थे।
अगले दिन, गाँव के बुजुर्गों ने एलियाह से कहा, “परमेश्वर ने हमें एक मिशन दिया है। हमें उन लोगों के खिलाफ खड़ा होना है जो उसके नाम को बदनाम करते हैं। लेकिन हमें यह युद्ध शारीरिक हथियारों से नहीं, बल्कि परमेश्वर के वचन और स्तुति से लड़ना है।”
एलियाह ने गाँव के लोगों को इकट्ठा किया और कहा, “परमेश्वर ने हमें यह वादा दिया है कि वह हमारे साथ है। हमें उसकी स्तुति करनी है और उसके न्याय को पूरा करने के लिए तैयार रहना है।”
गाँव के लोगों ने अपने हाथों में वीणा और ढोल लिए और युद्ध के मैदान की ओर चल पड़े। जब वे वहाँ पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि उनके विरोधी उनसे कहीं अधिक संख्या में हैं। लेकिन एलियाह ने उन्हें याद दिलाया, “परमेश्वर हमारे साथ है। हमें उस पर भरोसा रखना चाहिए।”
गाँव के लोगों ने परमेश्वर की स्तुति करना शुरू किया। उनके गीतों की आवाज आकाश तक पहुँच गई। उन्होंने गाया:
**”यहोवा अपने लोगों से प्रसन्न होता है;
वह दीनों को विजय देकर सुशोभित करता है।
उसके भक्त जयजयकार करें;
वे अपने शय्याओं पर उसकी स्तुति करें।
उनके मुंह में परमेश्वर की प्रशंसा हो;
और उनके हाथों में दो धारी तलवार हो।”**
जैसे ही उन्होंने गीत गाना समाप्त किया, एक चमत्कार हुआ। उनके विरोधी भयभीत हो गए और भागने लगे। परमेश्वर ने अपने लोगों के लिए लड़ाई लड़ी और उन्हें विजय दिलाई। गाँव के लोगों ने परमेश्वर की स्तुति की और उसके न्याय को पूरा होते देखा।
एलियाह ने गाँव के लोगों से कहा, “यह विजय हमारी नहीं, बल्कि परमेश्वर की है। उसने हमें अपनी स्तुति के द्वारा विजय दिलाई। हमें हमेशा उसकी महिमा करनी चाहिए और उसके न्याय पर भरोसा रखना चाहिए।”
गाँव के लोगों ने एलियाह की बात मानी और हर दिन परमेश्वर की स्तुति करने लगे। उन्होंने सीखा कि परमेश्वर की स्तुति और उसके वचन में ही सच्ची शक्ति है। और इस तरह, वे परमेश्वर के न्याय और प्रेम में चलते रहे।
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यह कहानी हमें सिखाती है कि परमेश्वर की स्तुति हमारे जीवन में कितनी शक्तिशाली हो सकती है। जब हम उसकी महिमा करते हैं और उसके न्याय पर भरोसा रखते हैं, तो वह हमारे लिए लड़ता है और हमें विजय देता है। भजन संहिता 149 हमें यह याद दिलाता है कि परमेश्वर के लोगों की स्तुति और आनन्द ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है।