उत्पत्ति 30 की कहानी हिंदी में विस्तार से इस प्रकार है:
याकूब ने लाबान के घर में कई वर्ष बिता दिए थे। उसने लाबान की दो बेटियों, लिआ और राहेल, से विवाह किया था। लेकिन याकूब का प्रेम राहेल के प्रति अधिक था, क्योंकि वह उससे पहले प्रेम करता था और उसके लिए सात वर्ष तक सेवा की थी। हालाँकि, लिआ को पहले याकूब से विवाह करना पड़ा क्योंकि लाबान ने उसे धोखा दिया था। इससे याकूब के जीवन में तनाव और प्रतिस्पर्धा का वातावरण बन गया।
लिआ और राहेल दोनों ही याकूब के लिए संतान चाहती थीं, क्योंकि उस समय में संतान होना एक आशीर्वाद और सम्मान की बात मानी जाती थी। लिआ को परमेश्वर ने आशीष दी, और वह याकूब के लिए एक के बाद एक पुत्रों को जन्म देने लगी। उसने चार पुत्रों को जन्म दिया: रूबेन, शिमोन, लेवी, और यहूदा। हर बच्चे के जन्म के साथ, लिआ ने परमेश्वर का धन्यवाद किया और उम्मीद की कि याकूब का प्रेम उसकी ओर बढ़ेगा।
दूसरी ओर, राहेल बाँझ थी। वह याकूब के प्रेम की प्रतिद्वंद्वी थी, लेकिन संतान न होने के कारण वह दुखी और हताश थी। एक दिन, राहेल ने याकूब से कहा, “मुझे बच्चे दो, नहीं तो मैं मर जाऊँगी!” याकूब ने उसे समझाया कि संतान देना परमेश्वर के हाथ में है, और वह उसके लिए कुछ नहीं कर सकता। राहेल ने अपनी दासी बिल्हा को याकूब को दे दिया ताकि वह उसके द्वारा संतान प्राप्त कर सके। बिल्हा ने दो पुत्रों को जन्म दिया: दान और नप्ताली। राहेल ने इन बच्चों को अपना माना और परमेश्वर का धन्यवाद किया।
जब लिआ ने देखा कि वह अब गर्भवती नहीं हो सकती, तो उसने भी अपनी दासी जिल्पा को याकूब को दे दिया। जिल्पा ने भी दो पुत्रों को जन्म दिया: गाद और आशेर। लिआ ने इन बच्चों को अपनी संतान के रूप में स्वीकार किया और परमेश्वर की स्तुति की।
कुछ समय बाद, लिआ फिर से गर्भवती हुई और उसने याकूब के लिए पाँचवें पुत्र, इस्साकार, को जन्म दिया। उसने कहा, “परमेश्वर ने मुझे मेरी सेवा का प्रतिफल दिया है।” फिर उसने छठे पुत्र, जबूलून, को जन्म दिया और कहा, “परमेश्वर ने मुझे एक अच्छा उपहार दिया है। अब मेरा पति मुझे सम्मान देगा।” अंत में, लिआ ने एक बेटी, दीना, को भी जन्म दिया।
राहेल ने भी परमेश्वर से प्रार्थना की, और परमेश्वर ने उसकी प्रार्थना सुनी। राहेल गर्भवती हुई और उसने याकूब के लिए एक पुत्र, यूसुफ, को जन्म दिया। राहेल ने कहा, “परमेश्वर ने मेरी निराशा दूर कर दी है। मैं उससे और भी बच्चों की आशा करती हूँ।”
इस तरह, याकूब के परिवार में बारह पुत्र हुए, जो बाद में इस्राएल के बारह गोत्रों के संस्थापक बने। यह कहानी हमें परमेश्वर की विश्वासयोग्यता और उसकी योजनाओं की महानता को दर्शाती है। याकूब, लिआ, और राहेल के जीवन में परमेश्वर का हाथ स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जो उनकी प्रार्थनाओं को सुनता है और उन्हें आशीष देता है।