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यरदन नदी का चमत्कार: यहोशू और परमेश्वर की सामर्थ्य

यहोशू अध्याय 3 की कहानी हिंदी में:

यहोशू के समय में, इस्राएल के लोग यरदन नदी के किनारे पर डेरा डाले हुए थे। वे वादा किए हुए देश में प्रवेश करने के लिए तैयार थे, लेकिन उनके सामने एक बड़ी बाधा थी – यरदन नदी। यह नदी उस समय बाढ़ के कारण अपने पूरे जोर पर थी, और इसके पार जाना मनुष्य के लिए असंभव लग रहा था। परन्तु परमेश्वर ने यहोशू से कहा था कि वह इस्राएलियों को इस नदी के पार ले जाएगा और उन्हें वादा किए हुए देश में प्रवेश कराएगा।

यहोशू ने सुबह-सुबह उठकर इस्राएल के लोगों को इकट्ठा किया और उनसे कहा, “परमेश्वर के वचन को सुनो। आज तुम्हें पता चलेगा कि तुम्हारे बीच जीवित परमेश्वर है। वह तुम्हारे सामने से कनानी, हित्ती, हिव्वी, परिज्जी, गिर्गाशी, एमोरी और यबूसी लोगों को निकाल देगा। देखो, सारे संसार के प्रभु की वाचा का सन्दूक तुम्हारे आगे-आगे यरदन नदी में जाएगा। जब वह नदी में प्रवेश करेगा, तो नदी का पानी ऊपर से रुक जाएगा और एक ढेर के समान खड़ा हो जाएगा।”

यहोशू ने याजकों से कहा, “परमेश्वर के वाचा के सन्दूक को उठाओ और लोगों के आगे-आगे चलो।” याजकों ने वाचा के सन्दूक को उठाया और लोगों के आगे-आगे चलने लगे। परमेश्वर ने यहोशू से कहा था, “आज मैं तुम्हें इस्राएल के सामने महान बनाऊंगा, ताकि वे जानें कि जैसे मैं मूसा के साथ था, वैसे ही तुम्हारे साथ भी हूँ।”

जब याजकों ने वाचा के सन्दूक को उठाया और यरदन नदी के किनारे पर पहुँचे, तो नदी का पानी बाढ़ के कारण अपने किनारों से ऊपर उठा हुआ था। परन्तु जैसे ही याजकों के पैर नदी के पानी में पड़े, वैसे ही ऊपर से आने वाला पानी रुक गया और एक ढेर के समान खड़ा हो गया। नदी का पानी दूर अदाम नगर के पास रुक गया, जो सार्थान के निकट है। और नीचे की ओर का पानी लवण सागर की ओर बहकर पूरी तरह से सूख गया। इस्राएल के लोग यरीहो के सामने से सूखी भूमि पर चलकर नदी के पार हो गए।

याजक जो परमेश्वर के वाचा के सन्दूक को लिए हुए थे, वे यरदन नदी के बीच में सूखी भूमि पर दृढ़ता से खड़े रहे, जब तक कि सारे इस्राएल ने नदी को पार नहीं कर लिया। यह परमेश्वर का एक बड़ा चमत्कार था, जिसने इस्राएलियों को यह दिखाया कि परमेश्वर उनके साथ है और वह उन्हें वादा किए हुए देश में ले जाएगा।

जब सारे लोग नदी के पार हो गए, तो यहोशू ने बारह पुरुषों को चुना, जो इस्राएल के हर गोत्र में से एक-एक थे। उसने उनसे कहा, “याजकों के पैरों के नीचे से यरदन नदी के बीच में से एक-एक पत्थर उठाओ और उन्हें उस स्थान पर ले आओ, जहाँ आज रात तुम डेरा डालोगे। ये पत्थर तुम्हारे लिए एक स्मारक होंगे। जब भविष्य में तुम्हारे बच्चे पूछेंगे कि ये पत्थर क्या हैं, तो तुम उन्हें बताना कि यरदन नदी का पानी परमेश्वर के वाचा के सन्दूक के सामने कैसे रुक गया था। ये पत्थर सदैव इस्राएल के लोगों के लिए परमेश्वर की सामर्थ्य और उसके चमत्कारों की याद दिलाएंगे।”

इस प्रकार, परमेश्वर ने यहोशू को महान बनाया और सारे इस्राएल ने देखा कि जैसे वह मूसा के साथ था, वैसे ही वह यहोशू के साथ भी है। उन्होंने यहोशू का आदर किया और उसके जीवन भर उसकी आज्ञा मानी। यह घटना इस्राएलियों के लिए एक बड़ा प्रमाण था कि परमेश्वर उनके साथ है और वह उन्हें अपने वादे के अनुसार वादा किए हुए देश में ले जाएगा।

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