पवित्र बाइबल

मिस्र से मुक्ति: फसह का पहला पर्व

मिस्र से निकलने की तैयारी का समय आ गया था। परमेश्वर ने मूसा और हारून को बुलाया और उनसे कहा, “यह महीना तुम्हारे लिए महीनों का प्रथम महीना होगा। यह तुम्हारे लिए वर्ष का पहला महीना होगा। इस्राएल के सभी परिवारों को यह आदेश दो कि वे इस महीने के दसवें दिन अपने लिए एक मेम्ना चुनें। यह मेम्ना निर्दोष और एक वर्ष का होना चाहिए। यदि परिवार छोटा है और पूरा मेम्ना नहीं खा सकता, तो वे अपने पड़ोसी के साथ मिलकर एक मेम्ना लें।”

मूसा ने परमेश्वर के वचन को सुनकर इस्राएलियों को यह आदेश दिया। लोगों ने मूसा की बात मानी और हर परिवार ने एक मेम्ना चुना। उन्होंने मेम्ने को चौदहवें दिन तक रखा, और फिर संध्या के समय उसे मार डाला। मूसा ने उन्हें आगे निर्देश दिया, “मेम्ने के खून को लेकर उसे अपने घर के दरवाज़े के दोनों ओर और ऊपर की चौखट पर लगाओ। यह खून तुम्हारे लिए एक चिह्न होगा। जब मैं मिस्रियों को दंड देने के लिए आऊंगा, तो मैं उन घरों को छोड़ दूंगा जहाँ खून का चिह्न होगा। तुम्हारे ऊपर कोई विपत्ति नहीं आएगी।”

लोगों ने मूसा की बात मानी। उन्होंने मेम्ने का खून लिया और अपने घरों के दरवाज़ों पर लगा दिया। फिर उन्होंने मेम्ने का मांस पकाया। मूसा ने उन्हें आदेश दिया था कि वे मांस को बिना खमीर की रोटी और कड़वी जड़ी-बूटियों के साथ खाएं। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपनी कमर कसकर, जूते पहने और अपने हाथ में लाठी लिए हुए खाएं। यह यात्रा के लिए तैयार होने का संकेत था, क्योंकि परमेश्वर ने उन्हें मिस्र से निकलने का आदेश दिया था।

रात को, जब सभी इस्राएली अपने घरों में थे, परमेश्वर ने मिस्र के सभी पहलौठों को मार डाला। फिरौन के महल से लेकर कैदियों की कोठरी तक, हर घर में विलाप और चीखें सुनाई देने लगीं। लेकिन जिन घरों के दरवाज़े पर मेम्ने का खून लगा हुआ था, वहाँ परमेश्वर की विपत्ति नहीं आई। उन घरों में शांति थी।

फिरौन ने देखा कि उसका अपना पहलौठा पुत्र मर गया है। वह बहुत दुखी हुआ और उसने मूसा और हारून को बुलवाया। उसने कहा, “उठो, तुम और तुम्हारे साथ के सभी इस्राएली मेरे लोगों के बीच से निकल जाओ। जैसा तुमने कहा था, वैसा ही करो। अपने परमेश्वर की उपासना करो। अपनी भेड़-बकरियों और गाय-बैलों को भी ले जाओ। बस, मुझे आशीर्वाद दो।”

मिस्र के लोग भी इस्राएलियों को जल्दी से जल्दी भगाना चाहते थे। वे डर गए थे कि कहीं वे सभी मर न जाएं। इसलिए उन्होंने इस्राएलियों को सोना, चाँदी और कपड़े देकर उन्हें जाने के लिए कहा। इस्राएलियों ने मिस्रियों से ये चीज़ें ले लीं, और इस तरह वे मिस्र से बहुत धन लेकर निकले।

इस्राएलियों ने मूसा और हारून के नेतृत्व में मिस्र छोड़ दिया। वे लगभग छह लाख पुरुष थे, और उनके साथ महिलाएं, बच्चे और पशु भी थे। वे सभी यात्रा के लिए तैयार थे, जैसा कि परमेश्वर ने उन्हें आदेश दिया था। उन्होंने बिना खमीर की रोटी खाई, क्योंकि उनके पास इंतज़ार करने का समय नहीं था। वे जल्दी में थे, क्योंकि परमेश्वर ने उन्हें मिस्र से निकलने का आदेश दिया था।

परमेश्वर ने इस्राएलियों से कहा, “यह दिन तुम्हारे लिए सदा के लिए एक स्मरण दिवस होगा। तुम इसे यहोवा का पर्व मनाओगे। तुम इसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी मनाओगे। यह तुम्हारे लिए एक स्थायी विधि होगी। सात दिन तक तुम बिना खमीर की रोटी खाओगे। पहले दिन तुम अपने घरों से खमीर को दूर कर दोगे। जो कोई पहले दिन से सातवें दिन तक खमीर वाली रोटी खाएगा, वह इस्राएल से काट दिया जाएगा।”

इस्राएलियों ने परमेश्वर के आदेश को माना। उन्होंने मिस्र से निकलकर अपनी यात्रा शुरू की। वे परमेश्वर की महान शक्ति और उनकी सुरक्षा के साथ चल रहे थे। यह उनके लिए एक नई शुरुआत थी, जो परमेश्वर के वादे और उनकी विश्वासयोग्यता पर आधारित थी।

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