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मलाकी की शिक्षा: ईमानदार आराधना और परमेश्वर का प्रेम

मलाकी 1 की कहानी हमें इस्राएल के उस समय की ओर ले जाती है जब लोग परमेश्वर के प्रति अपनी वफादारी और आराधना में ढील देने लगे थे। यह कहानी न केवल उस समय के लोगों के लिए, बल्कि आज के हमारे लिए भी एक गहरी शिक्षा और चेतावनी लेकर आती है।

उस समय, इस्राएल के लोगों ने परमेश्वर के साथ अपने वादों को भुला दिया था। वे मंदिर में आते थे, बलिदान चढ़ाते थे, लेकिन उनकी आराधना में वह गहराई और ईमानदारी नहीं थी जो परमेश्वर चाहता था। उनके हृदय दूर हो चुके थे, और उनकी आराधना एक खोखली रस्म बनकर रह गई थी। यही वह समय था जब परमेश्वर ने मलाकी नाम के एक भविष्यवक्ता को भेजा, ताकि वह लोगों को उनकी गलतियों का एहसास दिला सके और उन्हें सही राह पर लौटने के लिए प्रेरित कर सके।

मलाकी ने परमेश्वर का संदेश लोगों तक पहुँचाना शुरू किया। उसने कहा, “परमेश्वर यह कहता है: ‘मैंने तुमसे प्रेम किया है।’ लेकिन लोगों ने उत्तर दिया, ‘तूने हमसे कैसा प्रेम किया है?'” मलाकी ने उन्हें समझाया कि परमेश्वर का प्रेम इस्राएल के चुनाव में प्रकट हुआ था। उसने एसाव को नहीं, बल्कि याकूब को चुना था, और इस्राएल को अपनी विशेष संतान बनाया था। लेकिन अब, इस्राएल के लोग परमेश्वर के इस प्रेम को भूल चुके थे।

मलाकी ने आगे कहा, “परमेश्वर यह भी कहता है: ‘मैं तुम्हारा पिता हूँ, और तुम मेरे पुत्र हो। मैं तुम्हारा स्वामी हूँ, और तुम मेरे सेवक हो। फिर तुम मेरा आदर क्यों नहीं करते?'” लेकिन लोगों ने फिर से प्रश्न किया, “हमने तेरा आदर कैसे नहीं किया?” मलाकी ने उन्हें बताया कि उनके बलिदान और आराधना में कोई मूल्य नहीं था। वे मंदिर में विकलांग, बीमार और दोषयुक्त पशुओं को चढ़ाते थे, जो परमेश्वर के लिए अस्वीकार्य थे। मलाकी ने कहा, “क्या तुम ऐसे उपहार राज्यपाल को दोगे? क्या वह तुमसे प्रसन्न होगा? फिर तुम ऐसे तुच्छ बलिदान परमेश्वर को क्यों चढ़ाते हो?”

मलाकी के शब्दों ने लोगों के हृदय को झकझोर दिया। उसने उन्हें याद दिलाया कि परमेश्वर महान और भययोग्य है, और उसका नाम सारे जगत में महिमामय है। उसने कहा, “यदि तुम मेरा आदर नहीं करते, तो मैं तुम्हारे लिए आशीषों के द्वार बंद कर दूँगा। तुम्हारे बलिदान व्यर्थ होंगे, और तुम्हारी प्रार्थनाएँ मेरे कानों तक नहीं पहुँचेंगी।”

मलाकी ने लोगों को यह भी बताया कि परमेश्वर की आराधना में ईमानदारी और समर्पण की आवश्यकता है। उसने कहा, “परमेश्वर तुम्हारे हृदय को देखता है। वह तुम्हारे बाहरी कर्मों से अधिक तुम्हारी भावनाओं और इरादों को महत्व देता है। यदि तुम सच्चे मन से उसकी आराधना करोगे, तो वह तुम्हें आशीषित करेगा।”

मलाकी के संदेश ने कुछ लोगों के हृदय को छू लिया। वे अपने कर्मों पर पश्चाताप करने लगे और परमेश्वर के प्रति अपनी वफादारी को नवीनीकृत करने का प्रयास करने लगे। लेकिन कई लोग अभी भी अपनी गलतियों को स्वीकार करने से इनकार कर रहे थे।

मलाकी ने अंत में परमेश्वर की महिमा और उसके न्याय की बात की। उसने कहा, “परमेश्वर का दिन आने वाला है, और वह सब कुछ साफ़ कर देगा। वह धर्मी और दुष्ट को अलग करेगा, और हर एक को उसके कर्मों के अनुसार फल देगा। इसलिए, परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करो और उसके मार्ग पर चलो।”

मलाकी की कहानी हमें यह सिखाती है कि परमेश्वर हमारे हृदय को देखता है। वह हमारी बाहरी आराधना से अधिक हमारे आंतरिक समर्पण और ईमानदारी को महत्व देता है। यदि हम उसकी आराधना सच्चे मन से करेंगे, तो वह हमें आशीषित करेगा और हमारे जीवन में अपनी महिमा प्रकट करेगा।

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