यहेजकेल 28 की कहानी एक गहरी और प्रतीकात्मक कथा है, जो तूर के राजा के बारे में है, लेकिन यह शैतान के पतन की ओर भी इशारा करती है। यह कहानी परमेश्वर की महिमा, मनुष्य के अहंकार, और पाप के परिणामों को दर्शाती है। आइए, इस कहानी को विस्तार से समझें।
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### तूर के राजा का अहंकार और उसका पतन
तूर एक समृद्ध और शक्तिशाली नगर था, जो व्यापार और संपत्ति के लिए प्रसिद्ध था। इस नगर का राजा अपनी बुद्धि, सौंदर्य, और धन के कारण अत्यंत गर्वित था। वह अपने आप को देवताओं के समान मानने लगा था। उसका हृदय अहंकार से भर गया था, और वह यह भूल गया कि उसकी सारी संपत्ति और शक्ति परमेश्वर की देन है।
एक दिन, परमेश्वर ने यहेजकेल नबी को तूर के राजा के बारे में एक संदेश दिया। यहेजकेल ने राजा से कहा, “तू कहता है, ‘मैं ईश्वर हूं, मैं देवताओं के सिंहासन पर बैठा हूं।’ परन्तु तू मनुष्य है, ईश्वर नहीं। तेरे हृदय में अहंकार भर गया है, और तूने अपनी बुद्धि और सौंदर्य को अपनी शक्ति का स्रोत मान लिया है।”
यहेजकेल ने राजा को याद दिलाया कि वह एक सुंदर और बुद्धिमान प्राणी के रूप में बनाया गया था। उसके वस्त्र बहुमूल्य रत्नों और सोने से सजे हुए थे। वह परमेश्वर के पवित्र पर्वत पर चलता था, और उसके पास हर प्रकार की संपत्ति थी। परन्तु उसने अपनी सुंदरता और बुद्धि का दुरुपयोग किया, और अपने हृदय में पाप भर लिया।
### शैतान के पतन का प्रतीक
यहेजकेल की भविष्यवाणी केवल तूर के राजा तक ही सीमित नहीं थी। यह शैतान के पतन की ओर भी इशारा करती है, जो एक बार परमेश्वर के सबसे सुंदर और बुद्धिमान स्वर्गदूतों में से एक था। शैतान, जिसे “प्रभात का तारा” या “लूसिफर” कहा जाता है, ने अपनी सुंदरता और शक्ति के कारण अहंकार कर लिया। उसने परमेश्वर के समान बनने की इच्छा की, और इस पाप के कारण स्वर्ग से नीचे गिरा दिया गया।
यहेजकेल ने कहा, “तू अपनी सुंदरता के कारण अहंकारी हो गया, और तूने अपनी बुद्धि को भ्रष्ट कर दिया। इसलिए मैं तुझे पृथ्वी पर फेंक दूंगा, और तुझे राजाओं के सामने लज्जित करूंगा।”
### पाप का परिणाम
परमेश्वर ने तूर के राजा और शैतान दोनों को उनके पापों के लिए दंड दिया। तूर का राजा अपनी संपत्ति और शक्ति से वंचित हो गया, और उसका नगर नष्ट हो गया। शैतान को स्वर्ग से नीचे गिरा दिया गया, और वह अब परमेश्वर के विरुद्ध एक शत्रु के रूप में कार्य करता है।
यहेजकेल की भविष्यवाणी हमें यह सीख देती है कि अहंकार और पाप का परिणाम हमेशा विनाश होता है। परमेश्वर की महिमा और उसकी सृष्टि के प्रति विनम्र रहना ही सच्ची बुद्धिमानी है।
### परमेश्वर की न्याय और दया
इस कहानी में, परमेश्वर का न्याय स्पष्ट है, लेकिन उसकी दया भी दिखाई देती है। वह चाहता है कि हम अपने पापों से पश्चाताप करें और उसकी ओर लौटें। तूर के राजा और शैतान के उदाहरण हमें यह याद दिलाते हैं कि परमेश्वर के बिना, हमारी सारी संपत्ति और शक्ति व्यर्थ है।
यहेजकेल 28 की कहानी हमें परमेश्वर की महिमा, उसके न्याय, और उसकी दया के बारे में गहराई से सोचने के लिए प्रेरित करती है। यह हमें यह भी याद दिलाती है कि हमें अपने हृदय में अहंकार के बजाय विनम्रता और आज्ञाकारिता को स्थान देना चाहिए।
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यह कहानी न केवल एक ऐतिहासिक घटना है, बल्कि यह हमारे अपने जीवन के लिए भी एक शिक्षा है। हमें यह याद रखना चाहिए कि परमेश्वर ही हमारी सारी शक्ति और संपत्ति का स्रोत है, और उसके प्रति विनम्र रहना ही सच्ची बुद्धिमानी है।