पवित्र बाइबल

प्रभु के आगमन की प्रतीक्षा और सत्य पर दृढ़ता

दूसरे थिस्सलुनीकियों के दूसरे अध्याय में पौलुस प्रेरित एक गहरी और रहस्यमय शिक्षा देता है, जो प्रभु यीशु मसीह के दूसरे आगमन और उससे पहले होने वाली घटनाओं से संबंधित है। यह कहानी उसी आधार पर बुनी गई है, जिसमें हम एक काल्पनिक परिदृश्य के माध्यम से इस शिक्षा को समझने का प्रयास करेंगे।

एक बार की बात है, थिस्सलुनीकिया नगर में एक छोटा-सा मसीही समुदाय रहता था। ये लोग प्रभु यीशु मसीह में गहरा विश्वास रखते थे और उनके दूसरे आगमन की प्रतीक्षा कर रहे थे। लेकिन समय बीतने के साथ, उनके मन में संदेह और भ्रम पैदा होने लगा। कुछ लोगों ने झूठी शिक्षाएं फैलानी शुरू कर दीं कि प्रभु का दिन पहले ही आ चुका है। इससे वे डर गए और परेशान हो उठे।

तब पौलुस प्रेरित ने उन्हें एक पत्र लिखा, जिसमें उसने उन्हें समझाया कि प्रभु का दिन अभी नहीं आया है, और उससे पहले कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं घटनी हैं। पौलुस ने लिखा, “हे भाइयों, हम प्रभु यीशु मसीह के आगमन और हमारे उसके पास इकट्ठे होने के विषय में तुमसे विनती करते हैं कि तुम अपने मन को शीघ्र ही विचलित न होने दो, और न घबराओ, कि जैसे प्रभु का दिन आ गया है।”

पौलुस ने आगे समझाया कि प्रभु के आने से पहले एक “विपरीत” का प्रकट होना आवश्यक है। यह विपरीत, जिसे “पाप का पुरुष” या “विनाश का पुत्र” कहा जाता है, परमेश्वर के विरुद्ध खड़ा होगा और स्वयं को परमेश्वर के समान ऊंचा करने का प्रयास करेगा। वह झूठ के साथ आएगा और लोगों को धोखा देगा, ताकि वे सत्य से दूर हो जाएं। पौलुस ने कहा, “वह तो हर एक प्रकार की झूठी सामर्थ्य, चिन्हों, और अद्भुत कामों के साथ आएगा, और अधर्म के साथ उन्हें धोखा देगा जो नाश होने वाले हैं, क्योंकि उन्होंने सत्य के प्रेम को ग्रहण नहीं किया ताकि उनका उद्धार हो सके।”

थिस्सलुनीकिया के विश्वासियों ने पौलुस के शब्दों को गंभीरता से सुना। उन्होंने समझा कि परमेश्वर ने उन्हें एक “रोकने वाली शक्ति” दी है, जो इस पाप के पुरुष को अभी प्रकट नहीं होने दे रही है। यह शक्ति परमेश्वर की ओर से है, और जब तक यह है, तब तक अधर्म का प्रकट होना संभव नहीं है। पौलुस ने उन्हें याद दिलाया कि परमेश्वर का न्याय उन सभी पर आएगा जो सत्य को नहीं मानते और अधर्म में आनंद लेते हैं।

पौलुस ने उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे दृढ़ रहें और परमेश्वर के वचन में स्थिर बने रहें। उसने कहा, “हे प्रिय भाइयों, हमें तुम्हारे विषय में परमेश्वर का धन्यवाद करना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हें आरंभ से ही उद्धार के लिए चुना है, पवित्र आत्मा के द्वारा और सत्य पर विश्वास करने के द्वारा।”

थिस्सलुनीकिया के विश्वासियों ने पौलुस के शब्दों को अपने हृदय में संजोया। उन्होंने प्रतिज्ञा की कि वे सत्य से दूर नहीं हटेंगे और प्रभु यीशु मसीह के आगमन की प्रतीक्षा में धैर्यपूर्वक बने रहेंगे। उन्होंने समझ लिया कि परमेश्वर का दिन अचानक नहीं आएगा, बल्कि उससे पहले कई चेतावनियां और संकेत होंगे। उन्होंने अपने आप को और भी अधिक प्रार्थना और परमेश्वर के वचन के अध्ययन में लगा दिया, ताकि वे किसी भी झूठे शिक्षक या धोखे से बच सकें।

इस प्रकार, थिस्सलुनीकिया के विश्वासियों ने पौलुस की शिक्षा को अपने जीवन में उतारा और प्रभु की वापसी की प्रतीक्षा करते हुए, उन्होंने अपने विश्वास को और मजबूत किया। उन्होंने जान लिया कि परमेश्वर का वचन ही उनका मार्गदर्शक है, और वही उन्हें अंतिम दिनों में सुरक्षित रखेगा।

यह कहानी दूसरे थिस्सलुनीकियों के दूसरे अध्याय के आधार पर बुनी गई है, जो हमें यह सिखाती है कि प्रभु के आने से पहले हमें सचेत रहना चाहिए और सत्य पर दृढ़ बने रहना चाहिए।

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