यहोशू 14 का अध्याय एक ऐसी कहानी सुनाता है जो विश्वास, धैर्य और परमेश्वर के वादों के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाती है। यह कहानी कालेब नामक एक व्यक्ति के बारे में है, जो यहूदा के गोत्र से था और मूसा के समय से ही इस्राएलियों के साथ था। यह कहानी उसके विश्वास और परमेश्वर के प्रति उसकी निष्ठा को दर्शाती है।
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जब इस्राएलियों ने कनान देश में प्रवेश किया और यहोशू के नेतृत्व में उस देश को जीतना शुरू किया, तो यहोशू ने इस्राएल के सभी गोत्रों को उनकी विरासत का हिस्सा बाँटना शुरू किया। यहोशू ने यह काम परमेश्वर के निर्देशानुसार किया, क्योंकि परमेश्वर ने मूसा से वादा किया था कि वह इस्राएलियों को कनान देश देगा।
उस समय कालेब, जो यहूदा के गोत्र से था, यहोशू के पास आया। कालेब अब बूढ़ा हो चुका था, लेकिन उसकी आँखों में अभी भी वही जोश और विश्वास था जो उसने चालीस साल पहले दिखाया था। वह यहोशू के सामने खड़ा हुआ और उससे कहा, “तुम जानते हो कि परमेश्वर ने कादेश-बर्ने में मूसा से मेरे और तुम्हारे बारे में क्या कहा था। उस समय मूसा ने हमें इस देश की जाँच करने के लिए भेजा था, और मैंने पूरे मन से परमेश्वर की आज्ञा का पालन किया था।”
कालेब ने यहोशू को याद दिलाया कि जब वे कनान देश की जाँच करने गए थे, तो दस जासूसों ने लोगों को डरा दिया था और कहा था कि वह देश जीतने योग्य नहीं है। लेकिन कालेब और यहोशू ने परमेश्वर पर भरोसा रखा और लोगों से कहा कि परमेश्वर उन्हें उस देश को देगा। कालेब ने कहा, “मैंने परमेश्वर का पूरा अनुसरण किया, और मूसा ने मुझसे वादा किया था कि जिस भूमि पर मेरा पैर पड़ेगा, वह मेरी और मेरे वंश की होगी। अब देखो, परमेश्वर ने मुझे इतने सालों तक जीवित रखा है, और मैं आज भी उतना ही बलवान हूँ जितना उस दिन था।”
कालेब ने यहोशू से कहा, “मुझे वह पहाड़ी देश दो जिसके बारे में परमेश्वर ने उस दिन कहा था। तुम जानते हो कि वहाँ अनाक के लोग रहते हैं, और उनके बड़े-बड़े गढ़ हैं। लेकिन यदि परमेश्वर मेरे साथ है, तो मैं उन्हें वहाँ से निकाल दूंगा, जैसा परमेश्वर ने कहा था।”
यहोशू ने कालेब की बात सुनी और उसकी वफादारी और विश्वास को देखकर प्रसन्न हुआ। उसने कालेब को हेब्रोन का पहाड़ी देश दे दिया, जैसा परमेश्वर ने वादा किया था। हेब्रोन एक महत्वपूर्ण स्थान था, और वहाँ अनाक के वंशज रहते थे, जो लंबे और शक्तिशाली लोग थे। लेकिन कालेब ने उनसे डरने की बजाय परमेश्वर पर भरोसा रखा।
कालेब ने अपने लोगों को इकट्ठा किया और हेब्रोन की ओर कूच किया। वहाँ पहुँचकर उसने अनाक के वंशजों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। परमेश्वर की कृपा से कालेब और उसके लोगों ने उन शक्तिशाली दुश्मनों को हरा दिया और हेब्रोन को जीत लिया। कालेब ने वहाँ अपना घर बनाया और अपने वंश के लिए उस भूमि को सुरक्षित कर लिया।
कालेब की कहानी हमें सिखाती है कि परमेश्वर के वादों पर विश्वास रखना और उसकी आज्ञा का पालन करना कितना महत्वपूर्ण है। कालेब ने चालीस साल तक धैर्य से प्रतीक्षा की, लेकिन उसका विश्वास कभी डगमगाया नहीं। उसने परमेश्वर के वादे को पूरा होते देखा और अपनी विरासत प्राप्त की।
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, परमेश्वर हमेशा अपने वादों को पूरा करता है। हमें केवल उस पर विश्वास रखना है और उसके मार्ग पर चलना है। कालेब की तरह, हम भी परमेश्वर के साथ चलकर उसकी आशीषों को प्राप्त कर सकते हैं।
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यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि परमेश्वर के लिए कोई भी कार्य असंभव नहीं है। चाहे हमारी उम्र कितनी भी हो, या हमारे सामने कितनी भी बड़ी चुनौतियाँ क्यों न हों, परमेश्वर हमारे साथ है और वह हमें विजय दिलाएगा। कालेब की तरह, हम भी परमेश्वर के वादों पर दृढ़ विश्वास रख सकते हैं और उसकी महिमा को प्रकट होते देख सकते हैं।