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यूसुफ का सपना और मिस्र का उद्धार

यूसुफ का सपना और मिस्र का उद्धार

मिस्र के राजा फिरौन के दरबार में एक दिन अचानक हलचल मच गई। राजा ने एक अजीबोगरीब सपना देखा था, जिसने उसकी नींद उड़ा दी। सपने में वह नील नदी के किनारे खड़ा था। अचानक सात स्वस्थ और सुंदर गायें नदी से निकलकर चरागाह में चरने लगीं। उनके पीछे सात दुबली और बीमार गायें निकलीं, जो उन स्वस्थ गायों को खा गईं। फिर उसने दूसरा सपना देखा। इस बार सात मोटे और स्वस्थ बालें एक ही डंठल पर उगी हुई थीं। उनके बाद सात पतली और जलकर काली पड़ चुकी बालें उगीं, जो मोटी बालों को निगल गईं।

फिरौन का मन बेचैन हो गया। उसने अपने सभी ज्योतिषियों और बुद्धिमानों को बुलाया और उनसे सपने का अर्थ पूछा। परंतु कोई भी उसे सही जवाब नहीं दे पाया। तभी राजा के शराबखाने के अधिकारी ने याद दिलाया, “महाराज, मुझे यूसुफ नामक एक युवक की याद आ रही है। वह जेल में है और परमेश्वर की कृपा से सपनों का अर्थ बताने में निपुण है। उसने मेरा और बेकरी के अधिकारी का सपना सही-सही बताया था।”

फिरौन ने तुरंत यूसुफ को बुलाने का आदेश दिया। यूसुफ को जेल से लाया गया। उसने अपने बाल संवारे और साफ कपड़े पहने। जब वह राजा के सामने पहुंचा, तो फिरौन ने कहा, “मैंने एक सपना देखा है, और कोई भी उसका अर्थ नहीं बता पा रहा है। मैंने सुना है कि तुम सपनों का अर्थ बताने में निपुण हो।”

यूसुफ ने विनम्रता से उत्तर दिया, “महाराज, यह मेरी शक्ति नहीं है। परमेश्वर ही हैं, जो आपके कल्याण के लिए सपने का अर्थ बताएंगे।”

फिरौन ने अपना सपना यूसुफ को सुनाया। यूसुफ ने कहा, “महाराज, परमेश्वर ने आपको यह सपना दिखाकर भविष्य में होने वाली घटनाओं के बारे में चेतावनी दी है। सात स्वस्थ गायें और सात मोटी बालें सात वर्षों की प्रचुरता का संकेत हैं। ये वर्ष मिस्र में बहुतायत और समृद्धि के होंगे। लेकिन उनके बाद सात दुबली गायें और सात पतली बालें सात वर्षों के अकाल का संकेत हैं। यह अकाल इतना भयानक होगा कि पहले के सात वर्षों की समृद्धि को भी नष्ट कर देगा।”

यूसुफ ने आगे कहा, “महाराज, परमेश्वर ने आपको यह सपना दिखाया है ताकि आप पहले से तैयारी कर सकें। मेरी सलाह है कि आप एक बुद्धिमान और समझदार व्यक्ति को नियुक्त करें, जो इन सात वर्षों की प्रचुरता के दौरान अनाज का भंडारण करे। इस तरह, जब अकाल के वर्ष आएंगे, तो मिस्र भूख से नहीं मरेगा।”

फिरौन यूसुफ की बुद्धिमत्ता और परमेश्वर की कृपा से प्रभावित हुआ। उसने अपने दरबारियों से कहा, “क्या हम यूसुफ जैसा बुद्धिमान और परमेश्वर की आत्मा से भरा हुआ व्यक्ति ढूंढ सकते हैं?” फिर उसने यूसुफ से कहा, “तुम्हें परमेश्वर ने यह ज्ञान दिया है, इसलिए तुम्हीं इस कार्य के लिए सबसे उपयुक्त हो। मैं तुम्हें मिस्र का प्रधानमंत्री नियुक्त करता हूं। तुम्हारे आदेश के बिना कोई भी हाथ या पैर नहीं हिलाएगा।”

फिरौन ने यूसुफ को अपनी अंगूठी दी, उसे महंगे वस्त्र पहनाए, और उसके गले में सोने का हार डाला। उसने यूसुफ को अपने दूसरे रथ पर बैठाया, और लोगों ने उसके सामने घुटने टेके। फिरौन ने यूसुफ का नाम “सापनत-पानेअह” रखा, जिसका अर्थ है “जो छिपी हुई बातों को प्रकट करता है।” उसने यूसुफ को अस्नत नामक एक सुंदर स्त्री से विवाह कराया, जो एक महायाजक की पुत्री थी।

यूसुफ ने अपने पद का उपयोग बुद्धिमानी से किया। उसने सात वर्षों की प्रचुरता के दौरान मिस्र के हर शहर में अनाज के भंडार बनवाए। अनाज की मात्रा इतनी अधिक थी कि उसे मापना मुश्किल हो गया। जब अकाल के वर्ष आए, तो मिस्र के लोगों को भूखा नहीं रहना पड़ा। यूसुफ ने अनाज का वितरण किया, और आसपास के देशों के लोग भी मिस्र से अनाज खरीदने आए।

इस तरह, परमेश्वर ने यूसुफ के माध्यम से मिस्र और उसके आसपास के देशों को बचाया। यूसुफ की कहानी हमें सिखाती है कि परमेश्वर हर परिस्थिति में हमारे साथ रहते हैं और हमारे जीवन को एक उद्देश्य के लिए तैयार करते हैं। उनकी योजनाएं हमेशा हमारे कल्याण के लिए होती हैं, चाहे हमें उन्हें समझने में कितनी भी कठिनाई क्यों न हो।

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