पवित्र बाइबल

परमेश्वर की दया से संकटों से मुक्ति

एक समय की बात है, जब इस्राएल के लोग परमेश्वर की उपस्थिति और उनकी कृपा की तलाश में थे। वे दूर-दूर के देशों में बिखरे हुए थे, कुछ पूर्व में, कुछ पश्चिम में, कुछ उत्तर में और कुछ दक्षिण में। उनमें से कई लोग अपने पापों के कारण परमेश्वर से दूर हो गए थे और उनकी आत्माएं अंधकार में भटक रही थीं। वे भूखे-प्यासे थे, न केवल शारीरिक रूप से, बल्कि आत्मिक रूप से भी। उनका जीवन निराशा और अकेलेपन से भरा हुआ था।

एक दिन, जब उनकी पीड़ा चरम पर पहुंच गई, तो उन्होंने परमेश्वर को पुकारा। उनकी आवाज़ आकाश तक पहुंची, और परमेश्वर ने उनकी प्रार्थना सुनी। परमेश्वर ने उन्हें उनके संकट से बचाया और उन्हें सीधे रास्ते पर ले आया, ताकि वे एक सुरक्षित नगर में पहुंच सकें। उन्होंने परमेश्वर की दया और उनके अद्भुत कार्यों के लिए उनकी स्तुति की। क्योंकि परमेश्वर ने उनकी प्यासी आत्मा को तृप्त किया और उन्हें अच्छी चीजों से भर दिया।

कुछ लोग अंधेरे और मृत्यु की छाया में बैठे थे। वे अपने अवज्ञा और पाप के कारण बंधन में थे। उन्होंने परमेश्वर के वचनों को तुच्छ जाना था और उनकी सलाह को ठुकरा दिया था। इसलिए, उन्हें कष्ट और दुख झेलने पड़े। जब उनकी स्थिति असहनीय हो गई, तो उन्होंने परमेश्वर को पुकारा, और परमेश्वर ने उन्हें उनके संकट से बचाया। उन्होंने उन्हें अंधेरे और मृत्यु की छाया से निकालकर उनके बंधनों को तोड़ दिया। उन्होंने परमेश्वर की स्तुति की, क्योंकि उनकी दया अनंत है और उनके अद्भुत कार्य मनुष्यों के लिए हैं।

कुछ लोग मूर्खता के कारण बीमार हो गए थे। उन्होंने अपने पापों के कारण अपने शरीर को कष्ट दिया था। उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि वे मृत्यु के द्वार तक पहुंच गए। जब उन्होंने परमेश्वर को पुकारा, तो उन्होंने उनकी प्रार्थना सुनी और उन्हें चंगा किया। उन्होंने उन्हें मृत्यु के गड्ढे से बचाया और उन्हें नया जीवन दिया। उन्होंने परमेश्वर को धन्यवाद दिया और उनकी दया के गीत गाए।

कुछ लोग जहाज़ों पर सवार होकर समुद्र में यात्रा कर रहे थे। वे व्यापार करने और नए देशों की खोज में निकले थे। लेकिन समुद्र ने अपना रौद्र रूप दिखाया। तूफान उठ खड़ा हुआ, और लहरें आकाश तक पहुंचने लगीं। जहाज़ डगमगाने लगा, और यात्रियों का साहस टूट गया। वे घबरा गए और परमेश्वर को पुकारने लगे। परमेश्वर ने उनकी पुकार सुनी और तूफान को शांत कर दिया। लहरें थम गईं, और समुद्र शांत हो गया। यात्रियों ने परमेश्वर की स्तुति की, क्योंकि उन्होंने उन्हें संकट से बचाया था।

कुछ लोग बंजर भूमि में रहते थे, जहां पानी की एक बूंद भी नहीं थी। वे भूखे-प्यासे थे और उनका जीवन दुखों से भरा हुआ था। जब उन्होंने परमेश्वर को पुकारा, तो उन्होंने उनकी प्रार्थना सुनी। परमेश्वर ने बंजर भूमि को उपजाऊ बना दिया और वहां नदियां बहा दीं। उन्होंने उन्हें फलदार वृक्ष और हरे-भरे मैदान दिए। उन्होंने परमेश्वर की स्तुति की, क्योंकि उनकी दया अनंत है।

इस प्रकार, जो भी संकट में थे और परमेश्वर को पुकारते थे, उन्हें बचाया गया। परमेश्वर ने उन्हें उनके कष्टों से मुक्त किया और उन्हें नया जीवन दिया। उन्होंने परमेश्वर की स्तुति की और उनके अद्भुत कार्यों को याद किया। क्योंकि परमेश्वर की दया अनंत है, और उनकी करुणा कभी समाप्त नहीं होती। जो बुद्धिमान हैं, वे इन बातों पर ध्यान दें और परमेश्वर की दया को समझें।

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