पवित्र बाइबल

एलियाब की बुद्धिमानी और परमेश्वर की कृपा

एक समय की बात है, जब यरूशलेम के पास एक छोटे से गाँव में एक बुद्धिमान व्यक्ति रहता था। उसका नाम एलियाब था। वह अपने गाँव में सभी के लिए एक मार्गदर्शक और सलाहकार के रूप में जाना जाता था। एलियाब ने हमेशा परमेश्वर के वचन को अपने जीवन का आधार बनाया था, और वह नीतिवचन की बातों को गहराई से समझता था। उसका मानना था कि “राजा का मन नाले के जल के समान यहोवा के हाथ में रहता है; वह जिधर चाहता है उधर उसे मोड़ देता है” (नीतिवचन 21:1)।

एक दिन, गाँव के लोगों ने एक बड़ी समस्या का सामना किया। उनके गाँव के पास एक शक्तिशाली राजा का शासन था, जो अत्याचारी और निर्दयी था। वह गाँव वालों से अत्यधिक कर वसूलता था और उन्हें अपने नियमों के अनुसार जीने के लिए मजबूर करता था। गाँव के लोग परेशान और निराश थे। उन्हें लगता था कि उनकी आवाज कभी राजा तक नहीं पहुँचेगी।

एलियाब ने गाँव वालों को इकट्ठा किया और उनसे कहा, “भाइयों और बहनों, हमें यह समझना चाहिए कि परमेश्वर ही सभी राजाओं के हृदय को नियंत्रित करता है। यदि हम उस पर भरोसा रखें और उसकी इच्छा के अनुसार चलें, तो वह हमारी स्थिति को बदल सकता है।”

गाँव वालों ने एलियाब की बात मानी और उन्होंने एक साथ प्रार्थना करने का निर्णय लिया। वे हर रात इकट्ठा होते और परमेश्वर से प्रार्थना करते कि वह उनकी सुनें और उन्हें इस संकट से बचाएं।

कुछ समय बाद, एक अद्भुत घटना घटी। राजा का बेटा, जो उसका एकमात्र उत्तराधिकारी था, एक गंभीर बीमारी से पीड़ित हो गया। राजा के सभी वैद्य और ज्योतिषी उसे ठीक करने में असफल रहे। राजा बहुत चिंतित हो गया और उसने अपने राज्य के सभी बुद्धिमान लोगों को बुलाया, ताकि वे उसके बेटे के लिए कोई उपाय सुझा सकें।

एलियाब ने इस अवसर को परमेश्वर की इच्छा के रूप में देखा। वह राजा के दरबार में गया और उसने राजा से कहा, “हे महाराज, यदि आप अपने हृदय को परमेश्वर के सामने नम्र करें और उसकी इच्छा के अनुसार चलें, तो वह आपके बेटे को स्वस्थ कर सकता है।”

राजा ने पहले तो एलियाब की बात पर विश्वास नहीं किया, लेकिन जब उसने देखा कि उसके पास कोई और विकल्प नहीं है, तो उसने एलियाब की सलाह मानी। उसने परमेश्वर से प्रार्थना की और अपने जीवन में बदलाव लाने का वादा किया।

कुछ ही दिनों में, राजा का बेटा पूरी तरह से ठीक हो गया। राजा ने एलियाब को धन्यवाद दिया और उससे पूछा कि वह क्या चाहता है। एलियाब ने कहा, “महाराज, मैं केवल यह चाहता हूँ कि आप गाँव के लोगों पर से अत्यधिक कर हटा दें और उन्हें न्यायपूर्वक शासन करें।”

राजा ने एलियाब की बात मानी और उसने गाँव वालों के लिए नए नियम बनाए। उसने करों को कम किया और उन्हें स्वतंत्रता से जीने का अवसर दिया। गाँव के लोग खुशी से झूम उठे और उन्होंने परमेश्वर की स्तुति की।

एलियाब ने गाँव वालों को समझाया, “देखो, परमेश्वर की इच्छा के अनुसार चलने से क्या होता है। जब हम उस पर भरोसा रखते हैं और उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं, तो वह हमारे लिए रास्ते खोल देता है। ‘धर्म और न्याय करना बलिदान से यहोवा को अधिक प्रिय है’ (नीतिवचन 21:3)।”

गाँव वालों ने एलियाब की बात को गहराई से समझा और उन्होंने परमेश्वर के मार्ग पर चलने का निर्णय लिया। वे जान गए कि सच्ची बुद्धिमानी और सफलता केवल परमेश्वर के वचन में निहित है।

इस तरह, एलियाब और उसके गाँव के लोगों ने परमेश्वर की कृपा और न्याय का अनुभव किया, और वे हमेशा उसकी स्तुति करते रहे।

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