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यशायाह 34: परमेश्वर का न्याय और पवित्रता का संदेश

यशायाह 34 की कहानी हमें एक गहरी और प्रभावशाली दृष्टि प्रदान करती है, जो परमेश्वर के न्याय और उसकी प्रतिज्ञाओं को दर्शाती है। यह अध्याय एक ऐसे समय की ओर इशारा करता है जब परमेश्वर सभी राष्ट्रों और उनके नेताओं पर अपना न्याय लाएगा। यह कहानी न केवल विनाश का वर्णन करती है, बल्कि यह परमेश्वर की पवित्रता और उसकी सत्यनिष्ठा को भी प्रकट करती है।

एक समय की बात है, जब यशायाह नबी ने परमेश्वर के वचन को सुना। परमेश्वर ने उनसे कहा, “हे राष्ट्रों, सुनो! हे लोगों, ध्यान दो! पृथ्वी और उस पर के सब प्राणी, संसार और उससे उत्पन्न होने वाली सब वस्तुएँ सुनें। क्योंकि यहोवा का कोप सब जातियों पर भड़का हुआ है, और उसका क्रोध उनकी सारी सेना पर है। उसने उन्हें अर्पण कर दिया है, उसने उन्हें घात के लिये ठहरा दिया है।”

यशायाह ने देखा कि परमेश्वर का क्रोध आकाश को ढक लेगा और पृथ्वी काँप उठेगी। आकाश के तारे और नक्षत्र अपनी चमक खो देंगे, और सूर्य व चंद्रमा अंधकार में डूब जाएँगे। यह एक ऐसा समय होगा जब प्रकृति भी परमेश्वर के न्याय के सामने झुक जाएगी। यशायाह ने देखा कि परमेश्वर की तलवार आकाश से उतरेगी और उसका प्रकोप एदोम देश पर पड़ेगा, जो उसके लोगों के विरुद्ध खड़ा हुआ था।

एदोम देश, जो अपनी गर्व और अहंकार के लिए जाना जाता था, परमेश्वर के न्याय का प्रतीक बन गया। यशायाह ने देखा कि एदोम की धरती रक्त से लाल हो जाएगी, और उसकी मिट्टी चर्बी से सनी होगी। उसकी नदियाँ तेल की तरह बहेंगी, और उसकी धूल गंधक की तरह जल उठेगी। यह एक ऐसा दृश्य था जो विनाश और निराशा को दर्शाता था।

यशायाह ने देखा कि एदोम की धरती पर जंगली जानवरों का राज होगा। उसके महल और नगर खंडहर में बदल जाएँगे, और उनमें उल्लू और जंगली कुत्ते बसेंगे। बबूल के पेड़ और झाड़ियाँ उगेंगी, और वह स्थान अब मनुष्यों के लिए नहीं, बल्कि जंगली पशुओं के लिए होगा। यह एक ऐसा स्थान होगा जहाँ अंधकार और विनाश का साम्राज्य होगा।

यशायाह ने परमेश्वर के वचन को सुनकर लोगों से कहा, “परमेश्वर की पुस्तक को पढ़ो और उसके वचनों पर ध्यान दो। क्योंकि उसने यह सब कहा है, और उसकी आत्मा ने इसे इकट्ठा किया है। उसने उनके लिए भाग्य निर्धारित किया है, और उसकी आत्मा ने उन्हें इकट्ठा किया है। उसने उनके लिए माप और सीमा निर्धारित की है, और वे उसके हाथ में हैं।”

यशायाह की यह दृष्टि लोगों के लिए एक चेतावनी थी। यह उन्हें याद दिलाती थी कि परमेश्वर का न्याय निष्पक्ष और अटल है। उसकी पवित्रता और सत्यनिष्ठा कभी नहीं बदलती। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि परमेश्वर के वचन को गंभीरता से लेना चाहिए और उसकी आज्ञाओं का पालन करना चाहिए।

इस कहानी के माध्यम से, यशायाह ने लोगों को यह संदेश दिया कि परमेश्वर का न्याय सभी के लिए है, चाहे वह किसी भी राष्ट्र या जाति का हो। उसकी दया और कृपा उन पर है जो उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं, लेकिन उसका क्रोध उन पर है जो उसके मार्ग से भटक जाते हैं। यह कहानी हमें यह याद दिलाती है कि परमेश्वर की पवित्रता और न्याय हमेशा बना रहता है, और हमें उसके मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए।

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