यशायाह 2 के आधार पर एक विस्तृत और विवरणपूर्ण कहानी:
एक समय की बात है, जब यहूदा और यरूशलेम के लोग परमेश्वर के सामने अपने पापों में डूबे हुए थे। उन्होंने परमेश्वर की आज्ञाओं को भुला दिया था और मूर्तियों की पूजा करने लगे थे। उनके हृदय अहंकार और लालच से भर गए थे। वे धन और शक्ति के पीछे भाग रहे थे, और परमेश्वर के प्रति उनकी भक्ति ठंडी पड़ गई थी। ऐसे समय में, परमेश्वर ने यशायाह नबी को बुलाया और उन्हें एक दर्शन दिया।
यशायाह ने देखा कि अंत के दिनों में, परमेश्वर का पवित्र पर्वत सभी पहाड़ों से ऊँचा और स्थिर होगा। यह पर्वत सभी जातियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाएगा। बहुत से लोग उसकी ओर आएंगे और कहेंगे, “आओ, हम यहोवा के पर्वत पर चढ़ें, और याकूब के परमेश्वर के घर की ओर जाएं। वह हमें अपने मार्ग सिखाएगा, और हम उसके पथों पर चलेंगे।” क्योंकि सिय्योन से व्यवस्था और यरूशलेम से यहोवा का वचन निकलेगा।
यशायाह ने देखा कि परमेश्वर सभी राष्ट्रों के बीच न्याय करेगा और बहुत से लोगों के झगड़ों को सुलझाएगा। वे अपनी तलवारों को हल के फाल में और अपने भालों को कैंचियों में बदल देंगे। राष्ट्र फिर कभी युद्ध के लिए तलवार नहीं उठाएंगे, और न ही वे फिर कभी युद्ध की कला सीखेंगे। सभी लोग शांति और सद्भाव में रहेंगे, और परमेश्वर की महिमा सारी पृथ्वी पर छा जाएगी।
लेकिन यशायाह ने यह भी देखा कि यहूदा के लोगों के पापों के कारण, परमेश्वर का क्रोध उन पर भड़क उठा है। उन्होंने अपने हृदयों को कठोर कर लिया है और परमेश्वर की आज्ञाओं को नहीं मान रहे हैं। यशायाह ने चेतावनी दी कि यदि वे अपने पापों से नहीं फिरेंगे, तो परमेश्वर उन्हें दंड देगा। उनके घमंड और अहंकार के कारण, उनके सिर झुक जाएंगे, और उनकी शक्ति छिन जाएगी। परमेश्वर के भयानक दिन में, वे अपने सोने-चांदी के मूर्तियों को छोड़ देंगे और चट्टानों के नीचे छिप जाएंगे, क्योंकि यहोवा का भय उन पर छा जाएगा।
यशायाह ने लोगों से कहा, “हे यहूदा के लोगो, अपने पापों से फिरो और परमेश्वर की ओर लौटो। उसकी आज्ञाओं का पालन करो और उसके मार्ग पर चलो। यदि तुम ऐसा करोगे, तो परमेश्वर तुम्हें क्षमा करेगा और तुम्हें आशीष देगा। लेकिन यदि तुम नहीं मानोगे, तो तुम्हारा अंत निकट है।”
यशायाह के शब्दों ने कुछ लोगों के हृदयों को छू लिया, और वे परमेश्वर की ओर लौटने लगे। लेकिन अधिकांश लोगों ने उनकी चेतावनी को नज़रअंदाज़ कर दिया और अपने पापों में डूबे रहे। यशायाह ने देखा कि परमेश्वर का न्याय निकट है, और वह यहूदा और यरूशलेम को उनके पापों के लिए दंडित करेगा।
अंत में, यशायाह ने परमेश्वर की महिमा और उसकी दया के बारे में बताया। उन्होंने कहा, “परमेश्वर की महिमा सारी पृथ्वी पर छा जाएगी, और उसके राज्य में शांति और न्याय होगा। वह उन लोगों को आशीष देगा जो उसके मार्ग पर चलते हैं और उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं। इसलिए, हे लोगो, परमेश्वर की ओर लौटो और उसकी महिमा को देखो।”
यशायाह के शब्दों ने लोगों को परमेश्वर की ओर लौटने के लिए प्रेरित किया, और उन्होंने उसकी आज्ञाओं का पालन करना शुरू कर दिया। परमेश्वर ने उन्हें क्षमा किया और उन्हें आशीष दी। यशायाह का दर्शन सच हुआ, और परमेश्वर का राज्य स्थापित हुआ। सभी लोग शांति और सद्भाव में रहने लगे, और परमेश्वर की महिमा सारी पृथ्वी पर छा गई।