पवित्र बाइबल

दाऊद की विजय प्रार्थना

यहूदा के इतिहास में एक कठिन समय आया जब दाऊद राजा था। उन दिनों एदोमियों ने यहूदा की भूमि पर आक्रमण कर दिया और साल्ट वैली में एक भीषण युद्ध हुआ जहाँ यहूदा के बारह हज़ार सैनिक मारे गए। यह परमेश्वर का हाथ था जो उनके विरुद्ध उठा था, क्योंकि इस्राएल ने उसकी आज्ञाओं का उल्लंघन किया था।

दाऊद ने देखा कि परमेश्वर ने उन्हें तितर-बितर कर दिया है। उसने कहा, “हे परमेश्वर, तू ने हमें त्याग दिया है और हमें तोड़ डाला है। तू हम पर क्रोधित हुआ है, अब हमें फिर से स्थापित कर।”

तब दाऊद ने परमेश्वर से प्रार्थना की: “तू ने पृथ्वी को काँपने दिया और उसे फाड़ डाला। इसके मतभेदों को ठीक कर, क्योंकि वह डगमगा रही है। तू ने अपने लोगों को कठिनाई दिखाई है, हमें मदिरा पिलाई है जो चकरा देती है।”

दाऊद ने अपनी प्रार्थना जारी रखी: “तू ने उनके लिए एक झंडा दिया जो तुझ से डरते हैं, ताकि वह सत्य के कारण उठाया जाए। अपने दाहिने हाथ से हमें बचा, और हमें उत्तर दे ताकि तेरे प्रिय लोग छुटकारा पाएँ।”

तब परमेश्वर ने अपने पवित्र स्थान से उत्तर दिया: “मैं उल्लास से शकेम को विभाजित करूँगा और सुक्कोत की घाटी को नापूँगा। गिलाद मेरा है, मनश्शे भी मेरा है, एप्रैम मेरे सिर का रक्षक है, यहूदा मेरा राजदंड है। मोआब मेरा पखाला है, एदोम पर मैं अपना जूता फेंकूँगा, पलिश्तियों पर मैं जयध्वनि करूँगा।”

दाऊद ने परमेश्वर के वचनों को सुनकर फिर प्रश्न किया: “कौन मुझे दृढ़ नगर में ले जाएगा? कौन मुझे एदोम तक पहुँचाएगा? क्या तू ही नहीं है, हे परमेश्वर, जिसने हमें त्याग दिया? और हे परमेश्वर, तू हमारी सेनाओं के साथ नहीं निकलता?”

अंत में दाऊद ने विश्वास के साथ घोषणा की: “मनुष्य के द्वारा सहायता व्यर्थ है, परन्तु परमेश्वर के द्वारा हम पराक्रम करेंगे। वही हमारे विरोधियों को रौंदेगा।”

इस प्रकार दाऊद ने परमेश्वर में अपना विश्वास जताया और जान लिया कि विजय मनुष्यों के बल से नहीं, बल्कि परमेश्वर की सामर्थ्य से मिलती है। उसने एदोम के विरुद्ध युद्ध की तैयारी की, यह जानते हुए कि परमेश्वर ही उसे विजय दिलाएगा।

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