यह कहानी दानिय्येल अध्याय 8 के आधार पर विस्तृत रूप से प्रस्तुत की गई है:
शुसान नगर के राजभवन में दानिय्येल विचारमग्न बैठे थे। उसने देखा कि वह ऊलाई नदी के किनारे खड़ा है। आकाश में स्वर्णिम प्रकाश फैलते हुए एक अद्भुत दर्शन प्रकट हुआ। नदी के तट पर दो सिंहों के बीच एक सुनहरे रंग का मेढ़ा खड़ा था, जिसकी दो लंबी श्रृंगें थीं – एक दूसरी से ऊँची, परन्तु ऊँची श्रृंग बाद में उभरी थी।
अचानक पश्चिम दिशा से एक बकरा आया, जिसकी आँखों में आग सी चमक थी। उसके माथे पर एक विशाल श्रृंग थी जो सम्पूर्ण संसार को चुनौती देती प्रतीत होती थी। बकरे ने उग्र गति से धावा बोलकर उस मेढ़े पर प्रहार किया। उसने मेढ़े की दोनों श्रृंगों को तोड़ डाला और मेढ़ा भूमि पर गिर पड़ा। बकरा अत्यंत शक्तिशाली हो गया, किन्तु जब वह सबसे बलवान था, उसकी महान श्रृंग टूट गई और उसके स्थान पर चार नई श्रृंगें प्रकट हुईं जो आकाश की चारों दिशाओं की ओर फैलीं।
इन चार श्रृंगों में से एक से एक छोटी सी श्रृंग निकली जो अत्यंत भयानक रूप से बढ़ती गई। यह दक्षिण, पूर्व और शानदार देश की ओर फैलने लगी। यह स्वर्ग के सेना तक पहुँच गई और उसने तारों को भूमि पर गिरा दिया, उन पर पैर रखकर कुचल डाला। यह सैन्य बल के प्रधान के विरुद्ध खड़ी हुई, उसके नित्य नैवेद्य को बन्द कर दिया और उसके पवित्र स्थान को उजाड़ डाला।
दानिय्येल ने देखा कि पाप का बलिदान चढ़ाया जा रहा है और सत्य को भूमि पर फेंक दिया गया है। वह यह दृश्य देखकर विस्मित था कि तभी उसने दो पवित्र प्राणियों को बातचीत करते सुना। एक ने पूछा: “यह दर्शन कब तक पूरा होगा? नित्य नैवेद्य बन्द रहेगा और पाप का भयानक कार्य कब तक चलेगा?”
दूसरे ने उत्तर दिया: “दो हज़ार तीन सौ दिन-रात तक, तब पवित्र स्थान फिर से शुद्ध किया जाएगा।”
दानिय्येल इस दर्शन को समझने का प्रयास कर ही रहा था कि एक दिव्य स्वर उसके कानों में गूँजा: “हे दानिय्येल, इस दर्शन पर मनन कर, क्योंकि यह भविष्य के समय के विषय में है।”
उसी क्षण दानिय्येल मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़ा। कोमल हाथों ने उसे सहारा देकर उठाया। स्वर्गदूत गाब्रिएल उसके सामने खड़े थे, जिनके मुखमण्डल से दिव्य प्रकाश फूट रहा था। गाब्रिएल ने कहा: “हे मनुष्य के सन्तान, समझ ले कि यह दर्शन अन्त समय के विषय में है।”
जैसे ही गाब्रिएल बोले, दानिय्येल भय से काँप उठा और मुख के बल गिर पड़ा। गाब्रिएल ने उसे स्पर्श करके खड़ा किया और कहा: “सुन, मैं तुझे बताता हूँ कि क्रोध के अन्त में क्या होगा। वह मेढ़ा जिसे तूने देखा, वह मादी और फारस के राज्य हैं। रोम के राज्य का प्रतीक है वह बकरा, और उसकी महान श्रृंग उसका प्रथम राजा है।”
गाब्रिएल ने आगे समझाया: “वह चार श्रृंगें जो टूटी हुई श्रृंग के स्थान पर उठीं, वे चार राज्य हैं जो उस जाति में से उदय होंगे, परन्तु उनकी शक्ति उसके समान नहीं होगी। अन्त के समय में उनके राज्य में एक राजा उदय होगा जो अत्यंत कपटी और शक्तिशाली होगा। वह विद्वानों को नष्ट करेगा और सर्वोच्च के विरुद्ध दुष्ट कर्म करेगा। वह चतुराई से पाप फैलाएगा और स्वयं को महान समझेगा, किन्तु वह मानव हाथों के बिना ही नष्ट हो जाएगा।”
गाब्रिएल ने दानिय्येल से कहा: “दो हज़ार तीन सौ दिन-रात के दर्शन की बात सत्य है, परन्तु तू इस बात को गुप्त रख, क्योंकि यह अभी बहुत दिनों बाद पूरी होगी।”
यह कहकर गाब्रिएल अन्तर्ध्यान हो गए। दानिय्येल कई दिनों तक रोगग्रस्त रहा, इस दर्शन के भारी अर्थ को सहन नहीं कर पाया। वह हैरान और विस्मित था, किन्तु उसने इस दर्शन को अपने हृदय में सँजोकर रखा। उसने प्रभु की स्तुति की और उसकी महिमा के विषय में चिन्तन करता रहा, जानता हुआ कि परमेश्वर का हर वचन सत्य है और उसकी योजना अटल है।




