पवित्र बाइबल

आदम से नूह तक पीढ़ियों की गाथा

एक समय था जब धरती अब भी नई थी, और आदम की आत्मा की गूँज अब भी हवा में तैरती थी। उसकी आँखों में देखे गए स्वर्ग की स्मृति, उसकी हथेली पर महसूस किए गए ईश्वर के स्पर्श की अनुभूति, अब भी उसके वंशजों की नसों में धड़कती थी। आदम ने तीन सौ साल तक एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम उसने शेत रखा। वह बूढ़ा आदम, जिसकी दाढ़ी में बर्फ सी जम गई थी, ने अपने बेटे को देखा और कहा, “ईश्वर ने हेबल के स्थान पर एक और वंशज दिया है।” शेत की आँखों में वही चमक थी जो स्वर्ग के बाग़ की याद दिलाती थी।

शेत जवान हुआ। उसने धरती पर जौ और गेहूँ उगाए, और उसके हाथ मिट्टी से इस तरह जुड़े जैसे कोई प्रार्थना कर रहा हो। जब वह पाँच सौ पाँच साल का हुआ, तब उसके कई बेटे-बेटियाँ हुईं। पर उसकी आत्मा हमेशा उस पहले इंसान की ओर खिंची रहती, जो अब भी उसकी यादों में जीवित था। आदम नौ सौ तीस साल जीकर मर गया। उस दिन सूरज ऐसे डूबा जैसे संसार ने अपनी पहली सांस खो दी हो।

शेत का बेटा एनोश हुआ। वह दिन आया जब लोगों ने प्रभु का नाम लेना शुरू किया। एनोश वह था जिसने पहाड़ियों पर खड़े होकर ईश्वर से बातें कीं। उसकी आवाज़ हवा में मिलकर एक गीत बन गई, जो नदियों के किनारे-किनारे बहती रही। उसने नीले आकाश को देखा और कहा, “हे पिता, तेरा नाम पवित्र है।” उसने नौ सौ पाँच साल की उम्र में आँखें मूंदीं, पर उसकी प्रार्थनाएँ बादलों में छिपी रहीं।

कैनान आया, एनोश का बेटा। उसने पहली बार लकड़ी के फ्रेम पर चमड़ा तानकर तंबू बनाए। उसकी उँगलियाँ कठोर हो गईं, पर उसका दिल नरम बना रहा। वह रात को आग के चारों ओर बैठकर बच्चों को कहानियाँ सुनाता – आदम की कहानी, हव्वा की मुस्कान, और वह बाग़ जहाँ से सब शुरू हुआ। उसने नौ सौ दस वर्षों तक धरती पर चलना सीखा, और अंत में वह उसी धरती में समा गया।

महलललएल ने कैनान की आँखों देखी कहानियों को सुना। वह एक शांत व्यक्ति था, जो भेड़-बकरियाँ चराता और चाँदनी रातों में तारों को गिनता। उसने पहाड़ों के पत्थरों पर निशान बनाए, मानो ईश्वर के हाथों के छूए हुए स्थानों को याद कर रहा हो। उसकी सांसें आठ सौ पचानवे वर्षों तक चलीं, और जब वह चला गया, तो रात के आकाश में एक नया तारा टिमटिमाया।

यारेद का जन्म हुआ। वह सबसे लंबे समय तक जीने वालों में से एक था – नौ सौ बासठ वर्ष। उसने नदियों के रास्ते बदलते देखे, पहाड़ों के ऊपर बर्फ की सफेद चादरें बिछते देखीं। उसके बेटे-बेटियाँ उसके चरणों में बैठकर सुनतीं कि कैसे संसार बदल रहा है, कैसे मनुष्यों के हृदय में अहंकार की जड़ें फैल रही हैं। यारेद की आँखों में एक उदासी थी, मानो वह भविष्य के तूफान को देख रहा हो।

और फिर हनोक आया।

हनोक यारेद का बेटा था, पर वह औरों से अलग था। उसकी चाल में एक हल्कापन था, उसकी बातों में एक गहराई। वह घंटों जंगल में अकेले टहलता, पेड़ों की पत्तियों के बीच से छनती रोशनी को देखता। एक दिन, जब वह पहाड़ी पर प्रार्थना कर रहा था, बादल फटे और एक दिव्य प्रकाश उतरा। हनोक ने आँखें झपकाईं भी नहीं। वह पैंसठ वर्ष का था जब उसने मतूशलाह को जन्म दिया, पर उसका हृदय तो हमेशा से ही ईश्वर के निकट रहा।

हनोक तीन सौ पैंसठ वर्ष तक ईश्वर के साथ चलता रहा। वह लोगों से कहता, “मन फिराओ, क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट है।” कुछ उस पर हँसते, कुछ उसकी बातों को सुनकर रो पड़ते। एक सुबह, जब सूरज की किरणें अभी पहाड़ों की चोटियों को चूम रही थीं, हनोक गायब हो गया। ईश्वर ने उसे उठा लिया। लोगों ने कहा, वह इतना पवित्र था कि मृत्यु ने उसे छुआ तक नहीं।

मतूशलाह आया, इतिहास में सबसे लंबी आयु वाला व्यक्ति। उसने हनोक के विषय में सुना, पर वह स्वयं एक साधारण मनुष्य था। उसने नब्बे वर्ष की उम्र में लेमेक को जन्म दिया। मतूशलाह की आँखें समय की गहराइयों में झाँकती रहीं। उसने नौ सौ उनहत्तर वर्षों तक इस धरती पर रहकर देखा कि कैसे मनुष्य का हृदय दिनोंदिन कठोर होता जा रहा है। जब वह मरा, तो आकाश में बादल गरजे मानो स्वयं प्रकृति विलाप कर रही हो।

लेमेक, मतूशलाह का बेटा, एक सौ बयासी वर्ष तक जीवित रहा। उसने नूह को जन्म दिया। लेमेक ने अपने बेटे को देखते ही कहा, “यह हमें भूमि के उस श्राप से विश्राम दिलाएगा।” नूह की आँखों में एक अलग ही चमक थी, मानो वह भविष्य के जलप्रलय को जानता हो।

और इस तरह, आदम से लेकर नूह तक, यह वंशावली चलती रही। हर पीढ़ी के साथ एक नई आशा, एक नया दर्द, एक नई याद। वे सब धरती की मिट्टी में मिल गए, पर उनकी कहानियाँ हवा में रच-बस गईं। जब नूह बूढ़ा हुआ, तो वह अक्सर शाम को बैठकर उन पुरखों के बारे में सोचता, जिन्होंने इस संसार को बनते-बिगड़ते देखा था। और वह जानता था कि अब एक नई शुरुआत होने वाली है।

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