उन दिनों में इज़राइल का कोई राजा नहीं था। दान के गोत्र के लोग अपनी विरासत की खोज में थे, क्योंकि उन्हें अभी तक इज़राइल के अन्य गोत्रों के बीच अपना निजी भूभाग नहीं मिला था।
एक साँझ की बात है, जब सूरज पश्चिम की पहाड़ियों के पीछे डूब रहा था और लंबी-लंबी परछाइयाँ जमीन पर फैल रही थीं, तब जोरा के पास एफ्रैम के पहाड़ी इलाके में मीका नाम का एक आदमी बैठा हुआ था। उसने अपने घर में एक मूर्तिस्थल बना रखा था, जहाँ एक एफोद और कुछ घरेलू देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित थीं। उसने अपने एक बेटे को याजक बना दिया था, परन्तु उसके मन में एक अधूरापन सा था।
एक दिन, दान के गोत्र के पाँच व्यक्ति, जो अपने कुल के सबसे बहादुर योद्धाओं में से थे, जासूसी के लिए निकले। वे एफ्रैम के पहाड़ी इलाके में आए और मीका के घर के पास पहुँचे। उनकी नज़र उस अजनबी युवक पर पड़ी जो वहाँ रह रहा था। वह युवक एक लेवी था, जो यहूदा के बेतलेहेम शहर से आया था और अपने लिए एक ठिकाना ढूँढ रहा था।
वे जासूस उससे बोले, “तुम यहाँ क्या कर रहे हो? यह स्थान किसका है?”
लेवी युवक ने उत्तर दिया, “मीका ने मुझे रख लिया है। मैं उसका याजक बन गया हूँ। वह मुझे प्रतिवर्ष दस चाँदी के सिक्के और कपड़े देता है, साथ ही भोजन भी मुहैया कराता है।”
जासूसों ने एक दूसरे की ओर देखा। उनमें से एक ने कहा, “इस मूर्तिस्थल के बारे में परमेश्वर से पूछो। क्या हमारी यह यात्रा सफल होगी?”
लेवी युवक ने उन्हें आश्वासन दिया, “शांति से जाओ। तुम्हारा मार्ग परमेश्वर की दृष्टि में है।”
पाँचों जासूस आगे बढ़े। उन्होंने लाश शहर के लोगों को देखा। वे लोग निश्चिंत थे, जैसे दुनिया की कोई चिंता ही नहीं। उनकी कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी, न ही वे किसी से डरते थे। वह भूमि उर्वर थी, जहाँ कुछ भी उगाया जा सकता था।
वे जासूस वापस अपने लोगों के पास लौटे। जब वे जोरा और एशताओल पहुँचे, तो उनके साथी उनसे मिलने आए। जासूसों ने कहा, “उठो! हमें उस भूमि पर चढ़ाई करनी चाहिए। हमने उसे अपनी आँखों से देखा है—वह अत्यंत उत्तम है। फिर भी तुम लोग चुप क्यों बैठे हो? जल्दी करो और उस देश पर अधिकार कर लो। वहाँ के लोग बिलकुल निश्चिंत हैं, और भूमि विस्तृत है। परमेश्वर ने उसे तुम्हारे हाथ में दे दिया है।”
यह सुनकर दान के गोत्र के छः सौ पुरुष हथियारबंद होकर चल पड़े। वे यहूदा के किर्यत-यारीम के पास डेरा डालकर रुके। इसी कारण उस स्थान का नाम आज तक महने-दान पड़ा है।
वहाँ से वे आगे बढ़े और एफ्रैम के पहाड़ी इलाके में मीका के घर पहुँचे। पाँच जासूसों ने अपने साथियों से कहा, “क्या तुम जानते हो कि इस घर में एक एफोद, कुछ घरेलू देवताओं की मूर्तियाँ और एक ढली हुई मूर्ति है? अब सोचो कि तुम्हें क्या करना चाहिए।”
छः सौ पुरुषों ने मीका के घर के सामने खड़े होकर लेवी युवक से बात की। वे घर के द्वार पर ही खड़े रहे। उन पाँचों ने वे मूर्तियाँ, एफोद और घरेलू देवताओं की मूर्तियाँ निकाल लीं। याजक ने उनसे पूछा, “तुम लोग क्या कर रहे हो?”
उन्होंने उससे कहा, “चुप रहो। हमारे साथ चलो और हमारे लिए पिता और याजक बनो। क्या तुम्हारे लिए एक गोत्र का याजक बनना बेहतर नहीं है, बजाय एक ही व्यक्ति के याजक रहने के?”
याजक का मन खुश हुआ। उसने एफोद और घरेलू देवताओं की मूर्तियाँ ले लीं और उन लोगों के बीच चला गया।
मीका ने देखा कि उसके देवता और याजक दोनों चले गए हैं। वह अपने पड़ोसियों को इकट्ठा करके उनका पीछा करने लगा। जब उसने दान के लोगों को पकड़ लिया, तो वे उससे बोले, “तुम्हें क्या हुआ है? तुम इतने लोगों को साथ लेकर क्यों आए हो?”
मीका ने कहा, “तुमने मेरे बनाए देवताओं और मेरे याजक को ले लिया है। फिर भी तुम पूछते हो कि मैं क्यों आया हूँ?”
दान के लोगों ने उसे धमकी दी, “अपनी आवाज़ हमारे सामने मत उठाओ, नहीं तो कुछ गुस्सैल लोग तुम पर टूट पड़ेंगे और तुम अपनी जान से हाथ धो बैठोगे।”
मीका ने देखा कि वे उससे अधिक शक्तिशाली हैं, इसलिए वह वापस अपने घर लौट गया।
दान के लोग अपने साथ मूर्तियों और याजक को लेकर आगे बढ़े। उन्होंने लाश पर आक्रमण किया, जहाँ के लोग शांति और निश्चिंतता में जी रहे थे। उन्होंने नगर को तलवार के घाट उतार दिया और उसे आग के हवाले कर दिया। कोई भी उनकी सहायता के लिए नहीं आया, क्योंकि लाश सीदोन से दूर था और उसका किसी से कोई संबंध नहीं था।
फिर दान के लोगों ने नगर को फिर से बसाया और उसका नाम दान रखा। उन्होंने मीका की बनाई मूर्तियों की स्थापना की और याजक के रूप में उस लेवी युवक को नियुक्त किया। वह युवक और उसके बाद उसके पुत्र, दान के गोत्र के याजक बने रहे, जब तक कि देशवासियों का बंधुवाई में निर्वासन नहीं हो गया।
इस प्रकार मीका का मूर्तिस्थल और उसके देवता दान के गोत्र के साथ रहे, और वह स्थान उनकी उपासना का केंद्र बना रहा। परन्तु यह सब उस समय हुआ जब इज़राइल में कोई राजा नहीं था, और हर व्यक्ति अपनी ही दृष्टि में ठीक काम कर रहा था।




