पवित्र बाइबल

यहेजकेल की अराव पर्वत भविष्यवाणी

एक समय की बात है, जब परमेश्वर का वचन यहेजकेल नबी पर आया। वह दिन ठीक वैसा ही था जैसे अराव पर्वत के दिन हुआ करते थे – हवा में रेत की महीन परत, सूरज की किरणें पहाड़ों की चट्टानों पर पड़कर लाल सोने जैसी चमकती थीं, और दूर-दूर तक फैली वीरान घाटियाँ जहाँ बस कंटीली झाड़ियाँ ही हिलती दिखती थीं।

अराव पर्वत, जिसे सेईर भी कहते थे, सदियों से एदोमियों का घर था। ये लोग याकूब की संतान से बैर रखते थे, उस पुराने द्वेष को पालते थे जब एसाव ने अपना जन्मसिद्ध अधिकार याकूब के हाथों गँवा दिया था। पहाड़ों की गुफाओं में बैठकर योजनाएँ बनतीं, कब और कैसे इस्राएल पर प्रहार किया जाए।

उस दिन यहेजकेल को स्पष्ट सुनाई दिया – “मनुष्य के सन्तान, अराव पर्वत की ओर अपना मुँह करके उसके विरुद्ध भविष्यद्वाणी कर। कह, परमेश्वर यहोवा यों कहता है – देख, मैं तेरे विरुद्ध हूँ, हे अराव पर्वत! मैं अपना हाथ तेरे ऊपर बढ़ाऊँगा, और तुझे सुनसान और उजाड़ बना दूंगा।”

यहेजकेल की आवाज़ में एक गहरी उदासी थी, मानो वह स्वयं इस न्याय से दुखी हो। उसने देखा कि कैसे एदोम ने इस्राएल और यहूदा के संकट के दिनों में उनके विरुद्ध षड्यंत्र रचे थे। जब बाबेल की सेनाएँ यरूशलेम को घेर रही थीं, तब एदोम ने खुशी मनाई थी, कहा था – “देखो, ये दोनों राष्ट्र, ये दोनों देश अब हमारे होंगे। हम उनपर अधिकार कर लेंगे।”

परमेश्वर की आवाज़ गर्जने लगी – “जैसे तूने उनके विनाश पर हर्ष मनाया, जब सारी पृथ्वी उनसे छिन गई, वैसे ही मैं तुझसे व्यवहार करूँगा। हे अराव पर्वत, तू और एदोम के सारे देश सदा के लिए उजाड़ दिए जाएँगे। तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूँ।”

यहेजकेल ने अपनी आँखों में एक दृष्टि देखी – अराव के पहाड़ों से धुआँ उठ रहा था, वे चटखने और भुरभुराने की आवाजें आ रही थीं। जहाँ कभी एदोम के गर्वित महल खड़े थे, अब केवल उनकी नींव के पत्थर बिखरे पड़े थे। बाज जहाँ उड़ते थे, अब वहाँ सन्नाटा था। रेगिस्तान की हवाएँ उन खंडहरों के बीच सिसकियाँ भरती हुई गुजरतीं, मानो स्वयं सृष्टि इस न्याय पर विलाप कर रही हो।

एदोम का पाप केवल सीमा विवाद नहीं था, वह हृदय की गहरी कटुता थी। पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा वह विष जो भाईचारे को निगल गया। परमेश्वर ने स्पष्ट किया – “क्योंकि तूने पुराने बैर के कारण इस्राएल के पुत्रों को तलवार के घाट उतरवाने में हाथ बँटाया, जब वे संकट में थे, जब उनका अन्तिम समय आया था…”

यहेजकेल ने महसूस किया कि परमेश्वर का क्रोध निर्मम नहीं बल्कि न्यायपूर्ण था। यह उस सिद्धांत का प्रकटीकरण था कि जैसा बोओगे वैसा ही काटोगे। एदोम ने विनाश बोया था, अब विनाश ही उसकी फसल होगी।

भविष्यद्वाणी की अंतिम पंक्तियाँ यहेजकेल के होंठों पर काँप रही थीं – “जब मैं तुझे न्यच्छावर कर दूँगा, तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूँ। क्योंकि तूने कहा था कि ये दोनों देश, ये दोनों जातियाँ मेरी होंगी, और हम उनपर अधिकार कर लेंगे, हालाँकि यहोवा वहाँ था…”

उस रात यहेजकेल ने देखा कि चाँदनी में अराव के पहाड़ मानो रो रहे थे। वह जानता था कि परमेश्वर का न्याय कभी निरर्थक नहीं होता। हर चीज का एक समय होता है – प्रेम का भी, और न्याय का भी। और कभी-कभी न्याय ही सबसे बड़ा प्रेम होता है, जब वह दूसरों को उसी की राह पर चलने से रोकता है जिस राह पर चलकर एदोम नाश हुआ।

आज भी जब कोई यात्री अराव के उजड़े पहाड़ों से गुजरता है, तो पत्थरों के बीच उगी कंटीली झाड़ियाँ हवा में सरसराती हैं, मानो याद दिला रही हों कि घृणा की फसल हमेशा वीरान ही होती है, जबकि प्रेम की जड़ें अनंत काल तक हरियाली फैलाती रहती हैं।

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