पवित्र बाइबल

पतरस का दर्शन और अन्यजातियों का बपतिस्मा

यरूशलेम की गलियों में धूप की किरणें पत्थरों पर नाच रही थीं। पतरस शहर के उस हिस्से में लौट आया था जहाँ हवा में हमेशा नमक और जलाई हुई लकड़ी की महक तैरती रहती थी। वह सीधे चलकर एक ऊँचे मकान में पहुँचा जहाँ कुछ विश्वासी इकट्ठा हुए थे। उनकी आँखों में सवाल थे – वे सुन चुके थे कि पतरस ने ख़तनारहित लोगों के साथ भोजन किया है।

पतरस ने अपनी आँखें बंद कीं और उस दृश्य को फिर से जीया। “मैं याफा में था,” उसने शुरू किया, “और प्रार्थना कर रहा था। तभी मैंने एक दर्शन देखा… जैसे कोई बड़ा चादर चारों कोनों से बंधी हुई आकाश से उतर रही हो।”

उसने विस्तार से बताया कि कैसे उस चादर में हर तरह के जानवर थे – वे जिन्हें हमारे कानून के मुताबिक़ अशुद्ध माना जाता है। और फिर एक आवाज़ आई – “पतरस, उठ और भोजन कर।”

पतरस की आवाज़ भावनाओं से भर गई जब उसने याद किया कि कैसे उसने जवाब दिया था – “परमप्रभु, कभी नहीं! मैंने कभी कोई अशुद्ध वस्तु नहीं खाई।”

“लेकिन आवाज़ दूसरी बार आई,” पतरस ने कहा, “जो परमेश्वर ने शुद्ध ठहराया है, उसे तू अशुद्ध न कह।”

यह बात तीन बार हुई। पतरस ने अपने श्रोताओं की ओर देखा। उनके चेहरों पर हैरानी थी, कुछ में संदेह भी। “उसी क्षण,” पतरस ने जारी रखा, “कैसरिया से भेजे गए तीन व्यक्ति उस घर के द्वार पर आ खड़े हुए जहाँ मैं ठहरा हुआ था।”

उसने बताया कि कैसे पवित्र आत्मा ने उसे आदेश दिया कि वह बिना किसी संदेह के उनके साथ चले। अगले दिन वह उनके साथ चला, और कुछ भाइयों को भी साथ लिया।

“जब हम कैसरिया पहुँचे,” पतरस ने कहा, “तो कुरनेलियुस ने हमें अपने घर में लिया। वह एक सौ सिपाहियों का अधिकारी था, धर्मी और परमेश्वर से डरने वाला।”

पतरस ने उस घर का वर्णन किया – रोमन शैली की वास्तुकला, लेकिन उसमें यहूदी प्रार्थना की सुगंध थी। कुरनेलियुस ने बताया कि कैसे उसे एक दर्शन में एक स्वर्गदूत दिखाई दिया था जिसने उसे पतरस को बुलाने के लिए कहा था।

“तब मुझे याद आया प्रभु का वचन,” पतरस ने कहा, “कि यूहन्ना ने पानी से बपतिस्मा दिया, परन्तु तुम पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाओगे।”

उसने बताया कि कैसे वह उन सब के सामने यीशु मसीह के बारे में प्रचार करने लगा – कैसे परमेश्वर ने पवित्र आत्मा और सामर्थ्य से उसे अभिषेक किया, कैसे वह भलाई करता और शैतान के अधीन सभी को छुड़ाता फिरा।

“और जब मैं बोल ही रहा था,” पतरस की आवाज़ में विस्मय घुल गया, “पवित्र आत्मा उन सब पर उतर आया जो वचन सुन रहे थे।”

उसने उस क्षण का वर्णन किया – कैसे those gentiles ने भी वही भाषाएँ बोलना शुरू कर दिया जैसे पेंतिकोस्त के दिन विश्वासियों ने बोली थीं। “यह ठीक वैसा ही था जैसा हम पर हुआ था,” पतरस ने कहा।

फिर पतरस ने वह महत्वपूर्ण क्षण याद किया जब उसने कहा – “क्या कोई इन्हें पानी से बपतिस्मा देने से रोक सकता है, जिन्होंने हमारी तरह ही पवित्र आत्मा पा लिया है?”

सभा में सन्नाटा छा गया। पतरस ने अंत में कहा, “तब मैंने उन्हें प्रभु यीशु मसीह के नाम पर बपतिस्मा दिया। परमेश्वर ने उन्हें वही उपहार दिया जो हमें दिया था। मैं कौन होता हूँ जो परमेश्वर को रोकूँ?”

एक पल की खामोशी के बाद, सभा में फुसफुसाहट शुरू हो गई। फिर एक बुजुर्ग उठा और बोला, “तो फिर परमेश्वर ने अन्यजातियों को भी मन फिराव का वरदान दिया है।”

धीरे-धीरे, उनके चेहरों पर हैरानी की जगह स्वीकृति आने लगी। कुछ ने सिर हिलाया, कुछ की आँखों में आँसू थे। उस दिन यरूशलेम की उस सभा ने महसूस किया कि परमेश्वर का प्रेम सभी मनुष्यों के लिए है – न केवल यहूदियों के लिए, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए जो उस पर विश्वास करता है।

पतरस खिड़की के पास खड़ा हो गया। नीचे गली में बच्चे खेल रहे थे – यहूदी और अन्यजाति, सभी एक साथ। उसने मुस्कुराते हुए सोचा – शायद यही है परमेश्वर का राज, जहाँ सभी भेद मिट जाते हैं।

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