महीना: नवम्बर 2025

प्रेम की अनंत प्रतीक्षा

शाम का सूरज ढलते ही जैसे पूरा महल सोने की लिबास में लिपट गया। दूर बाग़ में खिले चमेली के फूलों की खुशबू हवा में तैर रही थी, पर शुलमीथ का दिल बैठा जा रहा था। वह खिड़की के पास…

शांति का मार्गदर्शक

बूढ़े इलियाह की झोंपड़ी में चूल्हा ठंडा पड़ा था। सुबह की पहली किरण ने उसके चेहरे पर सोने की लकीरें खींच दीं, पर उसकी आँखों में एक अजीब सी शांति थी। बाहर बरगद के पेड़ के नीचे उसका पोता दानिय्येल…

सच्ची आराधना का प्रकाश

आज सुबह से ही आसमान में बादल छाए हुए थे। पुराने ज़माने के उस गाँव की गलियों में धूप की एक किरण भी नहीं आ रही थी। गोपाल अपनी झोपड़ी के सामने बैठा हुए था, और उसकी आँखें दूर पहाड़ों…

प्रकाश का आध्यात्मिक जागरण

वह सुबह धुंधली थी। पुरानी लकड़ी की चौखट पर बैठे प्रकाश की आँखों में नमी थी। बरसों पहले बनी इस झोंपड़ी की दीवारों पर समय की धूल जम चुकी थी, पर आज सुबह-सुबह ही उसके मन में एक अजीब सी…

आत्मिक तूफान से शांति

वह सुबह ठंडी थी, पर सूरज की किरणें खिड़की के शीशे से टकराकर कमरे में बिखर रही थीं। दाऊद अपनी कुर्सी पर बैठा खिड़की के बाहर देख रहा था। बाग़ में सेब के पेड़ लदे हुए थे, पक्षी डालियों पर…

अय्यूब का अटूट विश्वास

आज सूरज डूबते ही मेरी साँसें भी मानो थम सी गईं। हवा में लटकता धुँधलका मेरे कमरे के कोनों में समा गया है, पर मेरी आँखों के सामने तो अँधेरा बस पिछले कई महीनों से ही पसरा हुआ है। मेरे…

दाऊद और अम्मोनियों का युद्ध

वह दिन ठंडी हवा के झोंकों के साथ शुरू हुआ था। राजा दाऊद की राजधानी में सुबह की रोशनी पहाड़ियों पर सोने जैसी चमक बिखेर रही थी। महल के अहाते में एक दूत सांस उखाड़ता हुआ दौड़ा आया। उसकी आँखों…

सुलैमान का न्याय और राज्य स्थापना

सुलैमान के राज्याभिषेक के बाद का समय था। दाऊद बूढ़ा हो चला था, उसकी आँखों में अब वह चमक नहीं रही थी जो एक समय गोलियत का सामना करते समय दिखाई देती थी। महल के भीतर की हवा में मृत्यु…

दान गोत्र की विजय यात्रा

उन दिनों में इज़राइल का कोई राजा नहीं था। दान के गोत्र के लोग अपनी विरासत की खोज में थे, क्योंकि उन्हें अभी तक इज़राइल के अन्य गोत्रों के बीच अपना निजी भूभाग नहीं मिला था। एक साँझ की बात…

मूर्ति विध्वंस और एकता का सफर

वह दिन ठंडी हवा के झोंकों के साथ शुरू हुआ। मोशे की आवाज़ चट्टानी पहाड़ियों से टकराकर गूँज रही थी, मानो स्वयं पर्वत उसकी बातों को दोहरा रहे हों। भीड़ में खड़ा यहोशू अपने पिता नून की पीठ थपथपा रहा…