पवित्र बाइबल

रेहोबोआम का अहंकार और प्रभु की सीख

उन दिनों की बात है जब रेहोबोआम का राज्य दृढ़ हो चुका था और वह प्रबल हुआ, तो उसने यहोवा की व्यवस्था को छोड़ दिया, और सारे इस्राएल के साथ-साथ वह भी करने लगा जो यहोवा की दृष्टि में बुरा था। यरूशलेम में बैठे-बैठे उसे लगता, देखो, सुलैमान के बाद अब मेरा नाम है, मेरी शान है। राजमहल के ऊँचे कक्ष से वह नगर को निहारता, और उसकी आँखों में एक अजीब-सा अहंकार झलकता। उसने सेना बढ़ाई, दुर्ग बनवाए, पर उसके मन की दीवारें टूट चुकी थीं—वह विनम्रता भूल गया था।

चौथे वर्ष, बसंत ढलते-ढलते, एक खबर आई। मिस्र का राजा शीशक, जिसके बारे में सुनते ही पुराने लोग काँप उठते, वह अपनी सेना लेकर चढ़ आया है। उसके साथ थे बारह सौ रथ, और साठ हज़ार घुड़सवार, और लुबियों, सुक्कियों और कूशियों की ऐसी भीड़ जिसका हिसाब नहीं। वे यहूदा के कस्बों की ओर बढ़ रहे थे, धूल का बादल उनके पीछे उठ रहा था। यरूशलेम में हड़कंप मच गया। लोगों की आँखों में वही पुराना डर लौट आया—क्या फिर गुलामी के दिन आएँगे?

रेहोबोआम महल में इधर-उधर टहल रहा था। उसके मन में एक खालीपन था, जैसे कोई कुएँ में पत्थर फेंके और कोई आवाज़ न आए। तभी भविष्यवक्ता शमायाह उसके सामने आया। वह बूढ़ा हो चुका था, पर आवाज़ में वही पुरानी सच्चाई काँप रही थी। उसने कहा, “यहोवा यह कहता है: तुमने मुझे छोड़ दिया है, इसलिए मैंने भी तुम्हें शीशक के हाथ में छोड़ दिया है।”

ये शब्द राजा के कानों में ऐसे पड़े जैसे कोई पहाड़ टूट कर गिरा हो। वह और उसके सरदार—जो अभी तक अपनी शक्ति पर इतरा रहे थे—एकदम नम्र हो गए। वे सब एकत्र हुए, और शमायाह के शब्दों ने उनके अहंकार को धूल चटा दी। उन्होंने कहा, “यहोवा धर्मी है।” यह कहना आसान नहीं था, पर उनके मुँह से निकल गया।

तब यहोवा ने शमायाह के द्वारा कहलवाया, “चूँकि तुम नम्र हुए हो, मैं तुम्हें एक बार बचा लूँगा। पर न्याय होकर रहेगा—शीशक यरूशलेम पर अधिकार करेगा, और मेरे घर और राजभवन के सारे खजाने लूट ले जाएगा। तुम उसकी सेवा करोगे, ताकि तुम जान सको कि मेरी सेवा करना और दुनिया की सेवा करना—इनमें क्या फर्क है।”

और हुआ भी वही। शीशक यरूशलेम में घुस आया। उसकी सेना ने सुलैमान के जमा किए हुए सोने के ढालों को, जिन पर चिड़ियाघर के जानवरों की नक्काशी थी, राजभवन से उखाड़ लिया। मन्दिर के भीतर का सोना, बहुमूल्य पत्थर, वे सब उसने ले लिए। रेहोबोआम ने देखा, और उसका दिल टूट गया। उसने ताँबे की ढालें बनवाईं, और अपने अंगरक्षकों को वही सौंपी। हर बार जब राजा मन्दिर जाता, तो ये ढाले चमकतीं, पर उनकी चमक में वह गुज़रा हुआ वैभव झलकता—एक सबक की तरह।

उसके बाद के दिनों में रेहोबोआम सावधान रहा। उसने अपने किए की पीड़ा को महसूस किया। वह समझ गया कि राज्य की असली मजबूती सेनाओं में नहीं, विनम्रता में है। पर कभी-कभी रात को जब वह अकेला होता, तो उसे सोने की ढालों की याद आती—वे नहीं थीं, सिर्फ ताँबे की ढालें थीं जो समय के साथ कुछ मटमैली पड़ती जा रही थीं। और वह सोचता, शायद यही परमेश्वर की दया है—कुछ छीन लिया, पर कुछ बचा भी लिया। जीवन रह गया, सबक मिल गया, और शायद अगला मोड़ थोड़ा बेहतर हो।

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