अटल विश्वास: कुम्हार और पहाड़
यरूशलेम के पास एक छोटा-सा गाँव था, जो जैतून के पेड़ों की ढलानों से घिरा हुआ था। उस गाँव में एक कुम्हार रहता था, एलियाब नाम का। उसके हाथ मिट्टी से सने रहते, पर उसका मन हमेशा उन पहाड़ों की…
यहोवा की गर्जना
आकाश उस दिन ताँबे जैसा लग रहा था। सारा दिन हवा चलती रही थी, पर अब वह रुक गई थी, मानो साँस रोके कोई बड़ी बात सुनने को बैठा हो। हम लोग, कुछ चरवाहे, पहाड़ी की तलहटी में अपने झुंड…
परमेश्वर के प्रश्न और अय्यूब का मौन
(यह कहानी अय्यूब 39 के आधार पर रची गई है) अय्यूब चीथड़े बने अपने वस्त्रों में बैठा था। उसका शरीर विशाल फोड़ों से आच्छादित था, मन वेदना और प्रश्नों से। तभी आँधी का स्वर उठा। वह स्वर हवा से भी…
रेहोबोआम का अहंकार और प्रभु की सीख
उन दिनों की बात है जब रेहोबोआम का राज्य दृढ़ हो चुका था और वह प्रबल हुआ, तो उसने यहोवा की व्यवस्था को छोड़ दिया, और सारे इस्राएल के साथ-साथ वह भी करने लगा जो यहोवा की दृष्टि में बुरा…
वंशों की ज्योति: यादों का दीपक
येरुशलेम की दीवारों पर सूरज की पहली किरणें पड़ रही थीं। हवा में ठंडक थी, और शहर अभी पूरी तरह नहीं जागा था। मत्तन्याह, जो लेवीयों में से था, अपने छोटे से घर के द्वार पर बैठा हुआ था। उसकी…
श्राप और निष्ठा के बीच राजा दाऊद
(यह कहानी 2 शमूएल अध्याय 16 की घटनाओं पर आधारित है, जिसे एक साहित्यिक वर्णनात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है।) धूप तेज थी, और जंगल के रास्ते की धूल दाऊद के जूतों में समा रही थी। यरूशलेम छूटे अब…
पतमुस पर प्रभु का दर्शन
पतमुस का वह तट, जहाँ लहरें चट्टानों से टकराकर ऐसी आवाज़ करतीं मानो कोई अनन्त काल से फुसफुसा रहा हो। हवा में नमक का तीखापन और एक अजीब सी शान्ति, जो अकेलेपन से भरी हुई थी। यूहन्ना वहाँ बैठे थे,…
श्रृंखलाबद्ध प्रचारक का आनंद
उस कमरे में हवा जमी हुई थी, पत्थर की दीवारों से नमक और सड़ांध की बू आ रही थी। पौलुस ने अपनी कलाई हिलाई तो लोहे की जंजीर खनकी। वह जंजीर उस रोमी प्रहरी से बंधी थी जो अभी-अभी पहरा…
अनुग्रह और सतर्कता का सफर
आज सुबह जब मोहन बाइबिल पढ़ रहा था, तो पौलुस का वह पत्र उसके हाथ में था। खिड़की से आती हल्की धूप में अक्षर जैसे तैर रहे थे। “और हे मेरे भाइयों, मैं नहीं चाहता कि तुम इस बात से…
यरूशलेम की प्रतिज्ञा और घुड़सवार दूत
यह बात उस समय की है जब यरूशलेम अब भी उजड़े हुए शहर की तरह पड़ा था। हवा में ईंटों का सफेद धूल-सा महीन चूर्ण उड़ता रहता, और बचे-खुचे खंडहरों के बीच झाड़ियाँ उग आई थीं। जकर्याह उस शाम अपने…









