टूटे विश्वास और शाश्वत समुद्र
समुद्र के किनारे बसा वह छोटा-सा गाँव अस्ताचल के सूर्य की सुनहरी आभा में नहा रहा था। लहरों की मधुर गुनगुनाहट और किनारे पर पड़ी पुरानी नावों की चरचराहट के बीच, अविनाश बूढ़ी आँखों से उस दूर के क्षितिज को…
पहाड़ों से बड़ा खजाना
वह दिन भी एक साधारण सा दिन था। पहाड़ियों की चोटियाँ सुबह की धुंध में डूबी हुई थीं, और हवा में गीली मिट्टी की महक थी। किशन लाल, जो अपने खेतों में फसल काटने जा रहा था, रुक गया। उसकी…
राजा की रात और मोर्दकै का सम्मान
उस रात राजा अहश्वेरोश को नींद नहीं आई। यह कोई असाधारण बात नहीं थी—एक साम्राज्य, जो हिन्दुस्तान से कूश तक फैला हो, उसके चिंताएँ भी उतनी ही विशाल होती हैं। पर उस रात चिंता नहीं, एक अशांति थी, जैसे हवा…
गिबोन में सुलैमान की बुद्धि की याचना
धूप ढलने लगी थी जब सुलैमान यरूशलेम की ऊँची दीवारों से नीचे उतरा। उसके पिता दाऊद का नगर अब उसकी गद्दी थी, पर आज उसका मन भारी था। राजमहल की ठंडी पत्थर की सीढ़ियों पर उसकी परछाई लंबी पड़ रही…
याकूब का अंतिम आशीर्वाद
वह दिन ढलने को था। तम्बू के भीतर हवा में जैसे एक गहरी, पुरानी गंध थी – जड़ी-बूटियों की, सूखे ऊन की, और समय की। याकूब बिस्तर पर पड़ा था, पर उसकी आँखें बुझी नहीं थीं। शरीर टूट रहा था,…
पौलुस का सत्य संघर्ष
वह यरूशलेम की सड़कें जो मैं चल रहा था, वे सिर्फ पत्थर नहीं थीं। हर कदम इतिहास से रूबरू करा रहा था। चौदह साल बाद लौटा था मैं, और हवा में भी बदलाव महसूस हो रहा था। बरनबास साथ था,…





