वो रात यरूशलेम के पुराने शहर की दीवारों पर एक अजीब सन्नाटा लिए हुए थी। हवा में नमक और जैतून की गंध थी, लेकिन उसके साथ एक और चीज़ मिली हुई थी—डर की गंध। असाफ़ अपनी छोटी सी कोठरी की खिड़की से बाहर देख रहा था। नीचे की घाटी में, दूर, अँधेरे में कहीं, शत्रु के डेरे के धुएँ की कालिख उठ रही थी। वह धुआं एक साथ दस दिशाओं से आता प्रतीत होता था।
उसकी मेज़ पर एक टूटा हुई मिट्टी का दीपक टिमटिमा रहा था। उसकी उँगलियाँ एक पुराने चर्मपत्र पर थीं, जिस पर वह दिन भर शब्द लिखता रहा था। पर अब शब्द नहीं आ रहे थे। केवल एक चित्र सा बन रहा था—एक चक्रवात का, जो उसके लोगों को निगलने के लिए बंद हो रहा था। एदोम के लोग पूर्व से, इस्माएली और मोआब दक्षिण से, हग्रीम फ़िलिस्तीन के तट से, तूर के लोग दूर उत्तर से, अम्मोन पूर्वी पहाड़ियों से… यह कोई युद्ध नहीं था, यह तो एक सनसनी थी। सब एक साथ। जैसे कोई जंगली जानवरों का झुंड शिकार की गंध पाकर एक सुर में गुर्रा उठे।
असाफ़ ने आँखें मूँद लीं। उसे अपने दादा की आवाज़ याद आई, जो मिस्र से छूटकारे की कहानियाँ सुनाते थे। कैसे फ़िरौन के रथ लाल सागर की लहरों में डूबे थे। पर उस कहानी में एक नायक था—मूसा। एक चमत्कार था। आज? आज तो बस यही लग रहा था कि परमेश्वर चुप हो गया है। उसका मन एक गहरे कुएँ जैसा लग रहा था, जिसमें प्रार्थना के शब्द गूँजते और फिर ख़ामोशी में डूब जाते।
उसने चर्मपत्र को सीधा किया। दीपक की लौ ने उसके हाथों की नसों को उभार दिखाया। और फिर, जैसे कोई बाँध टूटा हो, शब्द फूट पड़े। वह लिखने लगा, गुस्से और विश्वास के एक अजीब मिले-जुले भाव के साथ।
“हे ईश्वर, मौन न रह। चुप न रह, हे परमेश्वर, और शांत न हो।”
वह उन सभी नामों को दर्ज करने लगा जो उसकी स्मृति में किसी काले बादल की तरह छाए हुए थे। एदोम, इस्माएल, मोआब… हर नाम के साथ एक याद जुड़ी थी। एदोम के लोगों ने उसके चाचा को धोखे से मारा था जब वह व्यापार करने गया था। मोआब के योद्धाओं ने यरदन नदी के पास के गाँवों में आग लगा दी थी। यह व्यक्तिगत था। यह सिर्फ राजनीति या भूमि का झगड़ा नहीं था। यह एक प्रतिज्ञा थी—”आओ, हम उन्हें एक जाति के रूप में मिटा दें,” उसने लिखा, शत्रु की योजना को उकेरते हुए, “कि इस्राएल का नाम फिर कभी याद न किया जाए।”
अचानक, उसे अपने बचपन का एक दृश्य याद आया। वह अपने पिता के साथ दाऊद के गाँव बैतलहम के पास के मैदान में था। चारों ओर सफ़ेद घास झूम रही थी, और हवा में भेड़-बकरियों की घंटियों की आवाज़ थी। उसके पिता ने एक पत्थर उठाया और कहा था, “देख, बेटा। यह पत्थर अकेला कुछ नहीं है। लेकिन अगर यह एक भवन का हिस्सा बन जाए, तो यह हवा और बारिश सह सकता है। हम भी वैसे ही हैं। अकेले कमजोर, एक साथ मजबूत। पर हमारी मजबूती हमारे पत्थरों में नहीं, बल्कि उस हाथ में है जिसने इस भवन की नींव रखी।”
उस याद ने उसके शब्दों का रुख मोड़ दिया। अब गुस्सा एक गहरी, दर्द भरी याचना में बदलने लगा। वह शत्रुओं के विरुद्ध साधारण विजय नहीं माँग रहा था। वह एक उदाहरण माँग रहा था। उसने लिखा कि कैसे ईश्वर ने अतीत में काम किया था—मिद्यान के लोगों के साथ, सीसरा के साथ, यबीन के साथ। वह इतिहास को दोहराता हुआ चाहता था। “उन्हें धूल बना दो, हवा के सामने सूखी भूसी की तरह,” उसकी कलम चल रही थी, “जैसे आग जंगल को जला देती है, जैसे लपटें पहाड़ों को भस्म कर देती हैं।”
पर फिर, आखिरी पंक्तियों में, एक बदलाव आया। यह कोई व्यक्तिगत बदला नहीं रह गया था। यह कुछ बड़े के लिए एक प्रार्थना थी। “ताकि वे जानें,” उसने लिखा, अपनी साँस रोके, “कि तेरा नाम यहोवा है, कि तू ही सारी पृथ्वी पर परमप्रधान है।”
लिखते-लिखते रात ढलने लगी थी। पूर्वी आकाश में एक हल्की धूसर रेखा दिखाई देने लगी। असाफ़ ने कलम रख दी। उसका क्रोध शांत हो चुका था, उसकी थकान गहरी थी, लेकिन उसके मन में वह भय नहीं था जो पहले था। प्रार्थना ने उसे ख़ाली नहीं किया था, बल्कि एक प्रकार की भरपाई कर दी थी।
वह खिड़की के पास गया। दूर, पहाड़ियों के पार, सूरज की पहली किरण ने एक बादल के किनारे को सुनहरा कर दिया। उसे एहसास हुआ कि उसकी प्रार्थना सिर्फ शत्रुओं के विनाश के लिए नहीं थी। यह उसकी अपनी आस्था के लिए एक पुकार थी। डर के बीच में भी विश्वास को थामे रहने की कोशिश। यह याद दिलाना कि इतिहास उन लोगों का नहीं है जो तलवार चलाते हैं, बल्कि उस हाथ का है जो सभी इतिहास को संभालता है।
नीचे की घाटी में, शत्रु के डेरे के धुएँ के ऊपर, एक चील ने चक्कर लगाया। ऊँची, एकाकी, निर्भय। असाफ़ ने एक लंबी साँस ली। दिन की शुरुआत हो रही थी, और संघर्ष अभी बाकी था। पर उस चर्मपत्र पर लिखे शब्द अब केवल शिकायतें नहीं थे। वे एक गवाही थे। एक आदमी के डर की, उसके संघर्ष की, और अंततः, उसकी एक बात पर अडिग रहने की—कि अँधेरे के बीच में भी, आवाज़ उठाई जा सकती है। और कभी-कभी, वही आवाज़ ही, ख़ुद एक प्रकार की विजय होती है।




