पवित्र बाइबल

झूठी नबूवत का अंत

उस दिन की गर्मी अभी तक बस्ती से उतरी नहीं थी। धूल और जलते हून्द्रे की महक हवा में तैर रही थी। नाथन अपनी झोपड़ी के साये में बैठा, एक टूटी हुई मशक को सी रहा था, पर उसका मन उस काम में नहीं था। उसके कन्धों पर, छिपाने की कोशिश में ओढ़े मोटे कपड़े के नीचे, दो गहरे निशान थे। वे निशान उसके बचपन के थे, जब उसके माता-पिता ने, किसी झूठे देवता के भविष्यद्वक्ता की बातों में आकर, उसे ‘अर्पण’ करने के लिए यह चिन्ह बनवा दिए थे।

बरसों बीत गए थे। अब वह नबूवत के सपने नहीं देखता था। वह चाहता था कि उसके नाम के साथ लगा ‘भविष्यद्वक्ता’ का ख़िताब मिट जाए। उस देश में अब अजीब दिन आने वाले थे। यहोवा का वचन आया था कि झूठी नबूवत का स्रोत सूख जाएगा। और उस आने वाले दिन की छाया अभी से महसूस होने लगी थी।

एक दिन, जब नाथन अपनी थोड़ी-सी जमीन पर हल चला रहा था, तभद उसका बचपन का जानने वाला, मीका, उधर से निकला। मीका के चेहरे पर एक अजीब-सी चमक थी। “सुन, नाथन,” वह बोला, उसकी आँखों में एक तरह की पागलपन भरी दृढ़ता थी, “मैंने सपना देखा है। स्वप्नदर्शी हूँ मैं। मेरे पास यहोवा के लिए एक सन्देश है।”

नाथन का हाथ हल के हैंडल पर जड़ हो गया। उसने उन शब्दों को पहले कितनी बार सुना था? वे शब्द जिन्होंने उसके अपने परिवार को बरबाद कर दिया था। एक गहरा क्रोध, ठंडा और तीखा, उसके भीतर उठा। वह अब वह नहीं रहा जो भोलेपन से हर दर्शन पर विश्वास कर ले। “मीका,” उसकी आवाज़ सपाट थी, “तू ये बातें क्यों कह रहा है? तेरे माता-पिता तुझे क्यों नहीं रोकते?”

मीका ने उसकी बात अनसुनी कर दी, अपने ही खयालों में खोया हुआ। पर नाथन जानता था कि क्या होने वाला था। जब झूठी नबूवत के दिन लद जाएँगे, तो हर ऐसा व्यक्ति अपने सपनों और दर्शनों से शर्मिंदा होगा। वह अपने ही माता-पिता से छिपेगा, उन्हें यह कहकरे कि वह कभी भविष्यद्वक्ता नहीं था, कि उसके कन्धों के निशान किसी और ही वजह से हैं। कोई उन्हें ‘भविष्यद्वक्ता’ कहेगा तो वह इनकार कर देंगे। “मैं किसान हूँ, बचपन से हूँ,” यही उनका जवाब होगा।

और फिर वह दिन आया। बस्ती में अफ़वाह फैली कि शिलोह में एक आदमी आया है, जिसके हाथों और पाँवों में गहरे घाव के निशान हैं। लोग कहते, वह कोई चरवाहा है, जो भेड़ों के लिए अपनी जान देने को तैयार था। नाथन की उत्सुकता जागी। वह भीड़ के साथ उस पहाड़ी की तरफ चल पड़ा, जहाँ वह आदमी कहा जाता था कि रुका हुआ है।

रास्ते में, वह मीका के घर के पास से गुजरा। वह दृश्य उसे जीवन भर याद रहेगा। मीका के बूढ़े पिता, जिनकी आँखें अब धुंधली हो चुकी थीं, अपने बेटे पर चिल्ला रहे थे। मीका, जिसके चेहरे पर कभी वह अहंकारी चमक हुआ करती थी, अब डर से सहमा हुआ खड़ा था। उसके कपड़ों पर मिट्टी और खून के दाग थे। “नहीं, पिता!” मीका चीख रहा था, “मैंने कोई दर्शन नहीं देखा! ये घाव… ये तो मैंने अपने मित्रों के साथ झगड़े में घर की ही दीवार से लगकर बना लिए थे!” उसकी आवाज़ में झूठ साफ झलक रहा था। उसके स्वयं के माता-पिता उस पर विश्वास नहीं कर रहे थे। नाथन का दिल भर आया। यही था वह शुद्धि का दिन। झूठी आत्माओं का सफाया। भविष्यद्वक्ता का चोगा उतर फेंका जा रहा था, और उसके नीचे का इंसान नंगा और लज्जित खड़ा था।

वह आगे बढ़ा। शिलोह की पहाड़ी पर पहुँचते-पहुँचते साँझ होने लगी थी। वहाँ एक छोटा-सा झुंड था, और उनके बीच वह चरवाहा। नाथन ने उसे देखा। वह कोई राजसी पुरुष नहीं लग रहा था; उसके चेहरे पर थकान और एक गहरी करुणा थी। लेकिन जब नाथन ने उसके हाथों की तरफ देखा, तो उसकी साँस रुक गई। वहाँ, साफ दिखाई दे रहे थे, गहरे छिदे हुए घाव के निशान। वे निशान उसके अपने कन्धों के निशानों से कहीं ज्यादा गहरे, कहीं ज्यादा सार्थक लगे।

चरवाहा बोल रहा था, अपनी भेड़ों के बारे में, एक ऐसे रास्ते के बारे में जो संकट की घाटी से गुजरता है। उसकी आवाज़ में एक अधिकार था, पर वह अधिकार प्रेम से आता था, डराने से नहीं। नाथन को लगा, जैसे उसकी अपनी आत्मा के भीतर का कोई पर्दा फट गया हो। उसने अपने कन्धों पर हाथ रखा, उन पुराने, झूठे निशानों पर, जो अब तक उसकी शर्म का कारण थे।

और तभी चरवाहे ने उसकी तरफ देखा। उसकी नजरें सीधी मिलीं। उन नजरों में कोई आरोप नहीं था, कोई ताड़ना नहीं थी। एक गहरी समझ थी, जैसे वह नाथन के सारे इतिहास को, उसके घावों को, उसकी लज्जा को जानता हो। नाथन की आँखों से आँसू बह निकले। वह समझ गया। उस दिन, जिस दिन की भविष्यवाणी की गई थी, वह दिन केवल न्याय का नहीं था। वह शुद्धि का भी दिन था।

वह घर लौटा तो रात हो चुकी थी। उसकी पत्नी ने दीया जलाकर रखा था। “कहाँ थे इतनी देर?” उसने पूछा।
नाथन ने कोई जवाब नहीं दिया। उसने अपना ऊपरी वस्त्र उतारा, और पहली बार बिना किसी शर्म के, अपने कन्धे उसकी नजरों के सामने कर दिए। उसने उन निशानों की तरफ देखा, फिर नाथन की आँखों में झाँका।
“ये निशान,” नाथन ने धीरे से कहा, “ये मेरे नहीं रहे।”
उसकी पत्नी ने कुछ नहीं पूछा। उसे शायद समझ आ गया। नाथन बाहर आया, उस खुले आंगन में, जहाँ उसका एकमात्र बेटा, एक छोटा सा मेमना, सो रहा था। उसने उसे उठाया, उसकी मुलायम ऊन को हथेली से सहलाया।

भविष्यद्वक्ता मर चुके थे। झूठे दर्शन खत्म हो चुके थे। अब बचा था तो केवल एक साधारण चरवाहा, अपनी भेड़ के बच्चे को गोद में लिए, और एक ऐसा चरवाहा जिसके हाथों में छिदे हुए निशान थे, और जो दूर, कहीं एक पहाड़ी पर, अपने झुंड की रखवाली कर रहा था। और इन दोनों के बीच, एक नया रिश्ता, एक नई वाचा, उस रात की नम हवा में जन्म ले रही थी। नाथन ने आँखें बंद कीं। उसे लगा, जैसे उसके पुराने घावों पर ठंडा, शुद्ध पानी बह रहा हो।

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