पवित्र बाइबल

प्रकाश की प्रतीक्षा में दीया

यह कहानी उस समय की है जब सर्दियों की ठंड हवा में तैर रही थी और थिस्सलुनीका की पहाड़ियों पर शाम का सूरज तांबे जैसा लाल होकर डूब रहा था। एक छोटा-सा घर, जिसकी दीवारें मिट्टी की थीं, शहर के किनारे पर बना था। उसके आँगन में अंजीर का एक पुराना पेड़ था, जिसकी पतली-पतली डालियाँ खालीपन में कुछ कहती सी लगती थीं। अंदर, दीये की टिमटिमाती लौ ने कमरे की दीवारों पर अजीब-अजीब छायाएँ नचा रखी थीं।

एलीआस, जिसके चेहरे पर उम्र की झुर्रियाँ एक पूरे जीवन की कहानी कहती थीं, चमड़े की एक पुरानी पोथी को सहला रहा था। उसका पोता, मीका, जो अभी जवान था, चूल्हे के पास बैठा अपनी हथेलियाँ ताप रहा था। बाहर से ठंडी हवा का एक झोंका आया और दीया एक पल के लिए डगमगाया।

“दादा,” मीका ने आवाज दी, उसकी आवाज में एक डर सा था, “लोग कहते हैं कि प्रभु का दिन चोर की तरह आएगा, अचानक। कैसा दिन होगा वह? क्या यह डरावना होगा?”

एलीआस ने अपनी नज़र पोथी से हटाई और मीका की तरफ देखा। उसकी आँखों में चमक थी, डर नहीं। “प्रभु का दिन?” उसने कहा, आवाज धीमी और गहरी, जैसे दूर कहीं से आ रही हो। “हाँ, वह चोर की तरह आएगा। जब लोग ‘शांति, सुरक्षा’ कह रहे होंगे, तभी विनाश अचानक आ टूटेगा, जैसे प्रसव-पीड़ा गर्भवती स्त्री पर। लेकिन मीका, तू डर क्यों रहा है? तू प्रकाश का पुत्र है, दिन का। तू अंधकार का नहीं है।”

मीका ने चूल्हे की आग की तरफ देखा। “पर हम कैसे जानें कि हम तैयार हैं?”

एलीआस ने एक गहरी सांस ली। “सोए हुए और नशे में धुत लोग अंधकार के हैं। पर हम, जो दिन के हैं, हमें जागृत रहना है, होशियार। विश्वास और प्रेम का कवच पहनकर, और उद्धार की आशा को टोप की तरह सिर पर रखकर। क्योंकि परमेश्वर ने हमें क्रोध के लिए नहीं, बल्कि इसलिए बुलाया है कि हम हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा उद्धार पाएँ।”

वह थोड़ी देर चुप रहा, जैसे पुरानी यादों में खो गया हो। “तुझे याद है जब हम यरदन नदी के पास थे, और यूहन्ना ने उस आने वाले के बारे में कहा था? वह आग लाने वाला था। यह वही आग है – नाश करने वाली नहीं, बल्कि शुद्ध करने वाली। वह आग जो हमारे भीतर के सारे कचरे को जला दे, और सोने-चाँदी की तरह शुद्ध कर दे।”

बाहर, रात और गहरी हो गई थी। कुत्ते के भौंकने की आवाज दूर से आई। एलीआस ने फिर से बात शुरू की, पर इस बार उसकी आवाज और कोमल थी। “इसलिए, मीका, हम एक दूसरे को सांत्वना दो, और एक दूसरे का भला करने के लिए बनाओ, जैसा कि तुम करते भी हो। उनका आदर करो जो तुम्हारे बीच परिश्रम करते हैं, और तुम पर प्रभु में अधिकार रखते हैं। उन्हें अत्यधिक प्रेम के कारण सम्मान दो।”

“और एक दूसरे के साथ शांति से रहो,” वह बोलता गया, उंगलियाँ पोथी पर धीरे-धीरे फेरते हुए। “अपने भाइयों को चेतावनी दो जो आलसी हैं, कमजोरों को सहारा दो, सबके साथ धीरज रखो। देख कि कोई किसी के साथ बुराई के बदले बुराई न करे, बल्कि हमेशा एक दूसरे के भले की और सबके भले की चेष्टा करो।”

मीका ने सिर उठाया। दीये की रोशनी ने उसके युवा चेहरे पर एक नरम चमक बिखेर दी थी। “यह सब… यह बहुत कुछ है। इसे कैसे जीया जाए?”

एलीआस मुस्कुराया, एक दुखभरी मुस्कान। “हर समय आनन्दित रहो। निरंतर प्रार्थना करो। हर बात में धन्यवाद दो। क्योंकि यह मसीह यीशु में तुम्हारे लिए परमेश्वर की इच्छा है।” उसने हाथ बढ़ाया और मीका के कंधे को थपथपाया। “वह आत्मा जो तुम्हारे भीतर है, उसे न बुझाओ। भविष्यद्वाणियों को तुच्छ न जानो। सब बातों को परखो, जो अच्छी है उसे थामे रहो। हर प्रकार की बुराई से दूर रहो।”

एक लंबी चुप्पी छा गई। केवल चूल्हे में जलती लकड़ी की चटचटाहट सुनाई दे रही थी। फिर एलीआस ने धीरे से कहा, जैसे अपने आप से बात कर रहा हो, “शांति का परमेश्वर ही तुम्हें पूर्णतः पवित्र करे। और तुम्हारी आत्मा, प्राण, और शरीर, हमारे प्रभु यीशु मसीह के आगमन पर निर्दोष रखे जाएँ। जिसने तुम्हें बुलाया है, वही विश्वासयोग्य है; वही यह करेगा।”

उसने दीये की तरफ देखा, जिसकी लौ अब स्थिर होकर जल रही थी। “मीका, हमारे लिए यही प्रार्थना है। इन शब्दों को तोड़ो-मरोड़ो मत। बस, उन्हें जी लो। इस रात की तरह, जो डरावनी लगती है, पर उसके बाद फिर सुबह आएगी। प्रभु का दिन डर का नहीं, आशा का दिन है। उस दिन के लिए जागते रहो, पर डरते नहीं। क्योंकि तुम प्रकाश के हो।”

मीका ने एक लंबी सांस ली। उसका डर जैसे हवा हो गया था। बाहर, आकाश में तारे टिमटिमा रहे थे, ठंडे और साफ, जैसे अनंत काल से वहीं टँगे हों। उसे एहसास हुआ कि यह जागरण, यह प्रार्थना, यह आशा – यह कोई काम पूरा करने जैसा नहीं था। यह एक रास्ता था। एक सुबह की प्रतीक्षा में, रात के अंधकार के बीच, दीये की लौ को जलाए रखने जैसा।

और वह दीया, उस छोटे से कमरे में, टिमटिमाता रहा।

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