महीना: जनवरी 2026

टूटा घड़ा और भविष्यवाणी

यिर्मयाह को पता था कि आज का दिन कठिन होगा। सुबह की धूप यरूशलेम की पथरीली गलियों पर पड़ रही थी, पर उसकी आत्मा में एक ठंडक बैठी हुई थी। भगवान का वह शब्द, जो अक्सर उसके भीतर एक जलती…

पापों का भार वहन करने वाला

वह दिन ऐसा था जैसे आकाश ने सिसकियाँ भर रखी हों। हवा में धूल के बवंडर नहीं, एक स्थिर उदासी थी, जैसे सारी सृष्टि किसी बड़े दुख की प्रतीक्षा में साँस रोके बैठी हो। मैं, यशायाह, अपनी कुटिया के सामने…

बाबुल के पतन की दृष्टि

यह वह समय था जब दुनिया अपनी धुरी से टूटती प्रतीत हो रही थी। मेरे कक्ष की छत पर लकड़ी का पंखा धीरे-धीरे घूम रहा था, मगर हवा में कोई शीतलता नहीं थी, केवल एक भारी, दमघोंटू गर्मी थी जो…

जीवन का चक्र और समर्पण

वह दिन ठीक वैसे ही शुरू हुआ जैसे उत्तर प्रदेश के उस छोटे से गाँव के अधिकतर दिन शुरू होते थे। कृष्णा की आँखें खुलीं तो सूरज की पहली किरणें अपना रास्ता बनाती हुई, कच्ची मिट्टी की दीवारों पर पड़…

सृष्टि की सुबह में बुद्धि का आह्वान

एक समय की बात है, जब सृष्टि की सुबह थी और समय के पैमाने पर ओस की बूंदें टपक रही थीं। वह प्राचीन दिन, जब पर्वतों की नींव भी नहीं रखी गई थी, और सागर की गर्जना अभी सपने में…

आँसुओं से बोना हँसी से काटना

वह सुबह ठंडी थी। यरूशलेम की पहाड़ियों पर हवा में अभी भी रात की सिहरन लिपटी हुई थी। एलियाव की आँखें, समय से पहले ही झुर्रियों से भर गई थीं, पूर्व दिशा में उस धुंधली पट्टी को ताक रही थीं…

अदृश्य न्याय की धारा

(एक दृष्टान्त) बरसात के बाद की साँझ थी। आकाश में बादलों के फाहे अभी तक छितरे हुए थे, और हवा में गीली मिट्टी की सोंधी महक तैर रही थी। अनूप अपनी झोंपड़ी के सामने बैठा, एक पुरानी चटाई पर टिका,…

शरण शिला की अटूट शांति

वह दिन ऐसा था जैसे पहाड़ों ने आकाश को निगल लिया हो। घने, स्लेटी बादलों ने सूरज की सांस रोक दी थी, और हवा में एक ठंडी, चुप्पी बिछी थी। अनील अपनी झोंपड़ी के बाहर बैठा, एक पुरानी चट्टान पर…

प्रार्थना से मिली नई सुबह

वह रात ऐसी थी मानो अँधेरे ने सब कुछ निगल लिया हो। हेमंत की हवा में सन्नाटा बोल रहा था, और मैं अपनी झोंपड़ी के कोने में सिकुड़ा, अपने दर्द से लड़ रहा था। बुखार तो था ही, पर उससे…

परमेश्वर और अय्यूब: बेहेमोथ का दर्शन

हवा अब भी गर्म और भारी थी, पर उस तूफ़ान की चीख-पुक कुछ कम हो आई थी। अय्यूब अपने टाट पर बैठा, उसकी आँखें अब भी उस विशाल, अनंत आकाश की ओर टिकी थीं, जहाँ से वह आवाज़ उतरी थी।…