एस्तेर का राज और हामान का अंत
(यह कहानी एस्तेर की पुस्तक के सातवें अध्याय पर आधारित है। सभी पात्र और घटनाएँ बाइबिल के अनुरूप हैं, किन्तु उनके भावों, वातावरण और संवादों को विस्तार से चित्रित किया गया है।) शाही भोजन-कक्ष में हवा तैलीय और भारी लग…
अबीय्याह की मृत्यु और यरबाम का पतन
शीलो के टीले पर सन्नाटा पसरा था। ऊँचे स्थानों पर यरबाम ने जो सुनहरे बछड़े स्थापित किए थे, उनकी छाया लंबी होती जा रही थी। हवा में बबूल के फूलों की मीठी-कड़वी गंध थी, पर उसमें एक अजीब सी गंधिल…
पौलुस का पत्र तीमुथियुस का साहस
एफेसुस की गलियाँ शाम की धुंध में डूबी हुई थीं, और तीमुथियुस की कोठरी की खिड़की से आती ठंडी हवा ने दीपक की लौ को झिंझोड़ दिया। कागज का एक पत्र, जो अब मुड़ा हुआ और किनारों से फटा हुआ…
शाश्वत शब्द का मानव रूप
शुरुआत थी एक शब्द की। पर यह कोई साधारण शब्द नहीं था। यह वह शब्द था जो हर शब्द से पहले मौजूद था, जो स्वयं ध्वनि और अर्थ का स्रोत था। उसकी उपस्थिति ही सब कुछ थी, और सब कुछ…
स्वनिर्मित बैल का पतन
वह साल था जब गर्मियाँ अपनी पूरी निर्ममता के साथ धरती पर पसर गई थीं। समरा का गाँव, जो हमेशा हरा-भरा और जीवंत रहता था, अब एक धूलभरी, उदास जगह बनकर रह गया था। कुएँ सूख चुके थे, खेतों में…
प्रेमगीत: श्लोमित और सुलेमान
वह दिन ढल रहा था, और बाग़ की हवा में ख़ुमार सा छाया हुआ था। श्लोमित अपनी छोटी सी कुटिया के द्वार पर बैठी, उंगलियों से जैतून के पेड़ की एक टहनी को सहलाते हुए, उसने आने वाले कदमों की…
तीन युवक और बुद्धिमान बुजुर्ग
वह गाँव पहाड़ों की तलहटी में बसा था, जहाँ सुबह की धूप ओस से लदे खेतों को चाँदी की तरह चमकाती। एक तरफ़ नदी बहती, जिसका शोर दूर तक एक सतत प्रार्थना-सा लगता। इसी गाँव में रहता था विश्वासदास, एक…
सृष्टि का आभारी विस्मय
वह सुबह ऐसी थी मानो संसार नया-नया जन्मा हो। आकाश के किनारे पर सूरज की पहली किरण ने सोने का रंग घोल दिया था, धीरे-धीरे, जैसे कोई चितेरा रंग फैला रहा हो। पहाड़ों की चोटियाँ, अभी तक नीले छायारंग में…







