पवित्र बाइबल

टेकोआ के गड़ेरिए की पुकार

टेकोआ के पहाड़ों की ओर से आने वाली हवा में धूल और सूखे की गंध थी। आमोस अपनी भेड़ों के बीच बैठा, एक मेमने के खुर में फंसी कंटीली झाड़ी को आराम से निकाल रहा था। दूर, समझ से परे एक दिशा में, शोमरोन के मीनारों का धुँधला सा आकार दिखाई देता था। वहाँ की चकाचौंध और उसके अपने इन पहाड़ों की खामोशी के बीच एक गहरा, अनकहा तनाव था, जैसे बादलों में छुपी गरज।

उसका दिल अचानक बेचैन हो उठा। यह कोई साधारण बेचैनी नहीं थी। यह ऐसा था जैसे कोई विशाल हाथ उसके सीने पर रख दिया गया हो, एक दबाव जो शब्दों से बड़ा था। उसने आँखें बंद कीं। भेड़ों की रंभाहट, हवा की सीटी—सब मलिन होकर एक तीव्र, स्पष्ट ध्वनि में बदल गई। यह आवाज़ उसके भीतर से नहीं, बल्कि उसके चारों ओर की हवा से, पत्थरों से, उस धरती से आ रही थी जिस पर वह बैठा था।

“देख, आमोस।”

उसकी आँखों के सामने चित्र उभरने लगे। वह शोमरोन के भव्य महलों के भीतर था। हाथीदांत की जड़ाऊ कुर्सियाँ, बढ़िया लिनन के परदे, दाखमधु के कटोरे। परन्तु हवा में सड़ांध थी। उस भोग-विलास के नीचे, जैसे कि मकान की नींव सड़ रही हो, उत्पीड़न की गंध, अन्याय की बू आ रही थी। गरीब के परिश्रम की कमाई से सजे हुए शयनकक्ष, न्याय के बदले लिए गए घूस से भरे हुए भंडार। यह दृश्य इतना स्पष्ट था कि उसका जी मिचलाने लगा।

फिर आवाज़ फिर आई, गूँजती हुई, जैसे कोई सिंह दहाड़ रहा हो: “क्या दो जन बिना मिले हुए चल सकते हैं?”

आमोस ने अपनी भेड़ों की ओर देखा। एक सिंहनी का बच्चा तभी शिकार करता है जब उसके पास शिकार हो। एक पक्षी जाल में तभी फंसता है जब जाल बिछाया गया हो। कोई भी घटना बिना कारण के नहीं घटती। यह सृष्टि का नियम था। और फिर उसका दिमाग उस एक सत्य से टकराया, जो इन सभी प्रश्नों का केंद्र था: “क्या नगर में कोई विपत्ति होती है, जिसे यहोवा ने बिना कारण किया हो?”

शोमरोन पर विपत्ति आने वाली थी। यह कोई स्वेच्छा का प्रकोप नहीं था। यह एक नैतिक ब्रह्मांड का अनिवार्य परिणाम था, जैसे कि बीज से अंकुर फूटता है। परमेश्वर ने चेतावनी दी थी—नबी भेजे थे, व्यवस्था दी थी, विवेक का स्वर दिया था। उन्होंने शोमरोन को अपने पाप की गंध सूंघने दी थी, पर उसने उसे सुगंध समझ लिया था। अब प्रतिक्रिया होनी ही थी।

आमोस उठ खड़ा हुआ। उसके पैरों तले की धरती अब सिर्फ मिट्टी नहीं रह गई थी; वह एक मंच थी। उसकी आवाज़, जो सिर्फ भेड़ों से बात करती थी, अब एक तुरही बन गई। वह टेकोआ की ऊबड़-खाबड़ पगडंडियों से उतरा, उस सड़क पर चल पड़ा जो उत्तरी राज्य की ओर जाती थी।

बेतैल में, जब उसने पहली बार अपना संदेश सुनाया, तो लोग रुके, मुँह बिचकाया। “यह गड़ेरिया कौन है?” “टेकोआ से? वहाँ तो सिर्फ बकरियाँ और धूल ही है।” पर उसकी आवाज़ में एक अजीब सी धार थी, एक ऐसी स्पष्टता जो पढ़े-लिखे धर्मशास्त्रियों के पास भी नहीं थी।

“सुनो!” वह चिल्लाया, उसकी आँखों में पहाड़ों की आग जल रही थी। “वह सिंह दहाड़ चुका है, फिर कौन न डरे? प्रभु यहोवा ने बात कही है, फिर कौन भविष्यद्वाणी न करे?”

उसने उन्हें साधारण बातें समझाईं। “जब कोई सिंह शिकार करता है, तो क्या वह बिना गरज के शिकार को दबोचता है? क्या फन्दे में चिड़िया बिना किसी ललचाव के फँसती है? तुम लोगों पर क्या बीती है? तुम सुनते क्यों नहीं?”

वह महलों के फाटकों तक गया, जहाँ सिपाही उसकी ओर तिरछी नज़र से देखते। “तुम्हारे भवनों को देखो,” उसकी आवाज़ कर्कश हो गई, दुःख से भरी हुई। “हाथीदांत के महल, बड़े-बड़े घर। परन्तु मैं कहता हूँ, इन पर गिरने को है विपत्ति। शत्रु तुम्हारे चारों ओर घेरा डालेंगे, तुम्हारी ऊँची चहारदीवारियाँ धराशायी हो जाएँगी।”

कुछ हँसे, कुछ क्रोधित हुए। एक अधिकारी ने उसकी ओर धक्का देते हुए कहा, “जा, अपनी भेड़ों के पास वापस जा। यहाँ तेरी कौन सुनता है?”

आमोस ने उस आदमी की आँखों में देखा। उसमें नफरत नहीं, बल्कि एक गहरा दुःख था। “वे सुनेंगे,” वह बुदबुदाया। “जब विदेशी सेनाएँ तुम्हारे नगरों को रौंदेंगी, जब तुम्हारे सुख-वैभव के अवशेषों पर दुश्मन के पैर पड़ेंगे, तब वे सुनेंगे। तब वे जानेंगे कि यह सब क्यों हुआ। यह कोई दुर्घटना नहीं होगी। यह वह फसल है, जिसका बीज तुम स्वयं बोते रहे हो।”

वह दिनभर यही संदेश सुनाता रहा, जब तक कि उसका गला रेत की तरह खुरदरा नहीं हो गया। शाम को, जब ठंडी हवा चलने लगी, तो वह एक टूटी हुई शहरपनाह के सहारे बैठ गया। उसकी जवानी के दिनों की तरह उस पर एक थकान छा गई, पर यह थकान शरीर की नहीं, आत्मा की थी। उसने अपनी आँखें बंद कीं। उसे फिर से टेकोआ के पहाड़ों की याद आई, भोरी के समय की शांति, भेड़ों की मंद रंभाहट। परन्तु उस शांति के ऊपर, अब हमेशा के लिए, एक सिंह की दहाड़ गूँजती रहेगी—परमेश्वर की दहाड़, जो न्याय का शिकार करने को तैयार है, और जिसका कारण उनके अपने ही हाथों से बनाया गया है।

उसने महसूस किया कि उसका काम पूरा नहीं हुआ। यह संदेश सिर्फ एक चेतावनी नहीं थी; यह एक साक्ष्य था। जब विपत्ति आएगी, और आनी ही थी, तो लोग याद कर सकेंगे कि एक गड़ेरिया आया था, जिसने उन्हें बताया था कि दो जन बिना मिले नहीं चल सकते। कि हर दहाड़ का एक कारण होता है। और कि यहोवा का न्याय, उसकी दया की तरह ही, बिना बुलाए नहीं आता।

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