पवित्र बाइबल

लेवियों का अभिषेक और समर्पण

सिनाई के विशाल रेगिस्तान में हवा भी धीरे चलती थी, मानो परमेश्वर के डेरे के आसपास की पवित्रता को न डुला सके। मिलाप के तम्बू के सामने का विस्तार, जहाँ रेत सुनहरी और आकाश नीला एक दूसरे से मिलते थे, वहाँ एक सन्नाटा छाया रहता था। लेकिन आज उस सन्नाटे में एक स्पष्ट तैयारी का भनक था। मूसा ने हारून से कहा था, और हारून ने आज सुबह ही सातों दीपक जलाकर उनकी रोशनी को मेनोराह के सामने की ओर फैलने दिया था, जैसा कि यहोवा ने आज्ञा दी थी। वह प्रकाश केवल रोशनी नहीं था; वह एक संकेत था, एक दिव्य प्रारंभ का सूचक।

और फिर, लेवियों को बुलाया गया। वे एक समूह में आए – युवा, प्रौढ़, कुछ के चेहरे पर सेवा का उत्साह, कुछ पर गहरी ज़िम्मेदारी का भार। उन्हें सारे इस्राएलियों के बीच से अलग किया गया था, एक भिन्न सम्पत्ति के रूप में, परमेश्वर के लिए विशेष रूप से ठहराए गए। यह अलगाव भयभीत करने वाला नहीं, बल्कि गौरवपूर्ण था, फिर भी उनकी आँखों में एक प्रश्न तैर रहा था: क्या हम वास्तव में तैयार हैं?

मूसा ने निर्देश दिए, और एक अजीब सी, अभी तक अद्भुत रीति शुरू हुई। शुद्धि के जल से उन पर छिड़काव किया गया। ठंडी बूंदें उनके कंधों और सिरों पर पड़ीं, केवल शरीर की धूल ही नहीं, बल्कि एक प्रकार का प्रतीकात्मक अहसास भी धोती हुई – पुराने जीवन से, साधारण कार्यों से, एक नई पवित्रता में प्रवेश के लिए तैयारी। फिर उन्होंने अपने सारे शरीर के बाल कटवाए। उस्तरे की खरखराहट, बालों का रेत पर गिरना – यह एक आत्मसमर्पण था, एक सादगी में लौटना। उनके वस्त्र धोए गए, सफेद और साफ, उनकी भावी सेवा के शुभ्र प्रतीक के समान।

लेकिन यह सब पर्याप्त नहीं था। फिर बलिदानों का समय आया। एक युवा बैल, स्वस्थ और मजबूत, अनाज का भेंट और तेल – सब कुछ तैयार किया गया। हारून ने लेवियों को परमेश्वर के सामने एक अर्पण के रूप में प्रस्तुत किया, एक ऐसा हिलाने का बलिदान, जिसमें हाथों का स्पर्श, समर्पण का भौतिक संकेत निहित था। लेवियों ने अपने हाथ उन बलिदान के पशुओं पर रखे। यह कोई खाली रस्म नहीं थी; उस क्षण में, एक स्थानांतरण हुआ। उनका जीवन, उनकी ताकत, अब औपचारिक रूप से उस सेवा के लिए समर्पित थी, जो आने वाली थी।

और फिर मूसा ने किया जो सबसे महत्वपूर्ण था। उसने लेवियों को हारून और उसके पुत्रों के हाथों सौंपने से पहले, उन्हें एक बार फिर यहोवा के सामने अर्पण किया। उसकी आवाज़ रेगिस्तान की शांति में गूंजी, हर शब्द सोच-समझकर, भारी अर्थों से लदा हुआ। “इन्हें ले, और इनसे इस्राएल के लोगों के बीच सेवा करवा, ताकि वे मिलापवाले तम्बू के काम के निमित्त तैयार रहें।” यह एक प्रतिस्थापन था। हर जन्म देने वाली कोख का पहिलौठा, जो परमेश्वर का है, उसके स्थान पर ये लेवी अब खड़े थे। वे एक रक्षक दीवार थे, इस्राएल और पवित्रता के बीच, ताकि सामान्य जन भी निकट आ सकें, बिना भय के।

लेवियों ने अपना सिर झुकाया। अब उन पर हाथ रखे गए। हारून के हाथ, जो महायाजक के हाथ थे, उनके सिरों पर पड़े। यह अभिषेक था, आशीष थी, और सेवा का अंतिम प्रत्यायोजन। उस पल में, वे केवल लेवी ही नहीं रहे; वे परमेश्वर के लिए दिए गए उपहार थे, और इस्राएल के लिए उसकी ओर से दिया गया उपहार।

काम शुरू हुआ। पच्चीस वर्ष की आयु से ऊपर के पुरुष तम्बू की सेवा में जुट गए। वे वस्तुओं को उठाते, ढोते, साफ करते, व्यवस्थित करते। उनकी गतिविधियों में एक नई सावधानी थी, एक नया आदर। वे जानते थे कि वे केवल चीजें नहीं हिला रहे; वे पवित्र वस्तुओं की देखभाल कर रहे हैं। पचास वर्ष की आयु के बाद, वे सेवा से निवृत्त हो जाते, परंतु फिर भी अपने भाइयों की सहायता करते, मार्गदर्शन देते – अनुभव का एक स्थायी भंडार।

सूर्य ढलने लगा, और मिलाप के तम्बू के सामने सातों दीपक फिर से जल उठे, उनकी लौएँ स्थिर और निश्चित। लेवी एक तम्बू के पास बैठे, थके हुए परंतु संतुष्ट। उनमें से एक, एलियाब नाम का एक युवक, रेत में अपनी उंगली घुमाते हुए बोला, “आज सुबह जब जल उड़ेलने के समय ठंडी बूंदें मेरी पीठ पर पड़ीं, तो मैंने सोचा, यह सिर्फ पानी है। लेकिन अब… अब लगता है जैसे वह एक नए जन्म का जल था।”

उसका साथी, एक प्रौढ़ व्यक्ति जिसके चेहरे पर रेगिस्तान की हवाओं ने झुर्रियां डाल दी थीं, मुस्कुराया। “हम केवल सेवक नहीं हैं, बेटे। हम एक प्रतिज्ञा के जीते-जागते प्रतीक हैं। हमारे हाथों पर आज उन बलिदानों की गंध लगी है। यह गंध हमें याद दिलाती रहेगी कि हमारी सेवा, हमारा जीवन ही, एक बलिदान है।”

और ऐसे ही, सिनाई के रेगिस्तान में, एक समुदाय के भीतर एक और समुदाय पैदा हुआ, नहीं, बल्कि समर्पित हुआ। वे मेनोराह के प्रकाश की तरह नहीं थे, जो सबको दिखाई देते। वे अधिक उस तेल की तरह थे, जो दीपकों को जलाए रखता है – अनिवार्य, आंतरिक, एक ऐसी सेवा जो सम्पूर्ण शिविर को परमेश्वर के निकट बने रहने में सक्षम बनाती थी। और रात के समय, जब तारे रेगिस्तान के ऊपर एक चमकीला आवरण बुनते, तो लेवी अपनी पहरेदारी में जागते रहते, उस आदेश को याद करते हुए जो उनके अस्तित्व का कारण बन गया था – शुद्ध किए गए, अर्पित किए गए, और अब, पूर्णतः उसके।

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