यरीहो की दीवारें सूरज की ढलती किरणों में ईंट के पक्के रंग की तरह जल रही थीं। शहर के अंदर हलचल थी, लेकिन उस हलचल में एक सन्नाटा छिपा था – जैसे बादल गरजने से पहले का वक्त हो। बाजार में लोग एक दूसरे से फुसफुसा रहे थे। कानाफूसी की बातें थीं कि यर्दन पार करके कोई लोग आए हैं, और उनके साथ उनका परमेश्वर भी है, वही परमेश्वर जिसने लाल सागर को चीर दिया था। डर की एक हल्की परत हवा में तैर रही थी।
दीवार के किनारे बने एक मकान में, राहाब सन की बटाई कर रही थी। उसके हाथ काम में थे, लेकिन कान हर आहट पर लगे थे। उसका घर शहर की दीवार में ही बना था, और अक्सर यात्री, व्यापारी, खबर लाने वाले यहाँ ठहरते थे। इसलिए उसके कानों तक वो सब बातें पहुँचती थीं जो राजमहल तक नहीं पहुँच पाती थीं। आज उसने दो नए चेहरे देखे थे – परदेशी, जिनकी चाल में जल्दबाजी थी, आँखों में एक अजीब सा दृढ़ संकल्प। उसने उन्हें अपने ऊपर के कमरे में, सन के ढेर के पीछे छिपा दिया था। वह जानती थी कि वे कौन हैं, या कम से कम अनुमान तो लगा ही सकती थी।
शाम ढलते ही दरवाजे पर जोर की खटखटाहट हुई। यरीहो के राजा के सैनिक थे, उनकी आँखें क्रोध और चिंता से चमक रही थीं। “उन आदमियों को बाहर निकालो,” सरदार गुर्राया, “जो तुम्हारे घर आए हैं। वे पूरे इस्त्राएल की ओर से जासूसी करने आए हैं।”
राहाब का दिल जोर से धड़का। उसने एक गहरी साँस ली, और एक शांत, थोड़ी डरी हुई स्त्री का भाव बनाया। “हाँ, साहब, वो आदमी यहाँ आए थे,” उसने कहा, अपनी आवाज़ को हल्का काँपता हुआ रखा। “लेकिन मैं कहाँ जानती थी कि वे कौन हैं? सूरज ढलने के ठीक पहले, जब फाटक बंद होने वाला था, वे चले गए। अगर आप लोग जल्दी करें, तो शायद उन्हें रास्ते में ही पकड़ लें। शिकारी के पीछे भागने वाले कुत्तों की तरह तुरंत निकल पड़ो, तो पकड़ सकते हो।”
उसकी बात में एक जल्दबाजी का भाव था, जो संदेह को विश्वास में बदल देता है। सैनिक बिना एक शब्द कहे मुड़े और दौड़ पड़े, यरीहो की ओर जाने वाले मुख्य रास्ते की तरफ, जो इसी समय बंद हो चुका था। उनके कदमों की आहट दूर हो गई।
राहाब तुरंत ऊपर अपने छत के कमरे में गई, जहाँ सन के बड़े-बड़े गट्ठर पड़े थे। उसने उन्हें हटाया, और दो आदमी, धूल और डर से सने हुए, उसके सामने खड़े हो गए। उनकी आँखों में कृतज्ञता थी, लेकिन सतर्कता भी। “तुमने हमारी जान बचाई,” उनमें से एक ने कहा, उसकी आवाज़ फुसफुसाहट में डूबी हुई।
“मैंने सच नहीं बोला,” राहाब ने कहा, उसकी आँखें गंभीर थीं। “लेकिन मैं जानती हूँ कि तुम कौन हो, और तुम किसकी सेवा में हो। इस शहर में हर कोई जानता है कि तुम्हारा परमेश्वर क्या कर सकता है। हमने लाल सागर के सूखे पथ की कहानियाँ सुनी हैं। हमने अमोरी के दोनों राजाओं, सीहों और ओग की हार के किस्से सुने हैं। सुनकर हमारा मन पिघल गया, हिम्मत जवाब दे गई। तुम्हारे परमेश्वर के लिए आकाश के नीचे की हर चीज़ उसी की है।”
उसने खिड़की की ओर इशारा किया, जिससे यर्दन की घाटी और दूर, जहाँ इस्त्राएली डेरा डाले हुए थे, का दृश्य दिख रहा था। “अब, मेरे पास एक विनती है। जैसे मैंने तुम पर दया की है, वैसे ही तुम भी मेरे पिता के घराने पर दया करना। मेरे माता-पिता, मेरे भाई-बहन, और उनके सब परिवार – हम सबको बचा लेना, हमारे प्राण न लेना।”
जासूसों ने एक दूसरे की ओर देखा। फिर उन्होंने गंभीर स्वर में कहा, “हमारी जान के बदले तुम्हारी जान। अगर तुम हमारे इस काम के बारे में किसी को कुछ नहीं बताओगी, तो जब यहोवा हमें यह देश दे देगा, तो हम तुम्हारे साथ करुणा और सच्चाई का बर्ताव करेंगे।”
राहाब के घर की खिड़की से एक मोटी रस्सी लटक रही थी, जिसका इस्तेमाल वह अक्सर सामान ऊपर चढ़ाने के लिए करती थी। अब उसका इस्तेमाल जान बचाने के लिए होने वाला था। रात के काले आवरण में, उसने उन दोनों को खिड़की से नीचे उतारा। नीचे जमीन तक पहुँचने से पहले, एक जासूस ने फिर मुड़कर कहा, “जब हम लौटकर आएँगे, तो इस खिड़की में यह लाल रस्सी बाँध देना। तेरे माता-पिता, भाई-बहन, सबको तेरे इसी घर में इकट्ठा कर लेना। जो इस घर के दरवाजे से बाहर निकला, उसका खून उसके अपने सिर पर होगा, हम बचाव नहीं कर सकेंगे। लेकिन जो इस घर में तेरे साथ रहेगा, अगर कोई उस पर हाथ उठाएगा तो उसका खून हमारे सिर पर। और एक बात – अगर तू हमारे इस मामले को उजागर कर देगी, तो हमारी इस शपथ से तू बरी समझी जाएगी।”
राहाब ने सिर हिलाकर स्वीकार कर लिया। “तुम्हारे कहने के अनुसार ही होगा।” और उसने रस्सी काट दी।
दोनों आदमी पहाड़ियों में तीन दिन तक छिपे रहे, उन रास्तों से बचते हुए जहाँ राजा के सैनिक खोजबीन कर रहे थे। फिर वे सकुशल यर्दन पार करके अपने शिविर में, यहोशू के पास लौट आए। उन्होंने सब कुछ बताया – राहाब की बातें, यरीहो के लोगों का डर। “निश्चित रूप से यहोवा ने सारा देश हमारे हाथ में कर दिया है,” उन्होंने कहा, उनके चेहरे पर एक नई निश्चिंतता थी, “वहाँ के सभी निवासी हमारे सामने थर-थर काँप रहे हैं।”
और यरीहो की दीवार पर, एक घर की खिड़की से, एक मोटी लाल रस्सी लटक रही थी। यह कोई साधारण रस्सी नहीं थी। यह विश्वास का प्रतीक थी, एक गुप्त वाचा का चिह्न थी, डर के सामने चुनी गई आशा की एक नन्हीं लौ थी, जो पत्थर की दीवारों के बीच भी जीवित थी। राहाब खिड़की के पास खड़ी, दूर के शिविरों की ओर देख रही थी, और उसके मन में वह शांति थी जो उस शहर में किसी और के पास नहीं थी, क्योंकि उसने सुनी हुई बातों पर विश्वास किया था, और उस विश्वास ने उसे एक नए भविष्य की किरण दिखा दी थी।




