पवित्र बाइबल

एलिशा और शूनेमी स्त्री का चमत्कार

उस समय की बात है, जब गिलगाल से उठकर भविष्यद्वक्ता एलिशा ने बैतल में प्रवेश किया। वहां के लोगों में एक बात फैली – परमेश्वर का भय यहां उपस्थित है। वह अक्सर शूनेम से गुजरता, जहां एक प्रतिष्ठित स्त्री रहती थी। उसने एलिशा को बार-बार देखा, तो एक दिन अपने पति से कहा, “देखो, यह पुरुष परमेश्वर का पवित्र भविष्यद्वक्ता है। आओ, हम उसके लिए एक छोटा-सा कमरा बना दें। दीवार पर एक चारपाई, एक मेज, एक दीया और एक कुर्सी रख दें। जब भी वह हमारे पास से गुजरे, विश्राम कर सके।”

एक दिन एलिशा वहां ठहरा। उसने अपने सेवक गेहजी से कहा, “इस शूनेमी स्त्री को बुलाओ।” जब वह आई, तो एलिशा ने कहा, “तूने हमारे लिए यह सब किया है। क्या तेरे लिए राजा या सेनापति से कुछ कहूं?” उसने विनम्रता से उत्तर दिया, “मैं अपने ही लोगों के बीच सुरक्षित रहती हूं।” गेहजी से एलिशा ने धीरे से पूछा, “फिर इसके लिए क्या करें?” गेहजी बोला, “इसका कोई पुत्र नहीं, और इसका पति वृद्ध है।” एलिशा ने उस स्त्री को बुलवाया। वह द्वार पर खड़ी थी, धूप में उसकी छाया लंबी पड़ रही थी। एलिशा ने कहा, “अगले वर्ष इसी समय, तू एक पुत्र को गोद में खेलाती हुई देखेगी।” स्त्री की आंखों में एक क्षण के लिए अविश्वास था, फिर वह बोली, “हे मेरे प्रभु, भविष्यद्वक्ता, अपनी दासी से झूठ न बोल।”

परन्तु ठीक एलिशा के कहे अनुसार, अगले वर्ष उसने एक पुत्र को जन्म दिया। बालक बढ़ने लगा। एक दिन जब वह अपने पिता के साथ खेत में कटाई करने वालों के पास गया, तो अचानक सिर में तेज दर्द उठा। वह चिल्लाया, “मेरा सिर! मेरा सिर!” पिता ने एक सेवक से कहा, “इसे अपनी मां के पास ले चलो।” दोपहर तक वह मां की गोद में पड़ा रहा, और फिर सांस रुक गई। मां ने उसे उठाकर भविष्यद्वक्ता के कमरे की चारपाई पर लिटा दिया। दरवाजा बंद करके बाहर आई।

उसने अपने पति से कहा, “मेरे लिए एक नौकर और एक गधी भेजो। मैं भविष्यद्वक्ता के पास जाऊंगी और लौट आऊंगी।” पति ने पूछा, “आज न तो अमावस्या है, न सब्त का दिन। तू क्यों जा रही है?” वह केवल इतना बोली, “कुशल है।” गधी पर सवार होकर वह तेजी से कार्मेल पर्वत की ओर चल पड़ी, जहां एलिशा था। दूर से ही एलिशा ने उसे देख लिया। उसने गेहजी से कहा, “देख, वह शूनेमी स्त्री दौड़ी चली आ रही है। उसके चेहरे का रंग उड़ा हुआ है। परमेश्वर ने मुझे बताया है, उसके बेटे की सांस रुक गई है।”

जब वह पहाड़ पर पहुंची, तो उसने एलिशा के पांव पकड़ लिए। गेहजी ने उसे हटाना चाहा, पर एलिशा ने कहा, “छोड़ दो। उसका मन कड़वा है। परमेश्वर ने मुझे बताया, पर मुझे छिपाया कि क्यों।” स्त्री बोली, “क्या मैंने पुत्र मांगा था? क्या मैंने नहीं कहा था कि मुझे धोखा न दो?” एलिशा ने तुरंत गेहजी को अपनी लाठी देकर कहा, “मेरी लाठी ले जा, और मेरे चेहरे पर दृष्टि रखे बिना, सीधे उस लड़के के पास जा। उसकी नाक पर लाठी रख देना।” परन्तु लड़के की मां ने कहा, “परमेश्वर की शपथ, और तेरे प्राण की शपथ, मैं तुझे छोड़कर नहीं जाऊंगी।” तब एलिशा उठा और उसके पीछे-पीछे चल दिया।

गेहजी पहले ही पहुंच चुका था। उसने लाठी लड़के के चेहरे पर रख दी, पर कोई आवाज नहीं, कोई हरकत नहीं। वह लौटकर एलिशा से मिला और बोला, “लड़का जागा नहीं।” एलिशा ने घर में प्रवेश किया। वह लड़का चारपाई पर पड़ा था। एलिशा ने दरवाजा बंद करके परमेश्वर से प्रार्थना की। फिर वह उस लड़के के ऊपर लेट गया – अपना मुंह उसके मुंह पर, अपनी आंखें उसकी आंखों पर, अपने हाथ उसके हाथों पर। लड़के का शरीर गर्म होने लगा। एलिशा उठा, कमरे में एक बार इधर-उधर टहला, फिर वापस लेट गया। लड़के ने छींक मारी, सात बार छींका, और आंखें खोल दीं।

एलिशा ने गेहजी से कहा, “उस शूनेमी स्त्री को बुला लाओ।” जब वह आई, तो एलिशा बोला, “अपने पुत्र को उठा ले।” वह अन्दर गई, उसके पांवों पर गिर पड़ी, फिर अपने पुत्र को उठाकर बाहर ले आई। धूप उसके चेहरे पर पड़ रही थी, और आंसू सूख चुके थे।

बाद के दिनों में, एलिशा गिलगाल लौटा, जहां अकाल पड़ा था। उसने अपने चेलों से कहा, “एक बड़ा बर्तन चढ़ाओ और सबके लिए तरकारी पकाओ।” एक व्यक्ति मैदान में साग लेने गया और जंगली लताओं से एक लौकी भर लाया। जब वह काटकर बर्तन में डाली गई, तो चेले चिल्लाए, “हे भविष्यद्वक्ता, बर्तन में मौत है!” एलिशा ने आटा मंगवाया और बर्तन में डाल दिया। फिर बोला, “अब सब में बांट दो।” और उसमें कुछ भी हानिकारक न रहा।

एक दिन बाल-भविष्यद्वक्ताओं में से एक के हाथ में भेंट के रूप में जौ की बीस रोटियां और ताजे अन्न की कुछ बालें आईं। एलिशा ने कहा, “लोगों को दे दो, वे खाएं।” सेवक बोला, “क्या मैं इसे सौ व्यक्तियों के आगे रखूं?” एलिशा ने कहा, “परमेश्वर यहोवा का यह वचन है – ‘वे खाएंगे, और कुछ बचेगा भी।'” जब उसने रखा, तो परमेश्वर के वचन के अनुसार, सबने खाया, और कुछ बचा भी रहा।

इन सबके बीच, परमेश्वर का हाथ दिखाई देता रहा – कभी एक कमरे में, कभी एक मृत बालक पर, कभी विषैले बर्तन में, कभी थोड़ी सी रोटियों में। और लोग जान गए कि पृथ्वी पर उसके वचन का स्वाद कैसा होता है – कभी आश्चर्यजनक, कभी साधारण, पर हमेशा पर्याप्त।

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