यूसुफ का क्षमा और विश्वास
यूसुफ उस शव पर गिरकर रोया, अपने पिता के ठंडे माथे को छूकर। मिस्र की भरी धूप में भी उसे एक कंपकंपी सी लग रही थी। याकूब का शरीर, जो इतने वर्षों तक उसके लिए एक सहारा, एक स्मृति बना…
अब्राहम और तीन दिव्य अतिथि
दिन ढल चुका था, पर मामरे के पेड़ों की घनी छाया में अभी भी दोपहर की जड़ता छाई हुई थी। अब्राहम अपने तम्बू के मुहाने पर बैठा था, उम्र के भार से कुछ झुका हुआ, पर आँखों में वही सदा…
प्रतीक्षा और आशा का दिन
उस गाँव में, जहाँ चिलचिलाती धूप मिट्टी के घरों की दीवारों पर सफेदी चढ़ा देती थी, बूढ़ा इलियास अपनी झोपड़ी के साये में बैठा, आँखें बंद किए, दूर क्षितिज को सुन रहा था। हवा में सूखी मिट्टी की गंध थी,…
पौलुस का गलातियों को स्वतंत्रता का पत्र
येरूशलेम के पुराने रस्तों पर धूप ढल रही थी। हवा में मिट्टी और जलती हुई लकड़ी की गंध थी। शाऊल, जिसे अब सब पौलुस कहते थे, एक कमरे में टहल रहा था। उसकी उंगलियाँ एक पुरानी मेज़ की खुरदरी सतह…
क्रूस की मूर्खता और मलिक की समझ
कुरिन्थुस का बंदरगाह दिनभर की गर्मी के बाद एक नम, नमकीन सांस छोड़ रहा था। हवा में जहाजों के रस्सों की खटखटाहट, दूर बाजार से आती हल्दी और जैतून के तेल की गंध, और कहीं से आते यूनानी दार्शनिकों के…
प्रकाश की ओर पहला कदम
समुद्र की हल्की लहरें जहाज़ के पतवार से टकरा रही थीं, और हवा में नमक की एक हल्की गंध थी। पौलुस ने कन्धे पर पड़ी अपनी साधारण चादर को ठीक किया, और आँखें सेलेउकिया के बढ़ते हुए तट की ओर…
काना का चमत्कार
काना गाँव की गलियाँ उस दिन शादी के गीतों से गूंज रही थीं। हवा में केसर और इलायची की खुशबू तैर रही थी, और दोपहर की धूप नीम के पेड़ों से छनकर आँगन में चाँदी के सिक्कों की तरह बिखर…
विवाह, बच्चे और धन: यीशु की कठोर शिक्षाएँ
सूरज यरूशलेम की ओर जाने वाली उस सड़क पर सिर के ऊपर तप रहा था। धूल उड़ती, पैरों के नीचे कंकड़ चटकते। यीशु चल रहे थे, और उनके साथ वे लोग थे जो अब केवल शिष्य ही नहीं, एक प्रश्न…
सच्ची भक्ति का मार्ग
गाँव के पश्चिम में एक पुराना बरगद था, जिसकी छाया दोपहर बाद एक ठंडी शरण बन जाती थी। उसी छाया में बैठा था यूसुफ, जिसके हाथ की मुट्ठी में कुछ सिक्के थे, और दिल में एक उलझन। सामने की ओर…
सड़ते साम्राज्य का अंत: नीनवे
(एक लंबी, विस्तृत कथा) वह शहर जो कभी अजेय माना जाता था, अब अपनी ही बदबू में सड़ रहा था। नीनवे की दीवारें, जो मोटी और ऊंची थीं मानो स्वयं पर्वतों से ईर्ष्या करती हों, अब घेराबंदी के धुएं से…









