महाप्रलय और अनुग्रह का सन्दूक
वह आखिरी दिन शुरू हुआ था सामान्य सी सुबह से। आकाश में बादल तैर रहे थे, पर कोई भयावह संकेत नहीं था। नूह की पीठ थोड़ी झुक गई थी इतने वर्षों के श्रम से, पर उसकी आँखों में वही दृढ़ता…
समुद्र से उठा पशु
समुद्र का किनारा वैसा ही था, जैसा सदियों से रहा आया था – अनंत, गहरा, और रहस्यों से भरा। मछुआरे अपनी दैनिक दिनचर्या में लगे थे, और आकाश में चीलें चीख रही थीं। पर उस दिन, हवा में एक अजीब…

