बात उन दिनों की है जब राजा यरोबाम के शासन के अंतिम वर्ष थे। शिलोह गाँव में एक बूढ़ा किसान रहता था, नाम था एलियाब। उसकी उम्र के साथ-साथ अनुभव की परतें भी चढ़ी थीं, और वह अक्सर अपने खेत के किनारे बैठकर गाँव के युवाओं को जीवन की उलझनों पर टूटी-फूटी बातें सुनाया करता। एक दिन, गर्मी की दोपहर में, उसका पोता और कुछ अन्य युवक उसके पास बैठे थे। हवा में सूखी मिट्टी की गंध थी, और दूर आकाश में बाज़ चक्कर काट रहा था।
एलियाब ने अपनी लाठी को ज़मीन पर टेकते हुए कहा, “देखो, जीवन एक बड़ी खेती है। और एक मरे हुए मक्खी की वजह से इत्रसाज़ का मूल्यवान तेल बदबू देने लगता है। ठीक वैसे ही, थोड़ी सी मूर्खता बड़ी समझदारी और इज्ज़त को नष्ट कर देती है।”
वह चुप हुआ, फिर एक कहानी सुनाने लगा। “याद है न हमारे पड़ोस के गाँव का वह माली, योनातान? उस्ताद हाथ था उसके पास। फूलों को ऐसे सजाता, मानो राजा के बाग़ के लिए हों। लेकिन एक दिन, उसने अपने ही बगीचे के दरवाज़े के कुंडे को ठीक करने की जगह, सोने के फूलदान पर खरचा करना शुरू कर दिया। कुंडा टूटा रहा, बारिश में दरवाज़ा टूट गया, जानवर घुस आए, और सारी मेहनत रातों-रात मिट्टी में मिल गई। उसकी बुद्धि का भंडार तो था, लेकिन दिशा भटक गई थी। उसने छोटी चीज़ को तुच्छ समझा, और बड़ा नुकसान उठाया।”
पोता माथे पर पड़ी शिकनों को सहलाते हुए बोला, “दादा, पर क्या हमेशा बुद्धिमान का दिल दाहिनी ओर ही होता है, और मूर्ख का बाईं ओर?”
एलियाब ने आँखों में एक चमक लाते हुए कहा, “नहीं बेटा, ऐसा नहीं है। यह तो एक मिसाल है। मैंने एक बार देखा था, जब हमारे गाँव का मुखिया, जो बहुत विवेकी माना जाता था, उसने एक न्याय के मामले में पक्षपात किया। वह राजा के दरबार से आए एक धनी व्यापारी के पक्ष में झुक गया, और एक गरीब विधवा की उपेक्षा कर दी। उसकी बुद्धि, जो उसके पाँवों में होनी चाहिए थी, उसने उसे गुमराह कर दिया। वह सीधे रास्ते पर चलते-चलते अचानक एक गड्ढे में गिर पड़ा, जिसे उसने खुद ही खोद रखा था। उसकी इज्ज़त धूल में मिल गई। मूर्खता सिर्फ ज्ञान का अभाव नहीं, बल्कि बुद्धि का गलत इस्तेमाल भी है।”
दोपहर ढलने लगी थी। एलियाब ने एक पत्थर उठाया और दूर फेंकते हुए कहा, “और फिर वह दिन भी याद आता है, जब राजा के एक अधिकारी ने, बिना सोचे-समझे, सैनिकों को आदेश दिया कि वे उत्तर की बजाय दक्षिण के रास्ते से शत्रु पर चढ़ाई करें। शत्रु तो उत्तर में था। सैनिक भटक गए, थक गए, और हार गए। एक गलत दिशा में उठाया गया कदम, पूरी सेना के लिए संकट बन गया। जो गड्ढा खोदता है, उसमें वह स्वयं गिरता है। और जो दीवार गिराता है, उसे साँप काट लेता है।”
वह गंभीर हो गया। “लेकिन सबसे बड़ी मूर्खता तो वह है, जब अयोग्य सिंहासन पर बैठ जाए। मैंने अपनी आँखों से देखा है, राजा के बेटे, जो केवल जन्म के कारण ऊँचे स्थान पर थे, कैसे उन्होंने जनता का दुःख नहीं समझा। उन्होंने दावतों में सोना उड़ाया, जबकि किसान सूखे से त्रस्त थे। और योग्य लोग, विद्वान, अनुभवी सेनापति, दरबार के कोनों में धकेल दिए गए। तुमने कभी देखा है, संगमरमर के महल के सामने गरीबों की झोंपड़ियाँ? यही तो है, धनी नीचे बैठे, और नौकर घोड़ों पर चढ़े हुए।”
अँधेरा घिरने लगा था। एलियाब ने अंतिम बात कही, “इसलिए बेटा, चाहे तुम लकड़ी काट रहे हो, पत्थर तोड़ रहे हो, या भूमि जोत रहे हो, अपने काम में चतुराई दिखाओ। लेकिन याद रखना, अगर कुल्हाड़ी कुंद हो गई है, और तुम उसकी धार नहीं बढ़ाते, तो तुम्हें दुगनी ताकत लगानी पड़ेगी। बुद्धि का ठीक से उपयोग करो। साँप को पकड़ना है, तो सही समय और सही तरीका जानो, नहीं तो वह डस लेगा। और जो केवल अपनी जीभ चलाता है, वह अपना और दूसरों का अहित ही करता है।”
युवक चले गए। एलियाब अकेला बैठा रहा। उसने आकाश की ओर देखा। राजाओं के राजा का शासन तो अटल है, उसने सोचा। मनुष्य की सारी चतुराई और मूर्खता उसकी नज़रों में है। और जीवन, यह हवा के झोंके की तरह है, जिसका रुख कोई नहीं जानता। पर उस राह पर चलना, जो सीधी और न्याय की है, यही तो सच्ची बुद्धिमानी है। चिड़ियाँ चहचहा रही थीं, और दूर से लकड़हारे के कुल्हाड़ी के वार की आवाज़ आ रही थी। सब कुछ अपनी गति से चल रहा था।




