समुद्र के किनारे बैठा वह बूढ़ा मल्लाह अब भी उस शहर को याद करता है, जैसे कोई बिछड़े हुए प्रेमी को याद करता हो। उसकी आँखों के सामने तूर अभी भी जीवित है – समुद्र की लहरों पर तैरता हुआ एक ऐश्वर्यशाली स्वप्न, धूप में चमकती संगमरमर की इमारतों का मीनार, दुनिया भर के जहाजों से भरा एक विशाल बंदरगाह। वह कहता, “तूर सिर्फ एक शहर नहीं था, बेटा। वह तो समुद्र की गोद में बसा एक गीत था, और हम सब उस गीत के शब्द थे।”
तूर की नींव, वह बताता, पहाड़ों की गोद से आई थी। हेर्मोन पर्वत से उतरे बशान के देवदार के लट्ठे, सेनिर के घने जंगलों से कटकर आई दृढ़ लकढ़ी, बड़े-बड़े बेड़ों में बाँधकर लाई जाती, और फिर यहाँ के कारीगर, जिनकी कला पर समुद्र देवता स्वयं मेहरबान होते, उन लट्ठों को जोड़-तोड़कर ऐसे जहाज बनाते जो समुद्र के राक्षसों को भी मात दे सकते थे। मस्तूल के लिए लबानोन के देवदार, खेवने के लिए बाशान की चीड़, तख्तों को जोड़ने के लिए कित्तीम के द्वीपों से आया सन्नोबर का लचीला लकड़ी का गोंद – सब कुछ चुना हुआ, उत्तम।
और फिर था उसका वैभव। जहाज के पाल बढ़िया मिस्र का सन और रेशमी कपड़ा बनते, जो हवा से भरकर चित्रित मेघों की तरह लगते। नीले और बैंगनी रंग के कपड़े, एलीशा के तटों से आए, तम्बू और आसनों को सजाते। तूर के मल्लाह, वे सिद्ध नाविक, तुम्हारे कप्तान बनते; तूर के बढ़ई और कारीगर तुम्हारे दल में रहकर जहाज को बचाए रखते। सारे संसार के योद्धा – पुल के लोगों के भाला-धारी, परास के लोगों के ढाल-तलवार वाले – तुम्हारी शोभा बढ़ाते, तुम्हारे किलेबंद मस्तूलों पर टँगी अपनी ढालों से डर का संचार करते।
लेकिन असली जादू था तेरा व्यापार। अरे, क्या नहीं आता था यहाँ! दूर-दूर तक फैले तारशीश के व्यापारी, चाँदी-लोहे-टिन-सीसे के भंडार लेकर तेरे साथ साझा करते। यावान, तुबल और मेशेख के लोग तेरे पास दास और काँसे के बर्तन लाते। बेत-तोगर्मा के घोड़े, युद्ध के अश्व और सवारों की टोलियाँ लेकर आते। रोदान के लोग हाथी-दाँत और कीमती आबनूस की लकड़ी देते। अराम के व्यापारी तेरी बहुत-सी चीजों के बदले माणिक, बैंगनी कपड़ा, सुनहला काम किया हुआ रेशम और मलमल देते। यहूदा और इस्राएल के लोग मिन्नित के गेहूँ, मुरब्बा, शहद, तेल और सुगन्धित राल के बदले व्यापार करते। दमिश्क के लोग हेलबोन की अंगूरी और सफेद ऊन लाते। वेदान और यावान के व्यापारी चमकता हुआ लोहा, दालचीनी और गन्धरस लाते। देदान के सौदागर महीन कालीनों पर सवार होकर आते। अरब और केदार के सरदार मेम्ने, बकरियाँ और बड़े ढोर लाते। शबा और रआमा के व्यापारी हर तरह की उत्तम सुगन्धियाँ, बहुमूल्य पत्थर और सोना लाते। हारान, कन्ने और एदेन के सौदागर, शबा, अश्शूर और किलमद के व्यापारी – सब तेरे साथ व्यापार करते, तेरे बाजारों को सँवारते।
तेरे बेड़े, ओ तूर, समुद्र में बड़े-बड़े जहाजों के समान थे। वे तुझे संपदा से भर देते, और तू समुद्र के बीचों-बीच महिमामय बन गया। पूर्व से पश्चिम तक, सब तेरा गुणगान करते। पर क्या हो गया? एक दिन, पूर्वी हवाओं ने जैसे अपना मिजाज बदल लिया। समुद्र की गहराइयों से, उन पुराने दुश्मनों ने, जिनसे तू व्यापार करता था, ऐसा तूफान उठाया कि तेरे सारे वैभव, तेरे सारे मल्लाह, तेरे कप्तान और कारीगर, सब समुद्र की निगल में समा गए। तेरे बाजारों का कोलाहल, जहाजों के पालों की सरसराहट, सौदागरों की मोलभाव की आवाजें – सब उसी गहराई में डूब गई, जिससे तूने अपना ऐश्वर्य निकाला था।
अब तेरे बंदरगाह पर सन्नाटा है। वीणा बजाने वाले, गायक, बाँसुरी वादक – सब चले गए। तेरे जहाजों पर मिट्टी पड़ गई है, और तेरे बलवान पुराजन गहरे पानी में पड़े हैं। मल्लाहों की चीखें अब सिर्फ हवा में सुनाई देती हैं, एक शोकगीत की तरह। और समुद्र का पानी, जो कभी तेरे चरण धोता था, अब तुझे निगल चुका है।
बूढ़ा मल्लाह आँखें बंद कर लेता है। “हमने सोचा था कि हम समुद्र के स्वामी हैं,” वह फुसफुसाता है। “पर भूल गए कि समुद्र का एक और रूप भी है – वह जो सब कुछ ले लेता है। तूर हमारा अहंकार था, हमारी शान। और जब अहंकार इतना बढ़ जाए कि उसे अपने स्रोत का स्मरण ही न रहे, तो समुद्र उसे अपनी गहराइयों में बुला लेता है। यह कोई साधारण पतन नहीं था, बेटा। यह एक सबक था। और सबक इतने विशाल होते हैं कि उन्हें पूरे शहरों की कीमत चुकानी पड़ती है।”
वह उठता है, अपनी लाठी टेकता हुआ। पीछे, समुद्र का एकान्त कोलाहल जारी है, मानो किसी शोकाकुल गीत को दोहरा रहा हो जिसके बोल अब कोई नहीं समझता।




