शनिवार और पर्वत का उपदेश
एक सुबह, ठंडी हवा में धुंध लिपटी हुई थी, गलील की झील का पानी शांत और चमकदार। येशू किनारे पर टहल रहे थे, उनकी नज़र दूर मछुआरों की नावों पर टिकी हुई, जो रात भर के परिश्रम के बाद अपने…
क्षमा का असीम सागर
कफरनहुम की गलियों में दोपहर की धूप तिरछी पड़ रही थी। पत्थरों के घरों से उठती गर्मी की लहर हवा में तैर रही थी। यीशु, थके हुए कदमों से चलते हुए, एक बरगद के पेड़ की छाया में बैठ गए।…
जकर्याह का दीपाधार दर्शन
वह दिन ढल रहा था और यरूशलेम की हवा में पत्थर की धूल और उदासी का स्वाद था। जकर्याह खंडहर हो चुके मन्दिर के आँगन में खड़ा था। उसकी आँखों के सामने बिखरे पत्थरों के ढेर थे, जो एक ऐसी…


