साल: 2026

निनवे का पश्चाताप और दया

वह सुबह नीनवे में किसी और सुबह की तरह ही शुरू हुई। पूर्वी आकाश में सूरज की पहली किरणें विशाल शहर की दीवारों पर पड़ीं, जो एक बड़े सांप की तरह क्षितिज पर लेटी हुई प्रतीत होती थीं। हवा में…

दानिय्येल का स्वर्गदूत दर्शन

तीस दिनों से अधिक समय बीत चुका था। दानिय्येल नदी के किनारे बैठा, उसकी आँखें पानी की धारा में टिकी हुई थीं, पर देख कुछ नहीं रहा था। उसका मन भारी था। यहूदा की धरती से दूर, इस बाबुल की…

भविष्यवाणी: तूर का पतन

यह बात है जब यहूदा के लोग बंधुआई में थे, और हम – मेरे जैसे कुछ लोग – बाबुल के शहरों में बिखरे हुए थे। खबरें आतीं, टूटी-फूटी, कभी व्यापारियों के मुंह से, कभी उन फिरौन के दूतों से जो…

बाबुल के पतन का दर्शन

वह नहर के किनारे बैठा था, और पानी में उतरती शाम का सूरज लहरों पर सोने की काई सा बिछा रहा था। हवा में खजूर के पत्तों की सरसराहट थी, और दूर से किसी मदिरालय की झनझनाहट आ रही थी।…

टूटा घड़ा और भविष्यवाणी

यिर्मयाह को पता था कि आज का दिन कठिन होगा। सुबह की धूप यरूशलेम की पथरीली गलियों पर पड़ रही थी, पर उसकी आत्मा में एक ठंडक बैठी हुई थी। भगवान का वह शब्द, जो अक्सर उसके भीतर एक जलती…

पापों का भार वहन करने वाला

वह दिन ऐसा था जैसे आकाश ने सिसकियाँ भर रखी हों। हवा में धूल के बवंडर नहीं, एक स्थिर उदासी थी, जैसे सारी सृष्टि किसी बड़े दुख की प्रतीक्षा में साँस रोके बैठी हो। मैं, यशायाह, अपनी कुटिया के सामने…

बाबुल के पतन की दृष्टि

यह वह समय था जब दुनिया अपनी धुरी से टूटती प्रतीत हो रही थी। मेरे कक्ष की छत पर लकड़ी का पंखा धीरे-धीरे घूम रहा था, मगर हवा में कोई शीतलता नहीं थी, केवल एक भारी, दमघोंटू गर्मी थी जो…

जीवन का चक्र और समर्पण

वह दिन ठीक वैसे ही शुरू हुआ जैसे उत्तर प्रदेश के उस छोटे से गाँव के अधिकतर दिन शुरू होते थे। कृष्णा की आँखें खुलीं तो सूरज की पहली किरणें अपना रास्ता बनाती हुई, कच्ची मिट्टी की दीवारों पर पड़…

सृष्टि की सुबह में बुद्धि का आह्वान

एक समय की बात है, जब सृष्टि की सुबह थी और समय के पैमाने पर ओस की बूंदें टपक रही थीं। वह प्राचीन दिन, जब पर्वतों की नींव भी नहीं रखी गई थी, और सागर की गर्जना अभी सपने में…

आँसुओं से बोना हँसी से काटना

वह सुबह ठंडी थी। यरूशलेम की पहाड़ियों पर हवा में अभी भी रात की सिहरन लिपटी हुई थी। एलियाव की आँखें, समय से पहले ही झुर्रियों से भर गई थीं, पूर्व दिशा में उस धुंधली पट्टी को ताक रही थीं…