सृष्टि का आभारी विस्मय
वह सुबह ऐसी थी मानो संसार नया-नया जन्मा हो। आकाश के किनारे पर सूरज की पहली किरण ने सोने का रंग घोल दिया था, धीरे-धीरे, जैसे कोई चितेरा रंग फैला रहा हो। पहाड़ों की चोटियाँ, अभी तक नीले छायारंग में…
वह सुबह ऐसी थी मानो संसार नया-नया जन्मा हो। आकाश के किनारे पर सूरज की पहली किरण ने सोने का रंग घोल दिया था, धीरे-धीरे, जैसे कोई चितेरा रंग फैला रहा हो। पहाड़ों की चोटियाँ, अभी तक नीले छायारंग में…